भारत माता का अजब-गजब इंटरव्यू

भारत भूषण

स्टेशन पर पहुंचा ही था कि हाथ में कटोरा लिए अपने बच्चों को दुआएं देती भारत माता के दर्शन हो गए। भारत माता को नम्रता पूर्वक नमस्कार कर इंटरव्यू की गुहार लगाई तो वो तुरंत तैयार हो गईं।

मैंने पूछा, तुम्हारे दत्तक पुत्र तुम्हारी जय जयकार करते हैं तो आपको कैसा महसूस होता है? तो भारत माता ने कहा- बेटा, पांच साल पहले तो बड़ा अच्छा लगता था लेकिन अब बहुत बुरा लगता है। अब तो ऐसा लगता है जैसे कोई ताना सा मार रहा हो।

क्यों मां! ऐसा क्यों लगता है? तो भारत माता ने गहरी सांस खींचते हुए कहा, बेटा! जयकारा सुनना तभी अच्छा लगता है जब पेट भरा हुआ हो। खाली पेट तो ऐसा लगता है जैसे कोई सीने में तीर सा मार रहा हो।

मैंने फिर पूछा, मां! तुम्हारा जयकारा लगाने वाले दत्तक पुत्र तुम्हारा कुछ तो ख्याल रखते ही होंगे? तो भारत माता ने कहा, अगर ख्याल रख रहे होते तो आज स्टेशन पर कटोरा लिए नजर नहीं आती। हा! वह इतना ही ख्याल रखते हैं कि जब मैं इनसे दाल रोटी मांगती हूं तो यह लोग मेरे कटोरे में थोड़े से पकोड़े डाल जाते हैं। इससे कुछ समय के लिए भूख तो मिट जाती है लेकिन बेटा, पेट की आग थोड़े ही इससे बुझती है।

मैंने पूछा, मां! पेट की आग और पेट की भूख वाली पहेली मुझे समझ नहीं आई? तो भारत माता ने हल्का सा गुस्सा करते हुए कहा, अपने आपको बहुत बड़ा पत्रकार समझता है लेकिन इतना अंतर भी नहीं जानते? अब तुम्हें क्या बोलूं बेटा! जब जयकारा लगाने वाले ही इस पहेली को नहीं समझते तो तुम क्या समझोगे?

भारत माता बोलीं, खैर! कोई बात नहीं। मैं बताती हूं, बेटा! पेट की भूख अस्थायी होती है जो पकोड़े, डोसा, बर्गर, पिज़्ज़ा आदि से मिटाई जा सकती है, लेकिन पेट की आग तो दाल रोटी से ही बुझ सकती है, दाल रोटी का मतलब रोजी-रोटी से होता है समझे पत्रकार पुत्तर।

चलो मां, एक बात और बताओ। जयकारा लगाने वाले तुम्हारे यह दत्तक पुत्र कहते हैं कि तुम्हारा दूसरा पुत्र तुम्हारा ना तो जयकारा लगाता है और ना ही तुम्हारे आगे शीश नवाता है? तो भारत माता ने जोर का ठहाका लगाते हुए कहा, इनकी इन चुगली की वजह से ही मेरे हाथ से यह कटोरा नहीं छूट पा रहा है।

भारत माता ने जरा गंभीर होते हुए फिर कहा, कोई मेरी जय बोले या नहीं, मेरे आगे शीश झुकाए या नहीं, मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मुझे तो यह देखना है कि जिस ऊपर वाले के आगे मैं शीश झुकाती हूं वह उसके आगे शीश झुकाता है या नहीं, ऊपर वाले की जय बोलता है या नहीं।

अच्छा मां! 2019 के नए साल पर आपका कोई संदेश? तो भारत माता ने भावुक होते हुए कहा, एक ही संदेश है बेटा! मेरे हाथ से यह कटोरा छुड़वाने के लिए अल्लाह ईश्वर के नाम का या पिछले सत्तर साल का कोई बहाना नहीं कोई ड्रामा नहीं करे कोई।
हर खेत की प्यास बुझे, हर हाथ को काम मिले,
मेरी हर संतान को काम, खुशी का इनाम मिले।

(बक्कड़ खाना कॉलम के तहत भारत भूषण का यह व्यंग्यात्मक आलेख उनके फेसबुक वॉल से साभार प्रकाशित किया गया है।)

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सत्ता विमर्श डेस्क
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