नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश में जनसंख्या के पैटर्न में हो रहे “असामान्य बदलाव” की जांच के लिए एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है। इस कमेटी की अगुवाई रिटायर्ड जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर करेंगे। सरकार का कहना है कि कुछ इलाकों में अवैध घुसपैठ, गैरकानूनी प्रवास और अन्य कारणों से आबादी का संतुलन तेजी से बदल रहा है, जिसका असर सामाजिक ढांचे, सुरक्षा और स्थानीय संसाधनों पर पड़ सकता है।
गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि कमेटी देशभर में उन क्षेत्रों की पहचान करेगी जहां जनसंख्या में अचानक या असामान्य बदलाव देखने को मिला है। यह जांच केवल कुल आबादी तक सीमित नहीं होगी, बल्कि धार्मिक और सामाजिक समुदायों के स्तर पर भी बदलाव के पैटर्न का अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद कमेटी सरकार को ऐसे बदलावों से निपटने के लिए सुझाव देगी।
केंद्र की यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस घोषणा का हिस्सा मानी जा रही है, जो उन्होंने 15 अगस्त 2025 को लाल किले से की थी। तब प्रधानमंत्री ने कहा था कि सीमा क्षेत्रों में अवैध घुसपैठ और गैरकानूनी प्रवास के कारण जनसंख्या असंतुलन पैदा हो रहा है। उनके मुताबिक इसका असर स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी, संसाधनों और सामाजिक व्यवस्था पर पड़ रहा है। इसी वजह से सरकार ने “हाई-पावर्ड डेमोग्राफी मिशन” शुरू करने की बात कही थी।
कमेटी में कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं। इनमें सेंसस कमिश्नर मृत्युंजय कुमार नारायण, पूर्व आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव, पूर्व आईएएस अधिकारी दुर्गाशंकर मिश्रा और अर्थशास्त्री डॉ. शमिका रवि शामिल हैं। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (फॉरेनर्स-I) को सदस्य सचिव बनाया गया है।
इस कमेटी के गठन को सिर्फ एक प्रशासनिक कदम नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके राजनीतिक, सामाजिक और सुरक्षा से जुड़े बड़े मायने हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा : सरकार लंबे समय से कहती रही है कि सीमा से लगे राज्यों और कुछ शहरी इलाकों में अवैध घुसपैठ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। अगर किसी क्षेत्र की जनसंख्या संरचना बहुत तेजी से बदलती है, तो उसका असर कानून-व्यवस्था, पहचान और संसाधनों पर पड़ सकता है। यह कमिटी पहली बार इस विषय पर राष्ट्रीय स्तर पर विस्तृत अध्ययन करेगी।
जनसंख्या डेटा पर केंद्रित नई नीति की संभावना : अब तक सरकारें मुख्य रूप से जनगणना और आर्थिक आंकड़ों के आधार पर नीतियां बनाती रही हैं। लेकिन यह कमेटी धार्मिक और सामाजिक समूहों के आधार पर बदलाव का विश्लेषण करेगी। इससे भविष्य में नागरिकता, सीमा प्रबंधन, शहरी योजना और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी नई नीतियां बन सकती हैं।
राजनीतिक और सामाजिक असर : यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी काफी संवेदनशील है। विपक्षी दल इसे सामाजिक ध्रुवीकरण से जोड़कर देख सकते हैं, जबकि सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसंख्या संतुलन का मामला बता रही है। इसलिए कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद इस पर देशभर में बड़ी राजनीतिक बहस होने की संभावना है।
सीमावर्ती राज्यों पर खास फोकस : असम, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और कुछ अन्य सीमा राज्यों में लंबे समय से अवैध प्रवास का मुद्दा उठता रहा है। माना जा रहा है कि कमिटी इन इलाकों के जनसंख्या आंकड़ों का विशेष अध्ययन कर सकती है।
भविष्य की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई का आधार : अगर कमेटी किसी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध प्रवास या असामान्य जनसंख्या वृद्धि की पुष्टि करती है, तो सरकार वहां पहचान सत्यापन, नागरिक रजिस्टर, सीमा निगरानी और दस्तावेज जांच जैसे कदमों को और सख्त कर सकती है।
कुल मिलाकर, यह कमेटी केवल जनसंख्या आंकड़ों की समीक्षा नहीं करेगी, बल्कि देश की सुरक्षा, सामाजिक संतुलन और भविष्य की नीतियों को प्रभावित करने वाली एक बड़ी पहल साबित हो सकती है।




