नई दिल्ली/बीजिंग। मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते युद्ध और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच चीन और रूस ने एक बार फिर पश्चिमी देशों के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ साझा मोर्चा बनाने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। बीजिंग में बुधवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) की मुलाकात सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह उभरती वैश्विक शक्ति-संतुलन की राजनीति के लिए भी बड़ा संदेश बनकर सामने आई।
बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को लेकर गंभीर चेतावनी देते हुए कहा कि दुनिया एक बार फिर से जंगलराज की ओर बढ़ रही है। उनका इशारा उस अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य की तरफ था, जहां सैन्य शक्ति और एकतरफा कार्रवाई वैश्विक नियमों और संस्थाओं पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है। जिनपिंग ने कहा कि यदि युद्ध और भू-राजनीतिक टकराव नहीं थमे तो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था कमजोर हो सकती है और वैश्विक स्थिरता पर इसका दूरगामी असर पड़ेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका, यूरोप, रूस, चीन और मध्य पूर्व के देशों के बीच रणनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है।
बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में दोनों नेताओं का औपचारिक स्वागत हुआ, जहां रेड कार्पेट समारोह और सैन्य सम्मान के बीच रूस-चीन साझेदारी का शक्ति प्रदर्शन भी दिखाई दिया। इस दौरान दोनों नेताओं ने “दबदबे की राजनीति” समाप्त करने और अधिक “न्यायपूर्ण एवं संतुलित वैश्विक व्यवस्था” बनाने की जरूरत पर जोर दिया। विश्लेषकों की मानें तो यह बयान सीधे तौर पर अमेरिका-केन्द्रित वैश्विक व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। रूस और चीन लंबे समय से बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था (Multipolar World Order) की वकालत करते रहे हैं, जिसमें पश्चिमी देशों का वर्चस्व सीमित हो।
बैठक में मिडिल ईस्ट संकट, ऊर्जा सुरक्षा, BRICS विस्तार, यूक्रेन युद्ध और वैश्विक व्यापार जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। पुतिन ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में रूस और चीन के संबंध अभूतपूर्व रूप से मजबूत हुए हैं और दोनों देश रणनीतिक परियोजनाओं पर लगातार साथ काम कर रहे हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस और चीन के आर्थिक रिश्तों में तेजी आई है। चीन रूस से बड़े पैमाने पर तेल, गैस और कोयले की खरीद कर रहा है, जबकि रूस के बाजार में चीनी कारों, इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी उत्पादों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापार 228 अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुका है।
इस मुलाकात में ‘Power of Siberia-2’ गैस पाइपलाइन परियोजना भी चर्चा के केंद्र में रही। यह परियोजना रूस के यामाल क्षेत्र से मंगोलिया के रास्ते चीन तक प्राकृतिक गैस पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसे दोनों देशों के बीच ऊर्जा साझेदारी की रीढ़ माना जा रहा है। हालांकि, पश्चिमी देशों का आरोप है कि चीन आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर रूस को सहारा देकर वैश्विक शक्ति-संतुलन को बदलने की कोशिश कर रहा है। वहीं बीजिंग और मॉस्को इसे “समानता आधारित सहयोग” और “नए वैश्विक संतुलन” की दिशा में उठाया गया कदम बताते हैं।




