500 संदिग्ध केस, 130 मौत: इबोला के नए रूप से दहला अफ्रीका

अफ्रीकी देश कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) एक बार फिर इबोला महामारी की चपेट में है, लेकिन इस बार खतरा पहले से कहीं अधिक गंभीर माना जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसुस ने चेतावनी दी है कि जिस तेजी और व्यापक स्तर पर संक्रमण फैल रहा है, उसने वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। शुरुआती आंकड़ों में जहां लगभग 200 संदिग्ध मामले और 65 मौतें दर्ज की गई थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 500 से अधिक संदिग्ध मामलों और 130 संभावित मौतों तक पहुंच चुकी है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि मौजूदा प्रकोप इबोला के “बुंडीबुग्यो” स्ट्रेन से जुड़ा है। यह वायरस का एक दुर्लभ प्रकार है, जिसके लिए अभी तक कोई स्वीकृत वैक्सीन या प्रभावी दवा उपलब्ध नहीं है। कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया ने यह समझा था कि वैक्सीन आधुनिक चिकित्सा की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है, लेकिन इबोला के इस नए रूप ने स्वास्थ्य वैज्ञानिकों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञ उन वैक्सीन और दवाओं के इस्तेमाल पर विचार कर रहे हैं जो अभी परीक्षण और विकास के चरण में हैं।

इबोला वायरस कोविड-19 की तरह हवा से नहीं फैलता। यह संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है। यही कारण है कि डॉक्टरों, नर्सों और संक्रमित मरीजों के परिजनों के लिए यह बीमारी सबसे अधिक खतरनाक साबित होती है। संक्रमण रोकने के लिए अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों पर क्लोरीन का छिड़काव किया जा रहा है, लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग हो रही है और संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने के लिए विशेष टीमें काम कर रही हैं।

हालांकि बीमारी केवल एक मेडिकल संकट नहीं है। DRC के पूर्वी हिस्से लंबे समय से हिंसा, राजनीतिक अस्थिरता और सशस्त्र संघर्ष से प्रभावित रहे हैं। 2018 से 2020 के बीच इसी क्षेत्र में इबोला का बड़ा प्रकोप हुआ था, जिसमें हजारों लोग प्रभावित हुए थे। उस दौरान अफवाहों, सरकारी संस्थाओं पर अविश्वास और जातीय तनाव ने महामारी नियंत्रण को बेहद कठिन बना दिया था। कई लोगों ने इबोला को साजिश बताया, जबकि स्वास्थ्यकर्मियों और उपचार केंद्रों पर हिंसक हमले भी हुए।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार भी वही सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियां महामारी को और गंभीर बना सकती हैं। इसके अलावा आशंका है कि वायरस कई हफ्तों तक बिना पहचान के फैलता रहा, जिससे संक्रमण का दायरा तेजी से बढ़ गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए WHO ने इस बार बेहद तेजी से “पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न” घोषित किया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संसाधन और सहायता तुरंत जुटाई जा सके।

फिर भी एक सकारात्मक पहलू यह है कि DRC अब इबोला से लड़ने का अनुभव हासिल कर चुका है। पिछले कई प्रकोपों ने वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था और आपदा प्रतिक्रिया तंत्र को पहले से अधिक मजबूत बनाया है। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि केवल दवाएं और चिकित्सा सुविधाएं ही पर्याप्त नहीं होंगी। महामारी को रोकने के लिए जनता का भरोसा, राजनीतिक स्थिरता, सुरक्षा और सही जानकारी का प्रसार उतना ही जरूरी है। यही तय करेगा कि दुनिया इस नए इबोला संकट को समय रहते नियंत्रित कर पाएगी या नहीं।

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सत्ता विमर्श डेस्क
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