लद्दाख में भड़की हिंसा, पूर्ण राज्य का दर्जा मांग रहे प्रदर्शनकारियों ने बीजेपी दफ्तर में लगाई आग

लेह/नई दिल्ली। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर लेह में लंबे वक्त से चला आ रहा शांतिपूर्ण आंदोलन ने बुधवार को अचानक हिंसक प्रदर्शन के रूप में तब्दील हो गया। बड़ी संख्या में प्रदर्शन कर रहे छात्रों की पुलिस और सुरक्षाबलों से हिंसक झड़प में कई लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोगों के घायल होने की खबर है।

हिंसक प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों ने लेह स्थित भाजपा दफ्तर को आग के हवाले कर दिया। सीआरपीएफ की गाड़ी में आग लगा दी और पुलिसकर्मियों पर पत्थर भी फेंके। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लेह में बिना अनुमति रैली, प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगा दिया है।

दरअसल, प्रदर्शनकारी छात्र लंबे समय से सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के समर्थन में विरोध प्रदर्शन करते आ रहे थे। वांगचुक पिछले 15 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे थे। मांगें पूरी न होने से गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने आज बंद का आह्वान किया था और इसी दौरान भीड़ बेकाबू हो गई और हिंसा भड़क गई।

प्रदर्शनकारियों की चार मुख्य मांगें
पहला-लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए, दूसरा- 6वीं अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा, तीसरा- कारगिल और लेह अलग लोकसभा सीट और चौथा- सरकारी नौकरी में स्थानीय लोगों की भर्ती। कहा जा रहा है कि इन चार मांगों को लेकर आगामी 6 अक्टूबर को दिल्ली में बैठक होगी। मालूम हो कि साल 2019 में अनुच्छेद 370 और 35A हटाते समय जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए थे। केंद्र सरकार ने उस समय राज्य के हालात सामान्य होने पर पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का भरोसा दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि आंदोलनकारियों ने मंगलवार की रात को 24 सितंबर को लद्दाख बंद बुलाने का आह्वान किया था। भीड़ जुटाने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया गया था। लोगों से लेह हिल काउंसिल पहुंचने की अपील की गई थी। इसका असर दिखा और बड़ी तादाद में लोग पहुंचे। लेह हिल काउंसिल के सामने आंदोलनकारियों को रोकने के लिए प्रशासन ने बैरिकेड्स लगा रखे थे। जब आंदोलनकारी आगे बढ़े तो पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी, लेकिन भीड़ ने पुलिस की गाड़ी जलाई और तोड़फोड़ की।

आंदोलन में भड़की हिंसा के बाद वांगचुक ने अनशन तोड़ते हुए कहा, यह लद्दाख के लिए दुख का दिन है। हम पांच साल से शांति के रास्ते पर चल रहे थे। अनशन किया, लेह से दिल्ली तक पैदल चलकर गए। आज हम शांति के पैगाम को असफल होते देख रहे हैं। हिंसा, गोलीबारी और आगजनी हो रही है। मैं लद्दाख की युवा पीढ़ी से अपील करता हूं कि इस बेवकूफी को बंद करें। हम अपना अनशन तोड़ रहे हैं, प्रदर्शन रोक रहे हैं।

लेह जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाते हुए जिले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 163 लागू कर दी है। इसके तहत पांच या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई है। अब कोई भी जुलूस, रैली या मार्च बिना पूर्व अनुमति के नहीं किया जा सकेगा। आदेश में साफ कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति ऐसा बयान नहीं देगा जिससे शांति भंग हो या कानून-व्यवस्था की समस्या खड़ी हो।

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सत्ता विमर्श डेस्क
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