जम्मू कश्मीर विधानसभा में आखिर क्यों मचा हुआ है इतना हंगामा?

श्रीनगर/नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने राज्य के उस स्पेशल स्टेटस आर्टिकल 370 को फिर से बहाल करने का प्रस्ताव बुधवार 6 नवंबर 2024 को पारित कर दिया जिसे पांच साल पहले सोमवार 5 अगस्त, 2019 को केंद्र की तत्कालीन मोदी सरकार ने निरस्त कर दिया था। प्रदेश की विपक्षी पार्टी भाजपा ने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर के लोगों को गुमराह कर रही है। भाजपा का कहना है कि कोई भी विधानसभा आर्टिकल 370 और 35ए को वापस नहीं ला सकती।

दरअसल, जम्मू कश्मीर की क्षेत्रीय पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने विधानसभा चुनाव के दौरान अपने मेनिफेस्टो में वादा किया था कि केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर के जिस स्पेशल स्टेटस को खत्म कर दिया था, सरकार बनने पर उसकी बहाली के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। लिहाजा विधानसभा में प्रस्ताव पास होने के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि विधानसभा ने अपना काम कर दिया है।

6 नवंबर को सदन की कार्रवाई शुरू होते ही जम्मू-कश्मीर के डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी ने विशेष दर्जे को बहाल करने के लिए प्रस्ताव पेश किया जिसे केंद्र ने 5 अगस्त, 2019 को रद्द कर दिया था। इसमें कहा गया, ‘राज्य का स्पेशल स्टेटस और संवैधानिक गारंटियां महत्वपूर्ण हैं। यह जम्मू-कश्मीर की पहचान, कल्चर और लोगों के अधिकारों को सुरक्षा देता है। विधानसभा इसे एकतरफा हटाने पर चिंता व्यक्त करती है।

प्रस्ताव में कहा गया, भारत सरकार राज्य के स्पेशल स्टेटस को लेकर यहां के प्रतिनिधियों से बात करे। इसकी संवैधानिक बहाली पर काम किया जाए। विधानसभा इस बात पर जोर देती है कि यह बहाली राष्ट्रीय एकता और जम्मू-कश्मीर के लोगों की इच्छाओं, दोनों को ध्यान में रख कर की जाए।’ निर्दलीय विधायक शेख खुर्शीद और शब्बीर कुल्ले, पीसी प्रमुख सज्जाद लोन और पीडीपी विधायकों ने इसका समर्थन किया।

सदन में मुख्य विपक्षी बीजेपी के नेता सुनील शर्मा समेत भाजपा के सभी विधायकों ने प्रस्ताव का विरोध किया। शर्मा ने कहा कि उनके पास जानकारी है कि स्पीकर ने मंगलवार (5 नवंबर) को मंत्रियों की बैठक बुलाई थी और खुद ही प्रस्ताव तैयार किया। वे इस दौरान स्पीकर हाय-हाय और पाकिस्तानी एजेंडा नहीं चलेगा जैसे नारे लगाते रहे।

शर्मा ने यह भी पूछा कि जब उपराज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा होनी थी तो प्रस्ताव कैसे लाया गया? उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव उन्हें मंजूर नहीं है। इसके बाद उन्होंने इसकी कॉपी फाड़कर वेल में फेंक दी। हंगामे के बीच विधानसभा स्पीकर अब्दुर रहीम राथर ने प्रस्ताव पर वोटिंग कराई, जिसके बाद प्रस्ताव बहुमत से पास कर दिया गया। भाजपा विधायकों के आरोपों को लेकर स्पीकर अब्दुल रहीम राठेर ने कहा, “अगर आपको मुझ पर भरोसा नहीं है, तो अविश्वास प्रस्ताव लेकर आएं।”

अगले दिन यानी 7 नवंबर गुरुवार को जब विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो विधायकों के बीच जमकर हाथापाई होने लगी। सत्ता पक्ष और विपक्षी विधायकों ने एक-दूसरे की कॉलर पकड़ी और धक्कामुक्की होने लगी। मार्शलों ने आर एस पठानिया सहित कई भाजपा विधायकों को सदन से बाहर निकाला। 3 विधायक घायल भी हुए।

हालांकि इसके बाद भी भाजपा विधायक “विशेष दर्जा प्रस्ताव वापस लो” के नारे लगाते रहे। इस पर स्पीकर ने कहा कि, “यह विधानसभा है, मछली बाजार नहीं है।” सदन में भारी हंगामे के चलते पहले विधानसभा की कार्यवाही 20 मिनट, फिर शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

सत्र के चौथे दिन यानी 8 नवंबर शुक्रवार एक बार फिर से सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो फिर से जमकर हंगामा हुआ। अवामी इत्तेहाद पार्टी के विधायक खुर्शीद अहमद शेख ने फिर 370 की बहाली से जुड़ा पोस्टर लहराने की कोशिश की। लेकिन उससे पहले विपक्षी नेताओं ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया।

बस फिर क्या था। विधायकों के बीच जबरदस्त धक्का-मुक्की होने लगी। इस बीच एक विधायक टेबल पर चढ़ गया। उधर, मार्शल खुर्शीद अहमद को घसीटते हुए ले गए। इस दौरान खुर्शीद जमीन पर गिर गए। उन्हें फिर बाहर निकाल दिया गया। मार्शल ने कुछ BJP विधायकों को भी बाहर किया। इसके बाद सभी भाजपा विधायक सदन से वॉकआउट कर गए।

खुर्शीद अहमद बारामूला से सांसद इंजीनियर रशीद के भाई हैं। राशिद को 2016 में जम्मू-कश्मीर में आतंकी फंडिंग के आरोप में UAPA के तहत अरेस्ट किया गया था। 2019 से वो तिहाड़ जेल में बंद हैं। उन्हें विधानसभा चुनाव में कैंपेनिंग के लिए जमानत पर रिहा किया गया था।

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सत्ता विमर्श डेस्क
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