भारत ने ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पाक प्रायोजित आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े 9 अहम ठिकानों पर सटीक और सुनियोजित हमले किए। यह कार्रवाई खुफिया एजेंसियों द्वारा मिली पुख्ता जानकारी के आधार पर की गई।
भारत के पास इस बात के पुख्ता सुबूत हैं कि जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों को पाकिस्तानी सेना और आईएसआई से वित्तीय, सैन्य और वैचारिक सहायता मिलती रही है। इन संगठनों के लिए बनाए गए प्रशिक्षण शिविरों को हाल ही में TRF, PAFF और कश्मीर टाइगर्स जैसे नामों से पुनर्नामित किया गया ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी छवि आंदोलनकारी संगठनों के रूप में पेश की जा सके।
इन संगठनों को सैन्य ग्रेड संचार उपकरण, घुसपैठ के लिए सुरंग निर्माण और ड्रोन द्वारा हथियारों तथा नशीले पदार्थों की तस्करी जैसी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। धार्मिक कट्टरता, प्रचार और भर्ती जैसे कार्य भी पाकिस्तान के अंदर स्थित संस्थागत केंद्रों, जैसे मुरिदके में स्थित ‘मरकज़ तैयबा’ और बहावलपुर में ‘मरकज़ सुबहान अल्लाह’ के माध्यम से संचालित हो रहे हैं।
इन आतंकवादी समूहों को सैन्य-स्तर के संचार उपकरण के साथ धार्मिक शिक्षा और अन्य सहायक गतिविधियां जैसे कि धन, प्रचार और भर्ती की सुविधाएं संस्थागत समर्थन के साथ की जा रही हैं। मुरीदके में लश्कर के मरकज तैयबा और बहावलपुर में जैश के मरकज सुबहान अल्लाह न केवल वरिष्ठ कमांडरों के निवास के रूप में काम करते हैं, बल्कि कट्टरपंथ और खुफिया और हथियार संचालन में प्रशिक्षण के केंद्र भी हैं। इसके अतिरिक्त, इन समूहों के कमांडरों ने इन सुविधाओं का उपयोग भारत विरोधी भाषण देने के लिए किया है, जैसे कि बहावलपुर में मरकज सुबहान अल्लाह में जैश प्रमुख मसूद अजहर द्वारा दिसंबर 2024 को दिया गया भाषण।
जानकारी के मुताबिक मुजफ्फराबाद में सैयदना बिलाल और शवाई नाला तथा कोटली में राहील शाहिद जैसे शिविरों का इस्तेमाल पाकिस्तानी सेना के विशेष सेवा समूह (एसएसजी) द्वारा जंगलों और गुरिल्ला युद्ध प्रशिक्षण के लिए किया जा रहा है। पाकिस्तान में घुसकर भारत ने जिन 9 आतंकी ठिकानों पर हमले किए उनकी पूरी प्रोफाइल कुछ इस तरह की है…
1. मरकज सुबहान अल्लाह, बहावलपुर (Markaz Subhan Allah, Bahawalpur)
साल 2015 से संचालित, यह स्थान जैश-ए-मोहम्मद का प्रशिक्षण और विचारधारा का मुख्य केंद्र है। यह जैश-ए-मोहम्मद के संचालन मुख्यालय के रूप में कार्य करता है और 14 फरवरी, 2019 के पुलवामा हमले सहित कई अन्य हमलों की योजना बनाने से जुड़ा हुआ है। इस ठिकाने में जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर, आधिकारिक प्रमुख मुफ्ती अब्दुल रऊफ असगर, मौलाना अम्मार और परिवार के अन्य सदस्यों के घर शामिल हैं। मसूद अजहर ने यहां से कई भारत विरोधी भाषण दिए हैं जिसमें युवाओं से इस्लामिक जिहाद में शामिल होने का आह्वान किया गया है। जैश-ए-मोहम्मद नियमित रूप से इस स्थल पर हथियार चलाने और धार्मिक प्रशिक्षण देता है।
2. मरकज तैयबा, मुरीदके (Markaz Taiba, Muridke)
साल 2000 में नांगल सहदान, मुरीदके (शेखुपुरा, पंजाब) में स्थापित, मरकज तैयबा लश्कर का मुख्य प्रशिक्षण केंद्र है। यह पाकिस्तान के भीतर और बाहर से भर्ती होने वाले आतंकियों को हथियार प्रशिक्षण और धार्मिक शिक्षा प्रदान करता है। यह विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रतिवर्ष लगभग 1,000 युवाओं को दाखिला देता है। कथित तौर पर ओसामा बिन लादेन ने इसी परिसर के भीतर एक मस्जिद और गेस्ट हाउस के निर्माण को वित्तपोषित किया था। इस सुविधा केंद्र में 26/11 के मुंबई हमलावरों को प्रशिक्षित किया था जिसमें अजमल कसाब भी शामिल था और डेविड हेडली तथा तहव्वुर राणा जैसे षड्यंत्रकारियों की मेजबानी की थी।
3. सरजाल, तेहरा कलां (Sarjal, Tehra Kalan)
