नई दिल्ली। महाराष्ट्र की महायुति में एक बार फिर महासंग्राम छिड़ गया है। इस बार महासंग्राम की डोर एकनाथ शिंदे नहीं, बल्कि अजीत पवार के करीबी छगन भुजबल के पास है। हालांकि इससे महायुति की सरकार को कोई खतरा पैदा नहीं होने वाला है, लेकिन इसका संदेश सरकार को डेंट जरूर लगा रहा है। मालूम हो कि अजित पवार ने जब अपने चाचा शरद पवार से बगावत कर एनसीपी तोड़ी थी, तब छगल भुजबल अजित पवार के सबसे बड़े समर्थक बनकर सामने आए थे। लेकिन महाराष्ट्र में नई सरकार बनने के बाद उनके साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ, उससे वह अपमानित महसूस कर रहे हैं।
महाराष्ट्र की सरकार में शामिल न किए जाने से एनसीपी के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल बेहद नाराज हैं। छगन भुजबल ने बुधवार को अपने चुनाव क्षेत्र नासिक के येवला में समर्थकों की बैठक बुलाई जिसे काफी अहम माना जा रहा है। इसमें उन्होंने समता परिषद के कार्यकर्ता और ओबीसी समाज के लोगों को भी आमंत्रित किया। छगन भुजबल ने बैठक में साफ किया कि वह मंत्री पद के लिए लड़ेंगे। उनके इस फैसले से महाराष्ट्र की सियासत में हलचल मच सकती है।
बैठक को संबोधित करते हुए छगन भुजबल ने कहा, ”हम वे लोग हैं जो शून्य से लड़कर निर्माण करते हैं। इसलिए, हम फिर से लड़ेंगे। यह लड़ाई मंत्री पद के लिए नहीं बल्कि पहचान के लिए है। आपने कई मंत्रालयों में काम किया है। हम 40 से अधिक वर्षों से काम कर रहे हैं। इसलिए यह कोई मुद्दा नहीं है। यह लड़ाई हमारी है। इसलिए सभी को मिलकर काम करना चाहिए। हम लोगों को विश्वास में लिए बिना कोई निर्णय नहीं लेंगे। येवला-लासलगांव विधानसभा क्षेत्र के सभी लोगों ने बहुत मेहनत की और मुझे पांचवीं बार मौका दिया। इसके लिए धन्यवाद। हमें क्षेत्र के विकास के लिए मिलकर काम करना होगा।”
इशारों-इशारों में छगन भुजबल ने अजित पवार पर जबरदस्त तरीके से निशाना साधा। उन्होंने कहा कि क्या मैं आपके हाथों का खिलौना हूं? क्या आपको लगता है कि जब भी आप मुझे कहेंगे, मैं खड़ा हो जाऊंगा और चुनाव लड़ूंगा, जब भी आप मुझे कहेंगे मैं बैठ जाऊंगा? छगन भुजबल ने यह भी दावा किया कि देवेंद्र फडणवीस उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करना चाहते थे। उनका नाम भी मंत्रिमंडल की लिस्ट में था। अचानक अंतिम क्षण में उनका नाम हटा दिया गया। मंत्रिमंडल से मेरा नाम किसने हटाया, मैं यह पता कर रहा हूं।




