लगातार पांच दिनों तक हंगामे, विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक टकराव के बाद मंगलवार को संसद का फोकस आखिरकार उस मुद्दे पर आ गया है जिसने पिछले कई महीनों से देश के लाखों छात्रों और उनके परिवारों को आंदोलित किया हुआ है। दोपहर का सत्र शुरू होने पर स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा कि चर्चा के लिए 6 घंटे का समय तय किया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष चाहें तो समय बढ़ा सकते हैं। इस पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार ने सभी दलों से बात की है। हम 10 घंटे भी चर्चा को तैयार हैं। फिलहाल, लोकसभा में ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर विस्तृत चर्चा हो रही है।
सपा सांसद अखिलेश यादव ने कहा- सरकार वचन नहीं जुमले देती है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्रों के प्रदर्शन के दौरान नारा लगा कि सरकार झुकती है, झुकाने वाला चाहिए। अखिलेश यादव ने कहा- मजाक मजाक में बनी कॉकरोच जनता पार्टी, कितनी बड़ी पार्टी बन गई। मजाक में शुरू हुई पार्टी कितनी गंभीर हो गई। इससे सरकार लोकतांत्रिक हो गई। सरकार लोकतांत्रिक थी कि उन्हें धरने पर बैठने दिया। नहीं तो सालों साल तक किसान धरने पर बैठे रहे, लेकिन सरकार ने ध्यान नहीं दिया। सरकार को लगा कि चुनाव आ गया तो उन्होंने तीन काले कानून वापस ले लिए। अखिलेश यादव ने कहा, ‘पहला आंदोलन देखा, जिसमें बच्चों के मां-बाप ने कहा कि जाओ, आंदोलन करो। अगर यह गलत बात है, तो गृह मंत्री को लाइए, वे सब साफ कर देते हैं। जो लोग चढ़ावा नहीं बचा सके, वो लोग पेपर लीक कैसे बचा पाएंगे। भगवान के दरबार से दान गायब हो गया।
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि ये बिल न केवल जरूरी है, बल्कि आज के समय की मांग है। आज परीक्षा माफिया संगठित हो गया। ये बिल ज्यूरिशडिक्शन की उलझन को सुलझाता है। उन्होंने कहा, इस बिल में प्रावधान है कि केंद्र सरकार एक स्पेशल टास्क फोर्स का गठन कर सकती है। जांच एजेंसी को सिर्फ दो महीने के अंदर पूरी जांच प्रक्रिया खत्म करनी है। ट्रायल 3 महीने में खत्म करके फैसला देना है।
कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने कहा, ‘आज की तरह तब भी सरकार ये बिल लेकर आई थी और कहा था कि ये एतिहासिक कदम है और अब पेपर लीक नहीं होगा। 2026 के नीट पेपर लीक में जो तहकीकात हुई। मैं उसकी स्थिति जानना चाहता हूं, ताकि पता चले कि सरकार दो साल पहले जो भ्रष्टाचार हुई उसको लेकर कितनी गंभीर है। 2024 के 45 आरोपियों में 44 को बेल मिल चुकी है। जिसको मास्टरमाइंड कहा गया, 11 महीने तक वह फरार था। 2025 में गिरफ्तार हुआ। फिर उस मामले में उसे बेल मिल गई। गोगोई ने कहा- कानून उस समय भी विफल था। आज जिस मंशा से सरकार ये ला रही है, यह भी फेल होगा। 2024 में कानून लाने के बावजूद पेपर लीक हुआ। अफसोस की बात है कि उस समय भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान थे। कल इस्तीफे के बाद प्रधान जब संसद में आए तो आपने उनको ऐसे माला पहनाई जैसे वो पाकिस्तान से जंग लड़ कर आए हों।
चर्चा की शुरुआत करते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा- हालिया घटनाक्रम को देखते हुए हमने फैसला लिया कि हमें 2024 के कानून को ही और मजबूत करने की जरूरत है। यह विधेयक 2024 के पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) कानून में संशोधन के लिए लाया गया है। यह कानून भी हमारी सरकार लेकर आई थी और आजादी के बाद इस तरह का पहला कानून था। यह संशोधन छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। साथ ही यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संकल्प को दोहराता है कि भारत के बच्चों के भविष्य से कोई समझौता नहीं होगा। जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘जो राधा कृष्ण कमेटी गठित की गई थी, उसके 40 सुझाव में से 35 लागू हो चुके हैं। सरकार की नीति ईमानदार है।
इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी दलों से सदन को सुचारु रूप से चलाने की अपील करते हुए कहा कि संसद संवाद का मंच है और यहां होने वाली बहस से देश में सकारात्मक संदेश जाना चाहिए। हालांकि दिन की शुरुआत एक बार फिर हंगामे से हुई और दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 2.00 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
