ईरान-अमेरिका के बीच शांति वार्ता नाकाम, अब होर्मुज स्ट्रेट में टोल पर टकराव

नई दिल्ली। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच शांति को लेकर 21 घंटे से ज्यादा समय तक चली बातचीत बेनतीजा रही। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों के बीच होर्मुज स्ट्रेट खोलने और न्यूक्लियर प्रोग्राम पर पेंच फंसा है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ऐलान किया है कि अमेरिकी नेवी अब होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की नाकाबंदी करेगी। जो जहाज ईरान को गैरकानूनी टोल देंगे, उन्हें सुरक्षित रास्ता नहीं दिया जाएगा। लेकिन इससे पहले ईरान के उप संसद अध्यक्ष हाजी बाबाई बोल चुके हैं कि होर्मुज स्ट्रेट ईरान के नियंत्रण में है। यहां से गुजरने वाले हर जहाज को ईरानी करेंसी रियाल में टोल देना ही होगा।

ट्रम्प ने कहा है कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने का वादा किया था, लेकिन उसे पूरा नहीं किया। इससे दुनिया के कई देशों और लोगों में डर और परेशानी बढ़ी है। ईरान ने समुद्र में बारूदी सुरंगें होने की बात कही है, जिससे जहाजों के लिए खतरा पैदा हो गया है। ट्रम्प ने कहा कि इससे ईरान की इमेज को नुकसान पहुंचा है और अब उसे जल्दी से यह रास्ता खोलना चाहिए।

इससे पहले अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपनी टीम के साथ अमेरिका के लिए रवाना हो गए लेकिन वापसी से पहले उन्होंने इस्लामाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा कि अमेरिका बिना डील के लौट रहा है। यह अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी समझौते के लिए जरूरी है कि ईरान ये वादा करे कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। अमेरिका की शर्तें स्पष्ट थीं, लेकिन ईरान ने उन्हें नहीं माना। हालांकि वेंस ने यह भी जोड़ा कि आने वाले वक्त में समझौते की संभावना पूरी तरह से अभी खत्म नहीं हुई है। उन्होंने कहा, “हम ईरान को फाइनल ऑफर देकर जा रहे हैं। अब देखना है कि ईरान इसे मानता है या नहीं।”

दूसरा तरफ ईरान ने कहा कि अमेरिका की शर्तें जरूरत से ज्यादा सख्त थीं। इस वजह से समझौते का रास्ता नहीं निकल पाया। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने इस्लामाबाद में शांति वार्ता खत्म होने के बाद अपना पहला आधिकारिक बयान जारी किया जिसमें उन्होंने कहा कि इस दौर की बातचीत में दूसरा पक्ष (अमेरिका) ईरानी प्रतिनिधियों का भरोसा जीतने में नाकाम रहा। गालिबाफ ने कहा कि बातचीत शुरू होने से पहले ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि ईरान की ओर से नीयत और इच्छा दोनों मौजूद हैं, लेकिन पिछले दो युद्धों के अनुभवों की वजह से उन्हें दूसरे पक्ष पर भरोसा नहीं है। गालिबाफ ने इस बातचीत को मुमकिन बनाने के लिए पाकिस्तान का धन्यवाद किया।

इस बीच ईरान ने एक अच्छी खबर यह दी है कि अमेरिकी-इजरायली हमलों में हुए नुकसान के बाद वह एक-दो महीने के भीतर अपनी ज्यादातर रिफाइनिंग और ऑयल फैसिलिटी को 70–80% तक फिर से चालू कर देगा। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि ऊर्जा ढांचे पर हुए हमलों के बाद मरम्मत और रिकवरी का काम तेजी से चल रहा है। ईरान के उप तेल मंत्री मोहम्मद सादेक अजीमीफर ने ईरानी न्यूज एजेंसी एसएनएन से कहा कि मरम्मत का काम शुरू हो चुका है और लावन रिफाइनरी का एक हिस्सा करीब 10 दिनों में फिर से चालू हो सकता है।

सीजफायर वार्ता में पाकिस्तान की तरफ से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख आसिम मुनीर, विदेश मंत्री इशाक डार और एनएसए आसिम मलिक, अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ, वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर और सैन्य अधिकारी ब्रैड कूपर और ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और उप विदेश मंत्री मजीद तख्त रवांची शामिल हुए थे।

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सत्ता विमर्श डेस्क
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