लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि जब चुनौती सामने खड़ी हो और राष्ट्रीय संकट के लिए कोई स्पेस दे रहा हो तो धैर्य और एकता ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी होती है। पूरी दुनिया ने पाकिस्तान और उसके आकाओं के उस बेशर्म चेहरे को देखा जिसमें आतंकियों के जनाजे में वहां के नेता व सैन्य अधिकारी शामिल हुए। ये चीजें दिखाती हैं कि पाकिस्तान एक विफल राष्ट्र है और 70-75 वर्षों में उसने सिर्फ आतंकवाद के ही बीज बोए हैं। पाकिस्तान ने अपनी विफलता की कहानी ही दुनिया को बताई है।
सीएम योगी ने कहा कि पाकिस्तान की तरफ से आतंकवाद को दिए जा रहे प्रश्रय इस बात को साबित करते हैं कि आतंकवाद एक दिन पाकिस्तान को ही निगल जाएगा। खोखला हो चुका पाकिस्तान आज जिस प्रकार का दुस्साहस कर रहा है, ऑपरेशन सिंदूर उसका माकूल जवाब था। आने वाले समय में यह तय है कि भारत की तरफ जो भी अंगुली उठाएगा और बहन-बेटियों के सम्मान के विरुद्ध सुरक्षा में सेंध लगाने का कार्य करेगा, उसके जनाजे में कोई रोने वाला भी नहीं मिलेगा।
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद सेना के शौर्य को सलामी देने के लिए सीएम योगी ने बुधवार को अपने सरकारी आवास से भारत शौर्य तिरंगा यात्रा को रवाना किया। सीएम योगी ने हाथ में तिरंगा लेकर यात्रा का नेतृत्व भी किया। सीएम योगी ने कहा कि पूरा देश भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम को सैल्यूट करते हुए बहादुर जवानों का अभिनंदन करने के लिए उतावला दिखाई दे रहा है।
सीएम योगी ने कहा कि पाकिस्तान परस्त आतंकियों ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में जिस वीभत्स व बर्बर घटना को अंजाम दिया था, उसकी निंदा देश-दुनिया ने की थी, लेकिन आतंकवाद का पोषक पाकिस्तान व उसके आका मौन रहे। भारत के आन-बान-शान की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध हमारी सरकार ने सारे प्रमाण दिए, उसके बाद भी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो अंततः ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया गया। पहले ही दिन 100 से अधिक आतंकियों व प्रत्यक्ष रूप से आतंकवाद के विषबेल को पालने-पोसने में योगदान देने वाले उनके परिवार से जुड़े लोगों को वीभत्स कृत्य की सजा दी गई। सभी ने भारतीय सेना के पराक्रम व शौर्य का लोहा माना। पाकिस्तान की हिमाकत का थल, वायु व नौसेना के बहादुर जवानों ने मजबूती से जवाब दिया और दुनिया को भी संदेश दिया कि हम छेड़ेंगे नहीं, लेकिन छेड़ने वालों को छोड़ेंगे नहीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी का पहले दिन से ही संकल्प रहा है कि जब हम नए और विकसित भारत की बात करते हैं तो हमारा ध्येय राष्ट्र प्रथम होना चाहिए। विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए आवश्यक है कि हम राष्ट्र प्रथम के भाव के साथ काम करें। जब राष्ट्र प्रथम का भाव 140 करोड़ भारतीयों की प्राथमिकता होगी तो अपने-अपने क्षेत्र में कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए हर भारतवासी लगेगा, फिर दुनिया की कोई ताकत भारत के सामने टिक नहीं पाएगी।




