ऑल स्टोरी
बर्बरता को धर्म का चोंगा ओढ़ाने का ट्रंपियापा
धर्म की आड़ में हिंसा का महिमामंडन करना कोई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से सीखे। कुछ ख़ास ईसाई पादरियों को बुलाकर राष्ट्रपति भवन में विशेष प्रार्थना सभा कराना, ईस्टर के दिन खुद की तुलना ईसा मसीह से करने जैसी हरकतें एक तरह से ईरान पर हिंसक हमले को जायज ठहराने की कोशिश ही तो है।
नक्सल मुक्त भारत के बाद अब अर्बन नक्सल पर निर्णायक प्रहार जरूरी
आज नक्सलवाद का स्वरूप बदल चुका है। यह अब जंगलों से निकलकर शहरों और संस्थानों में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है। इसलिए इस चुनौती का समाधान भी नए दृष्टिकोण से करना होगा। नक्सल मुक्त भारत की उपलब्धि को बनाए रखने के लिए अब ध्यान शहरी क्षेत्रों, विश्वविद्यालयों और सामाजिक संगठनों पर केंद्रित करना होगा।
क्या मौजूदा तेल संकट 1973 से भी बड़ा है?
पूरी दुनिया एक बार फिर से ऊर्जा संकट की गिरफ्त में है। इस बार की कहानी सिर्फ तेल की नहीं, बल्कि जियो पॉलिटिक्स, युद्ध और ग्लोबल सप्लाई चेन के टूटते-बिखरते संतुलन की है। 1973 का तेल संकट राजनीतिक और रणनीतिक निर्णय का नतीजा था। लेकिन मौजूदा संकट किसी नीतिगत निर्णय का परिणाम नहीं, बल्कि सीधे सैन्य संघर्ष का प्रभाव है।
पश्चिम एशिया संकट और भारत की कूटनीति
पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत ने संतुलित और कूटनीतिक रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में स्पष्ट किया कि भारत युद्ध के पक्ष में नहीं है और संवाद के जरिए शांति स्थापित करने का समर्थन करता है।
बोले तो खूब, मगर कहा कुछ नहीं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च 2026 को राज्यसभा में वैश्विक संघर्ष और इजरायल-अमेरिका की कार्रवाई पर भारत का पक्ष रखा। लंबे समय तक चुप्पी के बाद दिए गए इस बयान को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह स्पष्ट नीति है या केवल औपचारिक प्रतिक्रिया।
मोदी युग में भारत बदला जरूर, मगर गया तो पीछे ही!
पिछले महीने 22-23 मार्च को नरेंद्र मोदी को उच्च सार्वजनिक पदों पर रहते हुए 8,931 दिन हो गए। इसके साथ ही मोदी ने उस पवन चामलिंग का रिकार्ड तोड़ दिया जो 24 वर्षों तक सिक्किम के मुख्यमंत्री रहे थे। पवन चामलिंग का मुख्यमंत्री का कार्यकाल, 8,930 दिनों का ही था।
एक बार फिर ‘नीतीशे सरकार’ के निहितार्थ
नीतीश कुमार ने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर भले ही सत्ता का नया समीकरण तय कर दिया हो, लेकिन नए मंत्रिमंडल में बीजेपी का मजबूत दबदबा इस बात का साफ संकेत दे रही है कि बिहार की राजनीति अब एक नए सत्ता संतुलन की ओर बढ़ चली है। क्या कहें इसे- NDA की एक स्थिर सरकार की शुरुआत है या नए राजनीतिक संघर्षों का संकेत?
‘भू-राष्ट्रवाद’ से ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ की ओर
वंदे मातरम् का मूल भाव ‘भारत’ है। भारत की शाश्वत संकल्पना जिसने मानवता के प्रथम पहर से खुद को गढ़ना शुरू कर दिया, जिसने युगों-युगों को एक-एक अध्याय के रूप में पढ़ा। आज़ादी की लड़ाई में वंदे मातरम् की भावना ने पूरे राष्ट्र को प्रकाशित किया था।
प्राकृतिक खेती ही है टिकाऊ समाधान
“प्राकृतिक खेती” एक वैज्ञानिक, रसायन-मुक्त और पर्यावरण हितैषी कृषि पद्धति है जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है, किसानों की लागत घटाती है और उपभोक्ताओं को पौष्टिक भोजन प्रदान करती है। भारत में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत लाखों किसान एक बार फिर से पारंपरिक तरीकों से जैविक खेती को अपना रहे हैं।
जेन-जी को सत्ता की सीढ़ी बनाने की साज़िश
जब युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा न मिले तो वह या तो विध्वंस करती है या शिकार बन जाती है। आज भारत की जेनरेशन-जी (Gen-Z) एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां वह या तो देश का भविष्य गढ़ सकती है या फिर एक बार फिर 'क्रांति' के नाम पर मोहरा बन सकती है।

























