बिहार में SIR की अंतिम सूची जारी: 69 लाख नाम हटे, 21 लाख नए जुड़े

पटना। बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भारतीय निर्वाचन आयोग ने 30 सितंबर 2025 (मंगलवार) को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी। इसके तहत राज्य की वोटर लिस्ट से 69.29 लाख नाम हटाए गए, जबकि 21.53 लाख नए वोटर जोड़े गए। अब राज्य में कुल मतदाता संख्या 7.42 करोड़ हो गई है।

चुनाव आयोग की यह पहल 2003 के बाद पहली बार की गई है। कहा जा रहा है कि इसका मुख्य उद्देश्य फर्जी, दोहराए गए, मृत और स्थानांतरित मतदाताओं को हटाकर चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है।

बिहार में SIR (Special Intensive Revision) की शुरुआत 24 जून 2025 को हुई थी। इस प्रक्रिया के तहत 7.89 करोड़ रजिस्टर्ड वोटर्स से दोबारा फॉर्म भरवाए गए और 99.8% फिजिकल वेरिफिकेशन के साथ मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन किया गया। कुल 7.24 करोड़ मतदाताओं का डेटा कंफर्म किया गया है।

अंतिम आंकड़ों के अनुसार, कुल हटाए गए नाम और कुल जोड़े गए नामों की संख्या इस प्रकार से है–
कैटेगरी                    संख्या
कुल हटाए गए नाम       69.29 लाख
नए जोड़े गए नाम         21.53 लाख
मृत पाए गए मतदाता     22.34 लाख
दो जगह नाम वाले        06.85 लाख
स्थानांतरित वोटर्स         36.44 लाख

पटना में इजाफा तो सारण में कटौती
पटना में पहले 46.51 लाख वोटर्स थे जो अब बढ़कर 48.15 लाख हो गए हैं। कहने का मतलब यह कि पटना में 1.63 लाख मतदाता बढ़ गए हैं। वहीं सारण की बात करें तो यहां पहले 31.27 लाख वोटर्स थे जो घटकर अब 29.02 लाख रह गए हैं। मतलब यहां 2.24 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

चुनावी समीकरणों पर असर तय
चुनाव विशेषज्ञों की मानें तो इस बार के SIR की वजह से कई सीटों पर राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। खासकर शहरी क्षेत्रों में जहां मृत और दोहराए गए नामों की संख्या अधिक पाई गई, वहां वास्तविक वोटर्स की संख्या स्पष्ट होने से चुनावी रणनीतियों में फेरबदल देखने को मिल सकता है।

चुनाव आयोग ने कहा है कि यह प्रक्रिया चुनावी व्यवस्था को विश्वसनीय और साफ-सुथरा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आयोग का मानना है कि इससे फर्जी वोटिंग पर लगाम लगेगी और योग्य नागरिकों को उनका मताधिकार प्रभावी रूप से प्राप्त होगा।

आयोग के अनुसार, SIR की प्रक्रिया जून 2025 से शुरू की गई थी। इसमें 7.89 करोड़ रजिस्टर्ड वोटर्स से दोबारा फॉर्म भरवाए गए थे। इसके बाद 1 अगस्त को लिस्ट जारी की गई जिसमें 65 लाख वोटर्स के नाम काट दिए गए थे। ये 65 लाख लोग ऐसे वोटर्स हैं, जो या तो मर चुके हैं या स्थायी रूप से बाहर चले गए हैं। इनमें से कुछ लोग ऐसे भी थे, जिनके पास 2 वोटर आईडी थे।

Previous articleलद्दाख में भड़की हिंसा, पूर्ण राज्य का दर्जा मांग रहे प्रदर्शनकारियों ने बीजेपी दफ्तर में लगाई आग
Next articleजेन-जी को सत्ता की सीढ़ी बनाने की साज़िश
सत्ता विमर्श डेस्क
सत्ता विमर्श (Satta Vimarsh) नाम ही हमारी पहचान है। हमारा मानना है कि सब कुछ सत्ता के इर्द-गिर्द तय होता है, सरकार भी और सरोकार भी। लेकिन, इस सत्ता में हमारी-आपकी भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी सत्ता में बैठे लोगों की। इसीलिए सत्ता और सरोकार से जुड़े मुद्दों पर विमर्श जरूरी है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here