नई दिल्ली/लखनऊ। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली और पुराने गढ़ अमेठी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर अब तक का सबसे तीखा और सीधा हमला बोला है। राहुल गांधी ने न सिर्फ शीर्ष नेतृत्व को सीधे शब्दों में ‘गद्दार’ करार दिया, बल्कि देश में एक बड़े ‘आर्थिक तूफान’ की चेतावनी भी दे डाली।
अमेठी और रायबरेली में कार्यकर्ता सम्मेलनों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी के तेवर बेहद आक्रामक नजर आए। उन्होंने साफ कहा कि वह भाजपा और आरएसएस की धमकियों के आगे झुकने वाले नहीं हैं और देश के युवाओं, किसानों और संविधान की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
रायबरेली में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि भारत एक बड़े आर्थिक संकट की कड़वी हकीकत की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “अब देश में एक बड़ा आर्थिक तूफान आ रहा है। नरेंद्र मोदी आपको बचा नहीं पाएंगे। याद रखना, जैसे कोविड और नोटबंदी के समय वो रोए थे और कहा था कि ‘मुझे चौराहे पर फांसी पर लटका देना’, वैसे ही वह एक बार फिर टीवी पर आएंगे। हाथ जोड़ेंगे, रोएंगे और कहेंगे कि इसमें मेरी कोई गलती नहीं है।” राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां आम जनता की जेब काटने वाली हैं, जबकि इसका सीधा फायदा देश के चुनिंदा उद्योगपतियों को मिल रहा है।
अमेठी के कार्यकर्ता सम्मेलन में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया विदेश दौरों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो रील्स को आड़े हाथों लिया। प्रधानमंत्री मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच की चर्चाओं और रील्स का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा कि देश की गंभीर समस्याओं को छोड़कर प्रधानमंत्री ‘मजाक’ कर रहे हैं।
राहुल गांधी ने तंज कसते हुए कहा: “इटली की पीएम मेलोनी को नरेंद्र मोदी टॉफी खिला रहे हैं। उनकी सोशल मीडिया पर रील बनाई जा रही हैं। ये भाजपा वाले मेरा मजाक उड़ाते हैं। लेकिन सच तो यह है कि जो आर्थिक दीवार और सुरक्षा इन्हें देश के लिए खड़ी करनी थी, वो इन्होंने नहीं की। अब ये मेलोनी के साथ वीडियो बना रहे हैं। देश में तमाशा और मजाक चल रहा है।”
राहुल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर भी इसी तंज को दोहराते हुए लिखा कि किसान, युवा, महिलाएं, मजदूर और छोटे व्यापारी सब त्रस्त हैं और रो रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री हंसकर रील बना रहे हैं और भाजपा कार्यकर्ता तालियां बजा रहे हैं।
राहुल गांधी ने देश के संसाधनों को बेचने का आरोप लगाते हुए उद्योगपति मुकेश अंबानी, गौतम अडाणी और पीएम मोदी के रिश्तों पर सीधा हमला बोला। उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि एक तरफ आम आदमी महंगाई से मर रहा है, दूसरी तरफ देश का पैसा बाहर भेजा जा रहा है।
राहुल ने कहा, “नरेंद्र मोदी देश की जनता से कहते हैं कि विदेश मत जाएं, सोना न खरीदें, इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदें और वो खुद हजारों करोड़ के आलीशान जहाजों में विदेश घूमते हैं।” राहुल ने दावा किया कि आज जब देश में पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे हैं, तब अंबानी रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीद रहे हैं, उसे हिन्दुस्तान के बाहर रिफाइन करके विदेशों में बेच रहे हैं और उसी मुनाफे के पैसे से नरेंद्र मोदी को राजनीतिक फंडिंग की जा रही है।
आरएसएस की ओर से उन पर की जाने वाली कानूनी और राजनीतिक कार्रवाईयों को लेकर खुली चुनौती देते हुए राहुल ने कहा, “सुन लो आरएसएस वालों! आप लोगों ने कहा कि माफी मांगो। मैं साफ कह रहा हूं कि मैं माफी नहीं मांगूंगा। मैं फिर खुलकर कह रहा हूं कि मोदी और अमित शाह गद्दार हैं। इन लोगों ने देश और संविधान को बदलकर रख दिया है।”
