Pradhan Mantri Bhartiya Janaushadhi Pariyojana: देश में स्वास्थ्य सेवाओं को सस्ता और सुलभ बनाने की दिशा में केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) एक अहम भूमिका निभा रही है। इस योजना के तहत देशभर में खोले गए जन औषधि केंद्रों के जरिए लोगों को कम कीमत पर गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे आम जनता के इलाज का खर्च काफी हद तक कम हुआ है।
दवाओं के खर्च को कम करने की पहल
भारत में स्वास्थ्य खर्च का बड़ा हिस्सा दवाइयों पर होता है। ऐसे में सरकार ने इस योजना के माध्यम से ब्रांडेड दवाओं के मुकाबले सस्ती जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराकर लोगों को राहत देने का प्रयास किया है। इन दवाओं की कीमतें आमतौर पर बाजार में मिलने वाली दवाओं से 50 से 80 प्रतिशत तक कम होती हैं।
देशभर में तेजी से बढ़ रहा नेटवर्क
योजना के तहत वर्तमान में देशभर में 18,000 से अधिक जन औषधि केंद्र संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों पर 2,100 से अधिक दवाएं और 300 से ज्यादा सर्जिकल एवं मेडिकल उत्पाद उपलब्ध हैं। हर दिन करीब 10 से 12 लाख लोग इन केंद्रों से दवाएं खरीद रहे हैं, जिससे यह योजना ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों तक भी अपनी पहुंच बना चुकी है।
हजारों करोड़ की बचत
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2025 तक लगभग 7,700 करोड़ रुपये की दवाओं की बिक्री हो चुकी है, जिससे लोगों को करीब 38,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है। यह योजना विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रही है।
गुणवत्ता पर विशेष ध्यान
योजना के तहत दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त मानकों का पालन किया जा रहा है। दवाएं केवल WHO-GMP प्रमाणित कंपनियों से खरीदी जाती हैं और प्रत्येक बैच को NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में जांच के बाद ही वितरित किया जाता है। इससे लोगों को सुरक्षित और प्रभावी दवाएं मिलना सुनिश्चित होता है।
जनऔषधि सप्ताह के जरिए जागरूकता
हाल ही में आयोजित जन औषधि सप्ताह 2026 के दौरान देशभर में जागरूकता अभियान चलाया गया। 1 से 7 मार्च तक आयोजित इस कार्यक्रम के तहत 250 से अधिक स्थानों पर स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए गए। इस पहल का उद्देश्य लोगों को सस्ती और भरोसेमंद जेनेरिक दवाओं के प्रति जागरूक करना था।
महिलाओं के लिए विशेष पहल
महिलाओं की स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजना के तहत “जन औषधि सुविधा सैनिटरी नैपकिन” उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ये नैपकिन मात्र 1 रुपये प्रति पैड की दर से मिलते हैं। जनवरी 2026 तक 100 करोड़ से अधिक पैड की बिक्री हो चुकी है, जो इस पहल की सफलता को दर्शाता है।
डिजिटल सुविधा से बढ़ी पहुंच
लोगों की सुविधा के लिए “जन औषधि सुगम” मोबाइल एप भी लॉन्च किया गया है। इस ऐप के माध्यम से उपयोगकर्ता नजदीकी केंद्र की जानकारी, दवाओं की उपलब्धता और कीमत की तुलना आसानी से कर सकते हैं।
रोजगार के अवसर भी बढ़े
सरकार ने मार्च 2027 तक 25,000 जन औषधि केंद्र खोलने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए फ्रेंचाइजी मॉडल अपनाया गया है, जिससे निजी उद्यमियों, संस्थाओं और संगठनों को भी इसमें भाग लेने का अवसर मिल रहा है। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना देश में सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस योजना के जरिए न केवल लोगों का आर्थिक बोझ कम हो रहा है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण दवाओं तक उनकी पहुंच भी आसान हो रही है। आने वाले समय में इसके और विस्तार के साथ यह योजना स्वास्थ्य क्षेत्र में और बड़ा बदलाव ला सकती है।