पाकिस्तान के पंजाब में स्थित जिला नरोवाल के शकरगढ़ तहसील में स्थित यह जगह जैश-ए-मोहम्मद का सुविधा केंद्र है जो तेहरा कलां गांव में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से संचालित होती है। जम्मू-कश्मीर में सांबा सेक्टर के पास अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगभग 6 किमी दूर स्थित इस केंद्र का उपयोग सुरंग निर्माण, ड्रोन संचालन और हथियारों तथा नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए किया जाता है। मोहम्मद अदनान अली और काशिफ जान जैसे वरिष्ठ जैश नेता अक्सर इस जगह पर आते-जाते रहते हैं। इस केंद्र की देखरेख मुफ्ती अब्दुल रऊफ असगर करते हैं।
4. महमूना जोया सुविधा, सियालकोट (Mehmoona Joya Facility, Sialkot)
सियालकोट जिले के हेड मारला में भुट्टा कोटली सरकारी बीएचयू के भीतर स्थित इस हिजबुल मुजाहिदीन सुविधा केंद्र का इस्तेमाल जम्मू में घुसपैठ के लिए किया जाता है। यहां कैडरों को हथियार चलाने और आतंकवादी रणनीति का प्रशिक्षण दिया जाता है। इस सुविधा केंद्र की कमान मोहम्मद इरफान खान के पास है जिसका जम्मू क्षेत्र में कई हमलों से संबंध रहा है। इस सुविधा केंद्र पर हर वक्त 20-25 आतंकवादी मौजूद रहते हैं।
5. मरकज अहले हदीस, बरनाला, भीमबर (Markaz Ahle Hadith, Barnala, Bhimber)
बरनाला के बाहरी इलाके में कोटे जामेल रोड पर स्थित इस लश्कर सुविधा केंद्र का इस्तेमाल पुंछ-राजौरी-रियासी सेक्टर में गुर्गों और हथियारों की घुसपैठ के लिए किया जाता है। 100-150 आतंकियों की क्षमता वाला यह केंद्र किसी भी आतंकी ऑपरेशन के लिए एक मंच के रूप में काम करता है। सीनियर कमांडरों की निगरानी में काम करने वाले कासिम गुज्जर, कासिम खंडा और अनस जरार जैसे लश्कर के गुर्गे यहीं से आतंकी घटनाओं को अंजाम देते हैं।
6. मरकज अब्बास, कोटली (Markaz Abbas, Kotli)
मरकज सैदना हजरत अब्बास बिन अब्दुल मुतालिब के नाम से भी जाना जाने वाला यह केंद्र जैश-ए-मोहम्मद शिविर हाफिज अब्दुल शकूर के नेतृत्व में काम करता है जो शूरा का सदस्य और मुफ्ती अब्दुल रऊफ असगर का करीबी सहयोगी है। यह केंद्र 100-125 जैश-ए-मोहम्मद के गुर्गों को पनाह देता है और पुंछ-राजौरी सेक्टर में आतंकी घुसपैठ मिशन की योजना बनाने और उसे लॉन्च करने के लिए एक केंद्र के रूप में कार्य करता है। इस सेंटर में काम करने वाला आतंकी कारी जर्रार भारत की एनआईए द्वारा वांछित है।
7. मस्कर राहील शाहिद, कोटली (Maskar Raheel Shahid, Kotli)
आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का यह शिविर 150-200 आतंकवादियों को पनाह और संरक्षण देता है जो हथियार प्रशिक्षण, स्नाइपिंग, बीएटी कार्रवाई और पहाड़ी इलाकों में जीवित रहने के कौशल में माहिर है। यह पीओके में हिजबुल मुजाहिदीन के सबसे पुराने परिचालन केंद्रों में से एक है।
8. शवाई नाला कैंप, मुजफ्फराबाद (Shawai Nallah Camp, Muzaffarabad)
बैत-उल-मुजाहिदीन के नाम से भी जाना जाने वाला मुजफ्फराबाद-नीलम रोड पर चेलाबंदी ब्रिज के पास स्थित यह लश्कर कैंप साल 2000 के दशक की शुरुआत से सक्रिय है। यह आतंकी रंगरूटों को धार्मिक शिक्षा, शारीरिक प्रशिक्षण, जीपीएस का उपयोग और हथियार चलाने का प्रशिक्षण देता है। 26/11 के हमलावरों ने यहीं से प्रशिक्षण लिया था। यह 200-250 आतंकवादियों को शरण दे सकता है और उत्तरी कश्मीर को लक्षित करने वाले अभियानों के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है।
9. मरकज सैयदना बिलाल (Markaz Syedna Bilal)
मुजफ्फराबाद में लाल किले के सामने स्थित यह केंद्र पाक अधिकृत कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद का मुख्य केंद्र है। यह जम्मू कश्मीर में घुसपैठ करने से पहले आतंकवादियों के लिए एक पारगमन शिविर के रूप में कार्य करता है। इसमें आमतौर पर 50-100 आतंकवादी रहते हैं। मुफ़्ती असगर खान कश्मीरी इस केंद्र का नेतृत्व करता है।




