पहली बार जन-दबाव के आगे झुकी मोदी सरकार! आंदोलन खत्म, CJP ने किया जीत का किया ऐलान

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से लेकर केस वापसी और पीड़ित परिवारों को मुआवजे के आश्वासन तक, सरकार के साथ तीसरे दौर की वार्ता के बाद जंतर-मंतर से पैदा हुआ आंदोलन भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की असली परीक्षा अब सरकार के सामने है। विपक्ष ने जहां इसे जनशक्ति की जीत तो सत्ता पक्ष ने संवाद की सफलता बताया है।

नई दिल्ली। करीब दो सप्ताह से राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन आखिरकार शनिवार को समाप्त हो गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंदोलन खत्म करने का ऐलान किया। संगठन ने दावा किया कि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है और लिखित आश्वासन भी जल्द दिया जाएगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP के प्रवक्ता सौरभ दास और छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल आशुतोष रांका ने कहा कि अब सभी प्रदर्शनकारी शांतिपूर्वक अपने-अपने घर लौट जाएं। उन्होंने इसे छात्रों और जनदबाव की जीत बताया।

मोदी सरकार में पहली बार मंत्री का इस्तीफा!

इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माना जा रहा है। 2014 में पहली बार नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद यह पहला अवसर बताया जा रहा है जब किसी केंद्रीय मंत्री को व्यापक जनविरोध और लंबे आंदोलन के बाद पद छोड़ना पड़ा। हालांकि, इससे पहले 2018 में तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर ने भी इस्तीफा दिया था, लेकिन वह ‘मी टू’ अभियान के दौरान लगे व्यक्तिगत आरोपों के कारण था। मौजूदा घटनाक्रम को सीधे तौर पर जनआंदोलन के दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

सरकार से तीन दौर की बातचीत, फिर बनी सहमति

छात्र आंदोलन के नेता आशुतोष रांका ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में सरकार के साथ तीन दौर की विस्तृत बातचीत हुई। इन बैठकों में आंदोलनकारियों ने अपनी प्रमुख मांगें सरकार के सामने रखीं। उनके अनुसार सरकार ने तीन प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों की वापसी और भविष्य में कोई कार्रवाई नहीं। NEET से प्रभावित और जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा। रांका ने कहा कि सरकार ने एफआईआर से जुड़ी पूरी जानकारी कुछ दिनों के भीतर उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया है।

बातचीत का रास्ता हमेशा खुला रहेगा : जेपी नड्डा

संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार ने आंदोलनकारियों के साथ लगातार संवाद बनाए रखा। उन्होंने बताया कि तीसरी बैठक में लंबी चर्चा हुई और प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रस्तुत विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से विचार किया गया। सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का निर्णय लिया है, जबकि शिक्षा व्यवस्था में सुधार संबंधी प्रस्तावों पर भी गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया गया है। नड्डा ने आंदोलनकारियों से अपील की कि अब आंदोलन समाप्त कर सामान्य स्थिति बहाल करें।

लिखित आश्वासन मंगलवार तक मिलने का दावा

CJP प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि संगठन ने सरकार को एक विस्तृत ड्राफ्ट भी सौंपा है। सरकार ने मंगलवार तक लिखित जवाब देने का भरोसा दिलाया है। उन्होंने बताया कि शिक्षा सुधार से जुड़े पांच बिंदुओं पर आगे भी बातचीत जारी रहेगी और चार सप्ताह बाद फिर बैठक प्रस्तावित है। संगठन का कहना है कि सरकार ने NEET से जुड़े पीड़ित परिवारों को सम्मानजनक मुआवजा देने के सिद्धांत पर सहमति जताई है।

जंतर-मंतर पर जश्न, राष्ट्रगान और मौन

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की खबर सामने आते ही जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों में उत्साह का माहौल बन गया। छात्रों ने ‘छात्र एकता जिंदाबाद’ के नारे लगाए, राष्ट्रगान गाया और NEET विवाद के दौरान जान गंवाने वाले छात्रों की स्मृति में दो मिनट का मौन भी रखा। आंदोलन समाप्ति की घोषणा के बाद प्रदर्शनकारी शांतिपूर्वक स्थल से लौटने लगे।

बहरहाल, यह घटनाक्रम केवल एक आंदोलन के समाप्त होने की खबर नहीं है, बल्कि केंद्र सरकार की राजनीतिक कार्यशैली पर भी कई सवाल खड़े करता है। पिछले एक दशक में मोदी सरकार की पहचान कठोर और अडिग निर्णयों वाली सरकार के रूप में रही है। ऐसे में यदि सरकार ने आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों पर सहमति बनाई है, तो इसे बदलते राजनीतिक समीकरणों और जनदबाव की ताकत के संकेत के रूप में देखा जा सकता है।

दूसरी ओर, सरकार इसे लोकतांत्रिक संवाद की सफलता बता रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि शिक्षा सुधार, परीक्षा प्रणाली में बदलाव और मुआवजे से जुड़े वादे किस हद तक जमीन पर उतरते हैं। यदि लिखित आश्वासन और घोषित फैसलों का क्रियान्वयन होता है, तो यह देश की परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार की शुरुआत भी साबित हो सकता है।

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सत्ता विमर्श डेस्क
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