JNUSU Election Results : एबीवीपी से कांटे की टक्कर में एक बार फिर वाम दलों का परचम

नई दिल्ली। जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव में एक बार फिर वामपंथी उम्मीदवारों ने जीत का परचम फहराया है। हालांकि इस बार के चुनाव में दक्षिणपंथी छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने वामपंथी संगठनों के उम्मीदवारों को कड़ी टक्कर दी।

काउंटिंग के दौरान अध्यक्ष पद के लिए एबीवीपी उम्मीदवार शिखा स्वराज काफ़ी देर तक आईसा-डीएसएफ़ गठबंधन उम्मीदवार नीतीश कुमार से आगे भी रहीं। लेकिन अंतिम परिणाम में टॉप के चार में से तीन पदों पर वामपंथी उम्मीदवारों को ही जीत मिली। इनमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और महासचिव पद शामिल हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने 9 साल बाद एक बार फिर वापसी करते हुए संयुक्त सचिव पद पर जीत दर्ज की है।

JNUSU चुनाव आयोग की ओर से रविवार देर रात जारी नतीजों के अनुसार, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के नीतीश कुमार ने 1,702 वोट पाकर अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। ABVP की शिखा स्वराज को 1430 जबकि स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के तैयब्बा अहमद को 918 वोट मिले।

उपाध्यक्ष पद के लिए डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (DSF) की मनीषा (1150 वोट) ने ABVP के निट्टू गौतम को सिर्फ 34 वोट से हराया। महासचिव के पद पर आईसा-डीएसएफ़ की उम्मीदवार मुंतेहा फ़ातिमा (1520 वोट) ने कब्जा किया है, जबकि एबीवीपी के कुणाल राय दूसरे नंबर पर रहे। संयुक्त सचिव पद की बात करें तो इस पद पर एबीवीपी के उम्मीदवार वैभव मीणा (1518 वोट) को जीत मिली है। आईसा-डीएसएफ़ के नरेश कुमार संयुक्त सचिव पद की इस लड़ाई में दूसरे नंबर पर रहे। 25 अप्रैल को हुए चुनाव में 7,905 स्‍टूडेंट्स में से 5,500 ने चुनाव में मतदान किया था।

वामपंथी संगठनों में आपसी फूट से एबीवीपी ने दी टक्कर

दरअसल, इस बार के चुनावों में वाम दलों के छात्र संगठनों का पुराना गठबंधन काफी हद तक बिखरा हुआ नजर आया। पिछले करीब आठ साल से एक साथ रहे आईसा, एसएफआई और बाकी दल इस बार अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरे थे।

जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष एन. साई बालाजी की मानें तो इस बार चुनाव से पहले एसएफआई और आईसा अलग हो गए। आम तौर पर 2016 से वाम दलों का गठबंधन एक साथ था और अलग-अलग पद पर अलग-अलग छात्र संगठन के उम्मीदवार लड़ते थे।

साल 2016 में आईसा और एसएफआई एक साथ थे। साल 2017 में इस गठबंधन में डीएसएफ भी जुड़ गया और इसके अगले साल इसमें एआईएसएफ भी शामिल हो गया। पिछली बार यानी 2023-24 की बात करें तो यूनिवर्सिटी के चारों प्रमुख पदों पर वाम दलों के छात्र संगठनों की जीत हुई थी जिनमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव के पद शामिल हैं।

इस बार के चुनाव में लेफ्ट अलायंस के बीच में लंबी-चौड़ी दरार देखने को मिली। AISA और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (DSF) ने मिलकर चुनाव जरूर लड़ा, लेकिन SFI और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) ने बिरसा अंबेडकर फुले स्टूडेंट्स एसोसिएशन (BAPSA) और प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स एसोसिएशन (PSA) के साथ गठबंधन किया।

दूसरी तरफ, ABVP ने अकेले दम पर चुनाव लड़ा और उसका फायदा यह हुआ कि 9 साल बाद संयुक्त सचिव पद पर जीत के साथ अन्य पदों पर भी बहुत ही कम मार्जिन से पीछे रहे। 2015-16 के बाद ABVP ने JNSU के केंद्रीय पैनल में एक बार फिर जगह बनाई है। ABVP ने 2000-01 में अध्यक्ष पद जीता था।

Previous articleकोई बताए तो सही, घोड़े भड़के तो भड़के क्यों?
Next articleCWG Scam Ends: CBI के बाद ED की भी क्लोजर रिपोर्ट पर कोर्ट ने लगाई मुहर
सत्ता विमर्श डेस्क
सत्ता विमर्श (Satta Vimarsh) नाम ही हमारी पहचान है। हमारा मानना है कि सब कुछ सत्ता के इर्द-गिर्द तय होता है, सरकार भी और सरोकार भी। लेकिन, इस सत्ता में हमारी-आपकी भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी सत्ता में बैठे लोगों की। इसीलिए सत्ता और सरोकार से जुड़े मुद्दों पर विमर्श जरूरी है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here