ऑल स्टोरी
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और भारत की सीमा सुरक्षा
भारत की सीमा सुरक्षा में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, स्थानीय समुदायों की भागीदारी, वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम, स्मार्ट बॉर्डर तकनीक और नागरिकता कानून की भूमिका अहम है। जानिए कैसे सीमावर्ती गांव, स्थानीय संस्कृति और आधुनिक सुरक्षा तंत्र मिलकर घुसपैठ, तस्करी और सीमा चुनौतियों का सामना करने की रणनीति का हिस्सा बन रहे हैं।
प्रशांत किशोर ने कैसे लिखी बांकीपुर विजय की पटकथा?
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने भाजपा के सबसे सुरक्षित किले को ढहा कर राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है।। यह बिहार की राजनीति में बदलते जनमत, भाजपा के अति-आत्मविश्वास और राजद की कमजोर होती पकड़ और नए दौर की शुरुआत का संकेत माना जा रहा है।
जब जन-दबाव के आगे झुकी सत्ता! यही है जवाबदेही की नई राजनीति
नीट पेपर लीक, छात्रों के विरोध, जंतर-मंतर आंदोलन और शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े तक पहुंची घटनाओं के बहाने यह लेख लोकतंत्र, जनभागीदारी और सत्ता की जवाबदेही के बदलते स्वरूप का राजनीतिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
जब सड़क पर उतरी Gen-Z तो सत्ता को बदलनी पड़ी राजनीतिक मुद्रा
यदि सत्ता पहली बार जनदबाव के सामने पीछे हटी है, तो यह सिर्फ एक मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक जवाबदेही की वापसी का संकेत भी हो सकता है। लेख के अनुसार, Gen-Z ने सत्ता की जवाबदेही का प्रश्न राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।
कहीं यह मोदी सत्ता के अंत की शुरूआत तो नहीं?
20 जुलाई 2026 के संसद मार्च, युवा आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और संसद के मानसून सत्र के बीच उभरे राजनीतिक घटनाक्रम के विस्तृत विश्लेषण में लेखक ने यह सवाल खड़ा किया है कि कहीं यह मोदी सत्ता के खिलाफ बड़े जन असंतोष की शुरुआत तो नहीं है?
चढ़ावे की हेराफेरी : पकड़े गए तो चोर, वरना समझो साधु
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला ‘ज्यों-ज्यों दवा की, मर्ज बढ़ता गया’ की मानिन्द उलझता ही जा रहा है। जांच कब तक चलेगी और दोषियों से कितनी रिकवरी होती है तथा उन्हें क्या सजा होती है, इस पर सबकी नजर है। मामले का निस्तारण जितनी जल्दी हो जाए, उतना ही अच्छा है, क्योंकि चुनावी वर्ष में यह चढ़ावा चोरी कहीं योगी आदित्यनाथ के गले की हड्डी न बन जाए।
परिसीमन की राजनीति और लोकतंत्र की नई चुनौती
परिसीमन विधेयक के पारित होने से न केवल संविधान में उल्लेखित देश का संघीय ढांचा कमजोर होगा, बल्कि हमारा देश को फासीवाद के और पास में चला जाएगा। हो सकता है कि चुनाव के रूप में छद्म लोकतंत्र जिंदा रहे, लेकिन न लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार कायम रहेंगे, न मानवाधिकारों की कोई कद्र होगी।
विज्ञान के नाम पर आस्था और मिथक का खतरनाक खेल
इंडियन नॉलेज सिस्टम (IKS), नई शिक्षा नीति और विज्ञान बनाम आस्था की बहस पर विस्तृत विश्लेषण। क्या भारतीय शिक्षा में मिथकों को विज्ञान का दर्जा देने की कोशिश हो रही है? पढ़िए पूरी कहानी।
नेहरू ने अवसर गंवा दिया और मोदी ने आपदा को अवसर में बदल दिया
क्या नरेंद्र मोदी ने भारत को नई पहचान दी या नेहरू के दौर की नीतियों ने देश की दिशा तय की? पढ़िए नेहरू और मोदी के विकास मॉडल, वैचारिक दृष्टिकोण और राजनीतिक विरासत पर आधारित यह विस्तृत विश्लेषण।
मंदिर के चढ़ावे से विपक्षी सांसदों तक डाकेजनी!
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर आधारित इस राजनीतिक विश्लेषण में उत्तर प्रदेश की राजनीति, भाजपा के अंदरूनी समीकरण, विपक्षी दलों में कथित टूट, परिसीमन और 2027 के चुनावी प्रभावों पर लेखक ने विस्तार से अपनी राय रखी है।

























