Ram Nath Kovind : अच्छा रैंक नहीं मिला तो ठुकरा दी थी सिविल सर्विस की नौकरी

प्रवीण कुमार

भारतीय राजनीतिज्ञ रामनाथ कोविन्द 20 जुलाई 2017 को भारत के 14वें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए और 25 जुलाई 2017 को संसद के केंद्रीय कक्ष में सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहर ने उन्हें पद की शपथ दिलायी। इससे पहले कोविन्द बिहार के राज्यपाल और राज्यसभा के सांसद भी रह चुके हैं।

रामनाथ कोविन्द की पहचान एक दलित चेहरे के रूप में रही है। छात्र जीवन में कोविन्द ने अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं के लिए काम किया। 12 साल की सांसदी में कोविन्द ने शिक्षा से जुड़े कई मुद्दों को उठाया। ऐसा कहा जाता है कि वकील रहने के दौरान कोविन्द ने गरीब दलितों के लिए मुफ्त में कानूनी लड़ाई लड़ी।

रामनाथ कोविन्द का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिला (वर्तमान में कानपुर देहात जिला) की तहसील डेरापुर के एक छोटे से गांव परौंख में हुआ था। कोविन्द का सम्बन्ध कोरी (कोली) जाति से है जो उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति के अंतर्गत आती है।

रामनाथ कोविन्द के पिता का नाम मैकूलाल और माता का नाम फूलवती था। कोविन्द का विवाह 30 मई 1974 को सविता कोविंद से हुआ। कोविन्द के परिवार में पत्नी के अलावा बेटा प्रशांत, बहू गौरी और बेटी स्वाति हैं। तीन भाईयों में सबसे छोटे रामनाथ कोविन्द की प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा संदलपुर विकासखंड ग्राम खानपुर में हुई।

उन्होंने डीएबी कॉलेज से बीकॉम और डीएबी लॉ कॉलेज से कानून की पढाई की। इसके बाद कोविन्द ने तीसरे प्रयास में प्रशासनिक सेवा की परीक्षा पास तो की लेकिन अच्छा रैंक नहीं नहीं मिलने की वजह से इसकी नौकरी ठुकरा दी और वकालत में जुट गए।

वकालत की डिग्री लेने के बाद उन्होने दिल्ली हाईकोर्ट में वकालत शुरू की। 1971 में बार काउंसिल ऑफ दिल्ली में पंजीकरण कराया। 1977 से 1979 तक दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र सरकार के वकील रहे। 1978 में वे प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के निजी सहायक भी रहे।

16 साल तक सुप्रीम कोर्ट में वकालत की। 1980 से 1983 तक केंद्र सरकार की स्टैंडिंग काउंसिल में रहे। 1991 में कोविन्द भाजपा में शामिल हुए। 1998 से 2002 तक भाजपा अनुसूचित मोर्चा और अखिल भारतीय कोली समाज के अध्यक्ष रहे। इसके साथ कोविन्द भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रहे।

वर्ष 1994 में उत्तर प्रदेश से राज्य सभा के लिए निर्वाचित हुए। वर्ष 2000 में पुनः उत्तर प्रदेश से राज्य सभा के लिए निर्वाचित हुए। इस प्रकार कोविन्द लगातार 12 वर्ष तक राज्य सभा के सदस्य रहे।  

1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने पर वह प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के निजी सचिव बने। इसके बाद भाजपा के संपर्क में आए। कोविन्द को 1991 में उत्तर प्रदेश की घाटमपुर लोकसभा सीट से भाजपा ने चुनाव मैदान में उतारा लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

इसके बाद कोविन्द की मुलाकात कल्याण सिंह से हुई। कल्याण सिंह ने राज्यसभा सदस्य के रूप में उन्हें सांसद बनाने में मदद की। सांसद निधि से कोविन्द ने उत्तर प्रदेश और उत्तरखंड में कई स्कूलों का निर्माण करवाया।

सांसद रहने के दौरान कोविन्द ने थाईलैंड, नेपाल, पाकिस्तान, सिंगापुर, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, अमेरिका समेत कई देशों का दौरा किया। 8 अगस्त 2015 को रामनाथ कोविन्द को बिहार राज्य का 36वां राज्यपाल बनाया गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द को तरोई की सब्जी और अरहर की दाल बेहद पसंद है।

कोविन्द जब भी कानपुर जाते हैं तो सर्किट हाउस में विशेष रूप से तरोई की सब्जी और अरहर की दाल उनके खाने की थाली में परोसी जाती है। नाश्ते में अदरक और इलायची की चाय के साथ पपीता, सेब और ब्रेड-बटर उन्हें अच्छा लगता है।

खाने के बाद कोविन्द तरबूज खाना पसंद करते हैं। बेहद सामान्य पृष्टभूमि वाले रामनाथ कोविन्द सादा जीवन उच्च विचार में विश्वास करते हैं। उन्हें सादा भोजन पसंद है और मिठाई से परहेज करते हैं।

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सत्ता विमर्श डेस्क
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