लोकसभा अध्यक्ष ने छह घंटे की बहस तय की, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के प्रमुख नेता भाग लेंगे। अब पूरे देश की निगाह इस बात पर है कि क्या यह बहस केवल कानून को और कठोर बनाने तक सीमित रहेगी या फिर परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही, पारदर्शिता और संस्थागत सुधार पर भी ठोस सहमति बन पाएगी।
सरकार का दावा : कानून और कठोर होगा
सरकार द्वारा लाया गया संशोधन बिल 2024 में बने सार्वजनिक परीक्षा कानून को और अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास बताया जा रहा है। प्रस्तावित बदलावों के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का अधिकार मिलेगा। रोजाना सुनवाई का प्रावधान रहेगा। पेपर लीक गिरोहों के खिलाफ कठोर दंड और भारी आर्थिक जुर्माना सुनिश्चित किया जाएगा और संगठित अपराध के रूप में परीक्षा माफिया पर कार्रवाई आसान होगी। सरकार का तर्क है कि पिछले दो वर्षों के अनुभव के आधार पर कानून में कुछ व्यावहारिक कमियां सामने आई थीं, जिन्हें अब दूर किया जा रहा है।
विपक्ष का फोकस कानून नहीं, जवाबदेही
हालांकि विपक्ष का तर्क अलग है। कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेताओं का कहना है कि देश में पहले से कानून मौजूद था, लेकिन उसके बावजूद लगातार पेपर लीक होते रहे। ऐसे में केवल सजा बढ़ाने से समस्या खत्म नहीं होगी। विपक्ष की ओर से राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल और गौरव गोगोई चर्चा में हिस्सा लेने वाले हैं। दूसरी ओर भाजपा की ओर से बांसुरी स्वराज, तेजस्वी सूर्या समेत कई युवा सांसद सरकार का पक्ष रखेंगे। बहस के दौरान विपक्ष संभवतः इन सवालों को प्रमुखता से उठाएगा कि आखिर लगातार पेपर लीक क्यों हुए? जांच एजेंसियों की जवाबदेही क्या रही? परीक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी कैसे तय होगी? और क्या केवल छात्रों और दलालों पर कार्रवाई पर्याप्त है?
संसद से सड़क तक संघर्ष की पूरी टाइमलाइन
पेपर लीक का मुद्दा केवल कानून तक सीमित नहीं रहा। यह पूरे मॉनसून सत्र का सबसे बड़ा राजनीतिक संघर्ष बन गया। 20 जुलाई से शुरू हुए सत्र में विपक्ष लगातार NEET पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में धांधली और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही का मुद्दा उठाता रहा। इस दौरान संसद के भीतर लगातार नारेबाजी हुई। विपक्ष ने पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री आवास के बाहर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सपा नेता अखिलेश यादव समेत कई सांसदों, नेताओं ने अभूतपूर्व धरना दिया गया। जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी संसद में गूंजा। कई दिनों तक दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित होती रही।
20 जुलाई को मानसून सत्र की शुरुआत, पहले ही दिन टकराव : मॉनसून सत्र के पहले दिन विपक्ष ने संसद के भीतर ही सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई। कांग्रेस और INDIA गठबंधन के सांसद NEET पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में धांधली और राम मंदिर चढ़ावा चोरी जैसे मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए पोस्टर-बैनर लेकर सदन में पहुंचे। लगातार हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर युवाओं की आवाज दबाने का आरोप लगाया। दूसरी ओर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने संबंधी विधेयक पेश किया। सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद परिसर में मीडिया को संबोधित करते हुए सभी दलों से सार्थक और तर्कपूर्ण चर्चा की अपील की।
21 जुलाई को संसद से सड़क तक पहुंचा आंदोलन : दूसरे दिन विपक्ष का विरोध संसद की सीमाओं से निकलकर प्रधानमंत्री आवास तक पहुंच गया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेताओं ने 7, लोक कल्याण मार्ग के निकट धरना दिया। उनकी मुख्य मांग थी कि NEET और अन्य भर्ती परीक्षाओं में हुए पेपर लीक की जिम्मेदारी तय करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें तथा संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाए। राजनीतिक दृष्टि से यह असाधारण घटना मानी गई क्योंकि पहली बार नेता प्रतिपक्ष ने प्रधानमंत्री आवास के समीप इस तरह का विरोध प्रदर्शन किया। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। सरकार ने संसद में चर्चा कराने पर सहमति जताई, लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग ठुकरा दी। इसके बाद भी दोनों सदनों में विपक्ष का हंगामा जारी रहा और कार्यवाही बार-बार स्थगित होती रही।
