ऑस्ट्रेलिया में टीम इंडिया : न पेस का तोड़ मिल रहा, न स्पिन का जवाब

जसविंदर सिद्धू

ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर गई टीम इंडिया का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं जा रहे। जब विराट कोहली और रोहित शर्मा वनडे टीम में लौटे तो लगा था कि अनुभव का यह मेल ऑस्ट्रेलियाई चुनौती को आसान बना देगा। लेकिन हुआ इसके ठीक उलट- भारतीय बल्लेबाज न तो तेज गेंदबाजी का सामना कर पा रहे हैं और न ही स्पिन के जाल से निकलने का रास्ता खोज पा रहे हैं।

सीरीज़ के दूसरे वनडे में विराट कोहली और शुभमन गिल ओपनिंग करने उतरे। लेकिन ऑस्ट्रेलिया के युवा पेसर जेवियर बार्टलेट ने एक ही ओवर में दोनों भारतीय बल्लेबाजों को पवेलियन भेजकर मैच का रूख ही बदल दिया। लगातार दूसरी बार विराट कोहली का ‘डक’ (जीरो पर आउट) होना और रोहित शर्मा का डिफेंसिव रुख भारतीय बल्लेबाजी के आत्मविश्वास पर सवाल खड़े करता है।

पहले मैच में विराट ऑफ स्टंप के बाहर जाती गेंदों को छोड़ने की रणनीति में नाकाम रहे और दूसरे में जब उन्होंने अपने स्टांस में बदलाव किया तो बार्टलेट की अंदर आती गेंद पर एलबीडब्ल्यू हो गए। गेंद मिडिल स्टंप की लाइन में थी और अंपायर ने बिना झिझक उन्हें आउट दे दिया।

पहले मैच में जोश हेज़लवुड की धारदार गेंदबाजी ने भारतीय टॉप ऑर्डर को हिला दिया था। दूसरे मैच में बार्टलेट ने वही काम किया। दोनों ने भारतीय बल्लेबाजों को कभी उछाल से, कभी मूवमेंट से परेशान किया। भारत के बल्लेबाज न तो क्रीज़ पर टिक पा रहे हैं, न ही रन बनाने के अवसर बना पा रहे हैं।

अगर भारतीय बल्लेबाजों को लगा कि तेज गेंदबाजी से पार पाकर राहत मिलेगी तो एडम जैंपा ने उनके सारे समीकरण बिगाड़ दिए। दूसरे वनडे में जैंपा ने अपने 10 ओवर के स्पैल में 60 रन देकर चार विकेट झटके और मिडिल ऑर्डर को तहस-नहस कर दिया। इससे साफ है कि टीम इंडिया केवल पेस ही नहीं, बल्कि स्पिन के सामने भी सरेंडर कर गये।

ऐसा कहा जा रहा है कि भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया पहुंची तो मैच शुरू होने से सिर्फ दो दिन पहले। सीमित अभ्यास सत्रों में बल्लेबाजों को कंडीशन और बाउंस के अनुकूल ढलने का पर्याप्त समय नहीं मिला। नतीजा सामने है कि बल्लेबाजों के फुटवर्क में झिझक और निर्णय लेने में देरी साफ दिख रही है।

भारतीय टीम प्रबंधन अब अगले मुकाबले से पहले बल्लेबाजी क्रम में कुछ बदलाव की योजना बना रहा है। शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर जैसे युवा बल्लेबाजों को अधिक जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि कोचिंग स्टाफ पिच की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बल्लेबाजों को नई रणनीति पर काम करने की सलाह दे रहा है।

फिलहाल, इतना तय है कि अगर टीम इंडिया को इस सीरीज़ में वापसी करनी है तो उसे पेस और स्पिन दोनों के खिलाफ ठोस योजना के साथ उतरना होगा। क्योंकि इस वक्त ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज सिर्फ विकेट नहीं ले रहे, बल्कि भारतीय बल्लेबाजों के आत्मविश्वास पर भी वार कर रहे हैं।

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सत्ता विमर्श डेस्क
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