नई दिल्ली। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। दिल्ली पुलिस की हिरासत से रिहा होने के कुछ घंटे बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके मोबाइल फोन जबरन अपने कब्जे में लिए और करीब 24 घंटे तक वापस नहीं किए। उन्होंने आशंका जताई कि इस दौरान उनके फोन की क्लोनिंग की गई होगी या उनके साथ छेड़छाड़ भी की गई होगी।
रविवार दोपहर दिल्ली के प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीजेपी नेताओं ने अपनी हिरासत, पुलिस की कार्रवाई और जंतर-मंतर के आसपास लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि वे निर्धारित प्रदर्शन स्थल पर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करना चाहते थे, लेकिन सरकार ने बातचीत का रास्ता अपनाने के बजाय राजधानी में ऐसा माहौल बना दिया, जिसमें सामान्य नागरिकों के लिए भी आवाजाही मुश्किल हो रही है। सीजेपी नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। उनकी मांगें पूरी होने तक देशभर में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन में शामिल होने की अपील भी की।
विमान के अंदर से हिरासत में लिए जाने का आरोप
सीजेपी के तीन प्रमुख नेताओं आशुतोष रांका, सौरव दास और अभिजीत दिपके को शनिवार सुबह दिल्ली पहुंचे विमान से हिरासत में लिया गया था। तीनों को अलग-अलग स्थानों पर ले जाने का आरोप लगाया गया है। रविवार सुबह उन्हें रिहा कर दिया गया। पुलिस के अनुसार, उनकी रिहाई के साथ एक वर्ष की अवधि के लिए शांति बनाए रखने और अच्छे आचरण से संबंधित बांड भी शामिल था। रिहाई के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सौरव दास ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके मोबाइल फोन जबरन ले लिए। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त करने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उनके मुताबिक, फोन जब्त करने के समय आवश्यक जब्ती मेमो तैयार किए जाने जैसी प्रक्रियाओं का भी पालन नहीं किया गया।
“उन्होंने हमें ऐसे उठाया, जैसे हम अपराधी हों”
सौरव दास ने कहा कि तीनों नेताओं को अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया और उनके फोन करीब 24 घंटे तक पुलिस के पास रहे। इस अवधि में उपकरणों के साथ छेड़छाड़ किए जाने या उनकी क्लोनिंग किए जाने की आशंका जताते हुए उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की जरूरत पर जोर दिया। हालांकि, फोन की क्लोनिंग या उनमें किसी तरह की छेड़छाड़ किए जाने की आशंका फिलहाल सीजेपी नेताओं का आरोप है। उपलब्ध जानकारी में इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दिल्ली पुलिस की ओर से इन आरोपों पर क्या जवाब दिया गया, इसकी जानकारी भी इस खबर के लिए उपलब्ध विवरण में नहीं है।
‘शांति भंग तो मोदी और अमित शाह कर रहे हैं’
सीजेपी नेता आशुतोष रांका ने रिहाई के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लिया। एक वर्ष तक शांति और अच्छे आचरण से संबंधित बांड भरने के सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि वास्तविक रूप से शांति भंग करने का काम प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह कर रहे हैं।
रांका ने कहा कि पिछले दो दिनों के दौरान हजारों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। उनके मुताबिक, स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि शनिवार को उन्हें विमान से ही हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने कहा, “पिछले दो दिनों में हमने हजारों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाते देखा है। स्थिति इतनी खराब थी कि कल हमें विमान से ही हिरासत में ले लिया गया।”
रांका ने आरोप लगाया कि सप्ताहांत में विरोध प्रदर्शनों पर की गई कार्रवाई और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लेने से देश की छवि को नुकसान पहुंचा है। उनके मुताबिक, यह केवल कुछ नेताओं या किसी एक संगठन का मामला नहीं है, बल्कि नागरिकों के विरोध करने के अधिकार से जुड़ा सवाल है।
उन्होंने कहा, “यह लड़ाई अभी शुरू हुई है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने इस लड़ाई को युद्ध जैसा बना दिया है।”
रांका ने लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं। उन्होंने ऐलान किया कि सीजेपी रविवार को भी विरोध मार्च निकालेगी और इस्तीफे की मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।
जंतर-मंतर को किले में तब्दील करने का आरोप
सीजेपी नेता सौरव दास ने दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और जंतर-मंतर के आसपास लगाए गए प्रतिबंधों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी निर्धारित स्थल जंतर-मंतर पर ही अपना विरोध दर्ज कराना चाहते थे। इसके बावजूद वहां अत्यधिक सुरक्षा व्यवस्था खड़ी कर दी गई, जिससे यह स्थान एक किले जैसा दिखाई देने लगा है। दास के अनुसार, सरकार को प्रदर्शनकारियों से बातचीत करनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि संवाद का रास्ता अपनाने के बजाय भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती ने टकराव की स्थिति पैदा कर दी है।