22 जुलाई को चार घंटे में 6 बार स्थगित हुई लोकसभा : विपक्ष और सरकार के बीच गतिरोध और गहरा गया। लोकसभा की कार्यवाही महज चार घंटे के भीतर छह बार स्थगित करनी पड़ी। कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने संसद के बाहर भी विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च कर सरकार पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना था कि जब तक शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक केवल कानून बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
23 जुलाई को भी गतिरोध बरकरार, रणनीति पर मंथन : लगातार तीन दिनों के हंगामे के बाद भी संसद में सामान्य कामकाज बहाल नहीं हो सका। विपक्ष ने अपनी रणनीति की समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार और शिक्षा मंत्री की जवाबदेही उसके आंदोलन के केंद्र में रहेंगे। सरकार और विपक्ष के बीच अनौपचारिक स्तर पर बातचीत के प्रयास जारी रहे, लेकिन किसी ठोस सहमति की घोषणा नहीं हुई। संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही और विधायी कामकाज लगभग ठप रहा।
24 जुलाई को सरकार ने पेश किया विधेयक : चौथे दिन सरकार ने राज्यसभा में ‘राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026’ सहित अन्य विधायी कार्य आगे बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष ने अपना विरोध जारी रखा। कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक पेपर लीक मामले में सरकार ठोस राजनीतिक जवाबदेही तय नहीं करती, तब तक सामान्य विधायी कार्य में सहयोग संभव नहीं होगा। इसी दिन सरकार ने ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026′ को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज की और संकेत दिया कि पेपर लीक पर विस्तृत चर्चा कराई जाएगी। इसके बाद सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनी कि इस मुद्दे पर लोकसभा में विशेष समय निर्धारित कर व्यापक बहस कराई जाए।
क्या कहता है 2024 का पेपर लीक कानून?
पेपर लीक को लेकर केंद्र ने जून 2024 में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर अलग कानून बनाया था। उसमें शामिल प्रमुख प्रावधान थे- पेपर लीक। OMR शीट से छेड़छाड़। परीक्षा में संगठित नकल। फर्जी वेबसाइट या पोर्टल बनाकर अभ्यर्थियों से धोखाधड़ी और परीक्षकों को धमकाना। इन अपराधों को गैर-जमानती बनाया गया। सजा के तहत सामान्य मामलों में 3 से 5 वर्ष तक की जेल और 10 लाख रुपये तक जुर्माना। परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था के अधिकारियों की संलिप्तता साबित होने पर 3 से 10 वर्ष तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना। अब सरकार इसी कानून को और सख्त बनाने का दावा कर रही है।
कुल मिलाकर समझने की बात ये है कि पेपर लीक का संकट केवल कानून का संकट नहीं है, बल्कि यह देश की भर्ती और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का संकट बन चुका है। पिछले कुछ वर्षों में कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय परीक्षाएं विवादों में रहीं। हर बार जांच एजेंसियां सक्रिय हुईं, गिरफ्तारियां हुईं और नए कानूनों की घोषणा हुई। लेकिन छात्रों का मूल प्रश्न आज भी वही है- क्या अगली परीक्षा निष्पक्ष होगी?
यही कारण है कि आज की संसदीय बहस केवल एक विधेयक पर चर्चा नहीं है। यह उस भरोसे की परीक्षा भी है, जो करोड़ों युवा अपनी मेहनत, प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी संस्थाओं पर रखते हैं। यदि चर्चा केवल दंड बढ़ाने तक सीमित रही और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, तकनीकी सुरक्षा, संस्थागत जवाबदेही तथा प्रशासनिक सुधार पर ठोस रोडमैप सामने नहीं आया, तो नया संशोधन भी पुराने कानून की तरह कागजों तक सीमित रह सकता है।




