US Election Results 2024 : डोनाल्ड ट्रम्प ने रचा इतिहास! तब भी और अब भी

नई दिल्ली। अमेरिका के चुनावी इतिहास में डोनाल्ड ट्रम्प ऐसे पहले राजनेता हैं जिन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में दो बार महिला उम्मीदवार (पहले हिलेरी क्लिंटन और फिर कमला हैरिस) को हराया है।

दिलचस्प तथ्य यह भी है कि 2016 और 2024 के अलावा कभी किसी चुनाव भी कोई महिला राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ी थी। दोनों ही बार ट्रम्प ने महिला उम्मीदवारों का मुकाबला किया और जीत दर्ज कर इतिहास भी रचा।

ट्रम्प 2016 में पहली बार राष्ट्रपति बने थे और 2020 में जो बाइडेन से हार गए थे। ताजा नतीजों में जीत के बाद ट्रम्प दूसरे विश्व युद्ध के बाद पहले ऐसे राजनेता हैं जो चार साल के अंतराल के बाद दोबारा राष्ट्रपति बनेंगे।

अमेरिकी चुनाव के इतिहास में डोनाल्ड ट्रम्प की 2024 में राजनीतिक वापसी को सबसे प्रभावशाली माना जाएगा क्योंकि वह ऐसे पहले राजनेता हैं जिन्होंने कई आपराधिक आरोपों, दो राष्ट्रपति महाभियोग और एक आपराधिक दोषसिद्धि का सामना करते हुए जीत दर्ज की है।

बहरहाल, अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार और मौजूदा उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को हराकर बड़ी जीत दर्ज की है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रम्प को शानदार जीत पर बधाई दी है। जवाब में ट्रम्प ने कहा कि वे भारत को सच्चा दोस्त मानते हैं। उन्होंने दुनिया की शांति के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने की बात भी कही।

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के सभी नतीजे सामने आ गए हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को अमेरिकी राज्य एरिजोना में भी जीत हासिल कर ली। इसके साथ ही उन्होंने सभी सात स्विंग स्टेट्स जीत लिए हैं। एरिजोना की 11 सीटें (इलेक्टोरल वोट) भी उनके खाते में आ गई हैं।

राष्ट्रपति चुनाव में ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी ने 50 राज्यों की 538 में से 312 सीटें जीती हैं। वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी की कमला हैरिस ​​कड़ी टक्कर देने के बावजूद 226 सीटें ही जीत पाईं। बहुमत के लिए 270 का आंकड़ा जरूरी होता है।

हार से निराश कमला हैरिस ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा, ”इस चुनाव का नतीजा वह नहीं है जिसकी उन्हें उम्मीद थी या जिसके लिए उन्होंने यह लड़ाई लड़ी थी। हम कभी हार नहीं मानेंगे और लड़ते रहेंगे। निराश मत होइए। यह समय हाथ खड़े करने का नहीं है, मजबूती से खड़े होने का है। आजादी और न्याय के लिए एकजुट होने का है।”

अमेरिका में राष्ट्रपति पद के साथ संसद के दोनों सदन सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के भी चुनाव हुए हैं। सीनेट ऊपरी सदन है। इसकी 100 सीटों में हर राज्य के लिए 2 सीटों की हिस्सेदारी है। सीनेट की एक तिहाई सीटों पर हर 2 साल में चुनाव होते हैं। इस बार 34 सीटों पर चुनाव हुए।

ताजा नतीजों के साथ रिपब्लिकन पार्टी ने 54 सीटें हासिल कर ली हैं जो बहुमत से अधिक हैं। इससे पहले उसके पास 49 सीटें थीं जो बहुमत से कम थीं। दरअसल, अमेरिका में सीनेट ज्यादा ताकतवर है, क्योंकि इसे महाभियोग और विदेशी समझौतों जैसे अहम मसलों को मंजूर या नामंजूर करने का अधिकार होता है। इसके सदस्य सीनेटर कहलाते हैं, जो 6 साल के लिए चुने जाते हैं।

निचला सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में भी ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी बहुमत के करीब पहुंचती दिख रही है। इसकी 435 सीटों के लिए हर 2 साल में चुनाव होते हैं। इन्हें मिड टर्म इलेक्शन कहा जाता है। हाउस में बहुमत के लिए 218 सीटें जरूरी होती हैं। रिपब्लिकन पार्टी 213 और डेमोक्रेटिक पार्टी 202 सीटें हासिल कर चुकी है। बाकी सीटों के नतीजे आने बाकी हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन संभवत: 13 नवंबर (बुधवार) को अगले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से व्हाइट हाउस में मुलाकात करेंगे। दोनों के बीच ये मुलाकात भारतीय समयानुसार रात 9:30 बजे होगी।

अमेरिका में ये परंपरा रही है कि वर्तमान राष्ट्रपति चुनाव के बाद अगले राष्ट्रपति के साथ व्हाइट हाउस में औपचारिक मुलाकात करते हैं। इस मुलाकात को सत्ता सौंपने की प्रकिया की शुरुआत के तौर पर देखा जाता है। हालांकि जब डोनाल्ड ट्रम्प 2020 में जो बाइडेन के हाथों राष्ट्रपति चुनाव हार गए थे तो उन्होंने बाइडेन को मुलाकात के लिए आमंत्रित नहीं किया था।

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प्रवीण कुमार
मैं कौन हूं, क्या हूं, क्यों हूं, यह सब खुद मुझे भी नहीं पता क्यों कि खुद के बारे में बताना, जताना या उकेरना सबसे मुश्किल काम होता है। हां! बुद्ध, गांधी, विवेकानंद और गीता के दर्शन से मैंने अपने जीवन को संवारने की कोशिश जरूर की है। बिहार के बेगूसराय जिले का रहने वाला हूं। जाने-अनजाने में पत्रकारिता के आंगन में ढाई दशक से अधिक वक्त से कूद-फांद कर रहा हूं। शुरूआती दौर में जी भरकर देश के तमाम राष्ट्रीय और क्षेत्रीय अखबारों और पत्रिकाओं में वैचारिक लेखन किया। सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विषयों पर लिखने में अपनी रूचि रहती है। फिलहाल भारत सरकार से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर लेखन कर रहा हूं। डिजिटल और सोशल मीडिया कंसल्टेंट के तौर भी हाथ साफ करता रहता हूं। 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान फेक न्यूज़ की बयार को गहराई से जांचा परखा था। उससे पहले नोएडा स्थित ज़ी न्यूज़ में हिन्दी वेबसाइट की शुरूआत कर काफी लंबा वक्त गुजारा। इससे भी पीछे का पूछेंगे तो करीब डेढ़ दशक तक दैनिक हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, अमर उजाला, दैनिक भास्कर समेत कई राष्ट्रीय व क्षेत्रीय अखबारों के संपादकीय विभाग में अलग-अलग भूमिकाओं को निभाते हुए एक पत्रकार के तौर पर अपनी पहचान बनाने की कोशिश की, एक बेहतर इंसान भी बनने की कोशिश की, पर कितना बन पाया ये सब ''ऊपर वाले पर'' छोड़ता हूं...

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