उन्होंने कहा, “लोग निर्धारित प्रदर्शन स्थल पर विरोध करना चाहते हैं। सरकार को आगे आकर हमसे बातचीत करनी चाहिए थी। यहां 40 हजार से अधिक जवान मौजूद हैं। इसे एक किला बना दिया गया है। आपने युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी है और लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।”
दास के इस बयान में दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दो सवाल प्रमुखता से उभरते हैं। पहला, जब प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल मौजूद है, तो वहां तक पहुंचने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की प्रक्रिया को सहज क्यों नहीं बनाया जा सकता? दूसरा, क्या अत्यधिक सुरक्षा व्यवस्था और व्यापक प्रतिबंध तनाव कम करने के बजाय उसे बढ़ा सकते हैं? हालांकि, 40 हजार से अधिक सुरक्षा बलों की तैनाती का आंकड़ा सीजेपी नेता का दावा है। उपलब्ध जानकारी में इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
मांगें पूरी होने तक देशभर में जारी रहेगा आंदोलन
सीजेपी नेताओं ने कहा कि उनका विरोध केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा। वे देशभर में शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखेंगे। रांका ने कहा कि सीजेपी रविवार को फिर विरोध मार्च निकालेगी और उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
उन्होंने इस्तीफे की मांग को दोहराते हुए कहा कि आंदोलन जारी रखने का फैसला सरकार के रुख पर निर्भर करेगा। हालांकि, उपलब्ध विवरण में यह स्पष्ट नहीं है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस्तीफे की मांग के साथ किन-किन अन्य मांगों को औपचारिक रूप से रखा गया।
यह पूरा घटनाक्रम एसआईआर को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच सामने आया है। प्रदर्शनकारी मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में आंदोलनकारियों की हिरासत, उनके मोबाइल फोन जब्त किए जाने के आरोप और प्रदर्शन स्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने विवाद को एक नया आयाम दे दिया है।
दक्षिणपंथी संगठनों पर हिंसा भड़काने का आरोप
सीजेपी नेताओं ने दक्षिणपंथी संगठनों पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी के सदस्य भी ऐसे तत्वों का समर्थन कर रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में प्रेस कॉन्फ्रेंस से संबंधित उपलब्ध विवरण में कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है।
इसी बीच रविवार को चार लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई। ये लोग कथित तौर पर दक्षिणपंथी संगठन हिंदू रक्षा दल से जुड़े होने का दावा करते हैं। इनकी गिरफ्तारी दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय मार्ग (डीडीयू मार्ग) पर हुई एक घटना से संबंधित वायरल वीडियो के मामले में की गई। वीडियो में कथित तौर पर कुछ लोगों को युवा विद्यार्थियों पर हमला करते और महिलाओं को धक्का देते तथा मारते हुए देखा गया। पुलिस ने इसी मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
यहां भी आरोपों और पुष्टि किए गए तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। गिरफ्तार लोगों का हिंदू रक्षा दल से जुड़ा होने का दावा और वायरल वीडियो में दिखाई गई कथित हिंसा मामले के महत्वपूर्ण पहलू हैं। वहीं, सीजेपी नेताओं द्वारा भाजपा सदस्यों पर समर्थन देने का आरोप एक अलग राजनीतिक दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं है।
विरोध के अधिकार और कानून-व्यवस्था के बीच बढ़ा टकराव
दिल्ली में हालिया घटनाक्रम ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार, पुलिस की कार्रवाई और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर लगाई जाने वाली पाबंदियों को लेकर बहस तेज कर दी है। एक तरफ प्रदर्शनकारी आरोप लगा रहे हैं कि उन्हें निर्धारित स्थल पर विरोध करने से रोका गया और नेताओं को विमान से हिरासत में लिया गया। दूसरी तरफ, हिरासत से रिहाई के बाद भी उनके मोबाइल फोन जब्त किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल बने हुए हैं।
यदि इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए थे, तो उनकी जब्ती की कानूनी प्रक्रिया, हिरासत की परिस्थितियों और उपकरणों को वापस करने के समय का स्पष्ट विवरण सामने आना महत्वपूर्ण होगा। इसी तरह, फोन की क्लोनिंग या छेड़छाड़ के आरोपों की जांच के लिए ठोस साक्ष्य और पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना चाहिए।
लोकतंत्र में विरोध केवल असहमति जताने का माध्यम नहीं, बल्कि सरकार और संस्थाओं को जवाबदेह बनाने का भी एक तरीका है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन इस जिम्मेदारी के निर्वहन में पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया का पालन भी उतना ही आवश्यक है।
फिलहाल सीजेपी नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उनकी घोषणा है कि आंदोलन देशभर में शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और पुलिस इन आरोपों पर क्या जवाब देती हैं और क्या इस टकराव को बातचीत के जरिए कम करने का कोई रास्ता निकलता है।