राहुल ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि जब भी आरएसएस के कार्यकर्ता उनके सामने आएं, तो उनसे खुलकर कहें कि आपका प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और संगठन गद्दार है, क्योंकि आपने हिन्दुस्तान को चंद पूंजीपतियों के हाथों बेचने का काम किया है।
राहुल गांधी ने भाजपा और आरएसएस पर देश की संवैधानिक संस्थाओं को नष्ट करने का बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश की न्यायपालिका, शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के अवसर खतरे में हैं। देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज में आरएसएस की विचारधारा के वाइस चांसलर बैठा दिए गए हैं। इन कुलपतियों को न इतिहास आता है और न ही भूगोल।
राहुल ने कहा कि जनता की जेब से पैसा निकालकर पब्लिक सेक्टर को प्राइवेट कर दिया गया है। संविधान कहता है कि समाज के वंचितों को आरक्षण मिलना चाहिए, न्यायपालिका में निष्पक्ष न्याय होना चाहिए, लेकिन मोदी-शाह और आरएसएस के त्रिकोण ने इसे खत्म कर दिया है। राहुल ने भावुक अपील करते हुए कहा, “आपके मुंह के सामने आरएसएस के लोग संविधान को फाड़कर फेंकते हैं तो आप चुप हो जाते हैं? यह संविधान आपका खून है, इसकी रक्षा करना आपकी और हम सबकी जिम्मेदारी है।”
अपने संबोधन के अंत में राहुल गांधी ने देश के युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने हाल ही में हुए नीट (NEET) पेपर लीक मामले का जिक्र करते हुए कहा कि आज देश का युवा गहरे डिप्रेशन (अवसाद) में है। एक तरफ महंगाई और बेरोजगारी लगातार बढ़ती जा रही है, घरेलू गैस और पेट्रोल की कीमतें आम आदमी की पहुंच से बाहर हो चुकी हैं और दूसरी तरफ देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं। सरकार युवाओं को रोजगार देने और उनके भविष्य को सुरक्षित रखने में पूरी तरह विफल साबित हुई है।
राहुल गांधी के इस रायबरेली और अमेठी दौरे ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक विपक्ष का रुख बेहद आक्रामक रहने वाला है। पीएम मोदी और इटली की पीएम मेलोनी की रील्स पर किया गया हमला सीधे तौर पर युवाओं और सोशल मीडिया यूजर्स को यह संदेश देने की कोशिश है कि सरकार वास्तविक मुद्दों (जैसे महंगाई, बेरोजगारी, और नीट घोटाला) से ध्यान भटका रही है। वहीं, ‘गद्दार’ और ‘माफी नहीं मांगूंगा’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर राहुल गांधी ने भाजपा के राष्ट्रवाद के नैरेटिव के खिलाफ एक नया और बेहद आक्रामक मोर्चा खोल दिया है।
राहुल गांधी के इन बयानों को कांग्रेस की नई राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। पिछले लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस लगातार आर्थिक असमानता, बेरोजगारी, महंगाई और संविधान बचाने जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाने की कोशिश कर रही है। रायबरेली और अमेठी, गांधी परिवार के पारंपरिक राजनीतिक गढ़ रहे हैं और यहां से दिए गए संदेश का प्रतीकात्मक महत्व भी काफी बड़ा माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी अब भाजपा के खिलाफ अधिक आक्रामक और वैचारिक लड़ाई लड़ते दिखाई दे रहे हैं। पहले जहां कांग्रेस का हमला मुख्य रूप से आर्थिक नीतियों तक सीमित रहता था, वहीं अब पार्टी सीधे RSS की विचारधारा और भाजपा के संगठनात्मक ढांचे को चुनौती दे रही है। इससे आने वाले समय में राजनीतिक ध्रुवीकरण और तेज होने की संभावना है।
कांग्रेस इन भाषणों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह खुद को संविधान, सामाजिक न्याय और आर्थिक असमानता के खिलाफ संघर्ष की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में पेश करना चाहती है। रायबरेली और अमेठी की इन सभाओं ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में भारतीय राजनीति का केंद्र केवल चुनावी गणित नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, संविधान, बेरोजगारी और वैचारिक संघर्ष भी बनने वाला है। राहुल गांधी ने अपने भाषणों के जरिए भाजपा को सीधे चुनौती देते हुए यह संकेत दिया है कि कांग्रेस अब रक्षात्मक नहीं बल्कि आक्रामक राजनीति की राह पर आगे बढ़ेगी।




