नई दिल्ली। सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (एपीसेज) की 5,000 करोड़ रुपये की बॉन्ड को पूरी तरह से सब्सक्राइब कर लिया है। बताया जा रहा है कि यह सौदा 7.75% की कूपन दर पर हुआ है। कहने का मतलब यह कि एलआईसी (LIC) ने अडानी की कंपनी को अकेले 5000 करोड़ रुपये का उधार या लोन दिया है।
हालांकि इस खबर का खुलासा ब्लूमबर्ग ने पिछले महीने 29 मई 2025 को ही कर दिया था लेकिन पांच दिन तक कहीं कोई हल्ला-हंगामा नहीं होने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार (3 जून, 2025) को मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सार्वजनिक धन का इस्तेमाल निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि आम जनता से बीमा प्रीमियम के रूप में इकट्ठा किया गया LIC का सार्वजनिक धन अडानी समूह में निवेश किया गया है। राहुल गांधी ने ब्लूमबर्ग की खबर को टैग कर एक्स पर लिखा- ‘पैसा, पॉलिसी, प्रीमियम आपका. सुरक्षा, सुविधा, फायदा अडानी का!
साझा की गई ब्लूमबर्ग की खबर में बताया गया है कि एलआईसी ने अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड द्वारा जारी किए गए 5000 करोड़ रुपये के बॉन्ड पूरी तरह अकेले खरीदे हैं। मतलब यह कि इस बॉन्ड को खरीदने वाला सिर्फ एक ही खरीदार था– LIC। और सरल भाषा में कहें तो LIC ने अकेले अडानी की कंपनी को 5,000 करोड़ रुपये उधार दिए हैं जो 15 साल बाद चुकाने होंगे और इस पर हर साल 7.75% ब्याज मिलेगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, अडानी पोर्ट्स इस पैसे का इस्तेमाल अपने कारोबारी खर्चों और पहले से लिए गए विदेशी कर्ज (डॉलर कर्ज) को चुकाने के लिए करेगा। अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (एपीसेज़) ने भी पिछले सप्ताह एक बयान में कहा था कि उसने अब तक की सबसे बड़ी घरेलू बॉन्ड बिक्री के जरिए 5,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं। यह राशि LIC से 15 साल की अवधि वाले नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (एनसीडी) के जरिए जुटाई गई है।
पिछले सप्ताह बिजनेस स्टैंडर्ड ने भी अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा था कि ‘इस बॉन्ड इश्यू में केवल एक ही बोली LIC की तरफ से आई थी और यह पहले से तय और निजी तौर पर बातचीत के ज़रिए हुआ सौदा था। कोई और बोली नहीं आई और चूंकि यह ओपन मार्केट में जारी नहीं हुआ था इसलिए इसमें ‘ग्रीन शू ऑप्शन’ (अतिरिक्त निवेश का विकल्प) भी नहीं था।’ रिपोर्ट में आगे लिखा गया कि अगर कंपनी इसे ओपन मार्केट में लाती तो शायद उसे इससे भी ज़्यादा ब्याज दर देनी पड़ती और शायद यही वजह रही कि उन्होंने सिर्फ LIC से संपर्क किया।
दरअसल, अडानी की कंपनी अपने पुराने लोन को कम ब्याज दर वाले लोन से बदलना चाहती है। इससे कंपनी को फायदा होगा क्योंकि उसे कम ब्याज देना होगा। यह 15 साल का बॉन्ड है, जिस पर 7.75% का ब्याज मिलेगा। यह अडानी ग्रुप द्वारा हाल के महीनों में जारी किए गए सबसे लंबे समय के बॉन्ड में से एक है। इसका मतलब है कि अडानी पोर्ट्स को 15 साल बाद LIC को यह पैसा वापस करना होगा और LIC को इस पर 7.75% ब्याज मिलेगा। LIC के पास अभी अडानी पोर्ट्स की 8.06% हिस्सेदारी है।
कंपनी ने बताया कि रणनीतिक तरीके से लोन लेने के कारण उनका औसत ब्याज दर FY25 में 7.92% हो गया है, जो पिछले साल 9.02% था। कुल मिलाकर यह डील दिखाती है कि LIC कॉर्पोरेट बॉन्ड में बड़ा निवेश कर रही है। FY25 के अंत तक LIC ने कॉर्पोरेट बॉन्ड में ₹80,000 करोड़ का निवेश किया था।




