नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने CBSE की 12वीं बोर्ड परीक्षा के डिजिटल मूल्यांकन को लेकर बड़ा सवाल खड़ा किया है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि CBSE ने जिस COEMPT कंपनी को डिजिटल इवैल्यूएशन का ठेका दिया है, उसका पुराना नाम ‘ग्लोबारिना’ था और यह कंपनी पहले भी विवादों में रह चुकी है।
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और CBSE से पूछा कि आखिर इस कंपनी को बोर्ड परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रिया का कॉन्ट्रैक्ट किस आधार पर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या टेंडर प्रक्रिया में नियमों और पारदर्शिता की अनदेखी की गई। कांग्रेस नेता ने यह भी जानना चाहा कि COEMPT प्रबंधन और मोदी सरकार के बीच क्या संबंध हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि जिस कंपनी का नाम पहले विवादों से जुड़ चुका हो, उसे देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़े काम की जिम्मेदारी कैसे सौंप दी गई। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या CBSE को कंपनी के पुराने रिकॉर्ड और विवादों की जानकारी नहीं थी या फिर जानबूझकर इसे नजरअंदाज किया गया।
हालांकि, CBSE ने राहुल गांधी के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। बोर्ड की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि COEMPT Edutech को कॉन्ट्रैक्ट देने में सभी सरकारी नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया। CBSE ने आरोपों को “भ्रामक और तथ्यहीन” बताते हुए कहा कि डिजिटल मूल्यांकन के लिए 28 अगस्त 2025 को सरकारी पोर्टल पर आवेदन मांगे गए थे और तय प्रक्रिया के बाद ही कंपनी का चयन किया गया।
इस विवाद के बीच CBSE के ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर छात्रों की बड़ी नाराजगी भी सामने आई है। बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, 12वीं परीक्षा में शामिल करीब 22.85 फीसदी छात्रों ने अपनी स्कैन आंसरशीट देखने के लिए आवेदन किया है। 17.68 लाख छात्रों में से 4 लाख से ज्यादा छात्रों ने कुल 11.31 लाख उत्तरपुस्तिकाएं मांगी हैं, जो पिछले साल की तुलना में करीब चार गुना ज्यादा हैं।
तकनीकी दिक्कतों के चलते बोर्ड की वेबसाइट पर कई आवेदन लंबित भी रहे। CBSE ने कहा है कि 27 मई तक सभी लंबित आवेदन निपटा दिए जाएंगे, जबकि 29 मई से पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू होगी। छात्र अंकों के सत्यापन और प्रति प्रश्न पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकेंगे।
पिछले साल भी बड़ी संख्या में छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया था। बोर्ड के मुताबिक, 2025 में 50 हजार छात्रों ने री-इवैल्यूएशन कराया था, जिनमें से 31 हजार छात्रों के अंक बढ़े थे। इस बार रिकॉर्ड संख्या में आंसरशीट मांगे जाने के बाद डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर बहस तेज हो गई है।




