इस कांग्रेसी नेता ने तो चम्पाई सोरेन को विभीषण तक कह दिया

रांची : झारखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और हेमंत सोरेन सरकार में स्वास्थ्य एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री बन्ना गुप्ता ने पूर्व मुख्यमंत्री मंत्री चम्पाई सोरेन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बयान जारी कर कहा कि झारखंड के राजनीतिक इतिहास में चम्पाई सोरेन को सरकार में रहते भितरघात के लिए याद किया जाएगा। जिस पार्टी-माटी ने उन्हें सब-कुछ दिया, उसे ठुकरा कर आत्मसम्मान से समझौता कर सरकार को गिराने की साजिश कर रहे थे। 18 अगस्त को सोशल मीडिया एक्स पर चम्पाई सोरेन के पत्र के जवाब में बन्ना गुप्ता ने भी एक धांसू पत्र लिखकर जवाब दिया।

”झारखंड का इतिहास जब भी लिखा जायेगा, चम्पाई सोरेन का नाम विभीषण के रूप में दर्ज होगा। जिस पार्टी और माटी ने उनको सबकुछ दिया उसको ठुकरा कर, अपने आत्मसम्मान को गिरवी रख कर वे सरकार को तोड़ने का कार्य कर रहे थे। लेकिन समय रहते जब चीजें सामने आ गई तो सोशल मीडिया में पोस्ट कर रहें है। जबकि हकीकत हैं कि वे अपनी करनी पर पछतावा कर रहें है और मुंह छिपा रहे हैं।

आदरणीय गुरुजी ने एक साधारण व्यक्ति को जमशेदपुर से निकाल कर पहचान दी। उनको मान सम्मान दिया, हर संभव मदद की। पार्टी में अपने बाद का ओहदा दिया। जब-जब जेएमएम की सरकार बनी उसमें मंत्री बनाया। सांसद का टिकट दिया। हर निर्णय का सम्मान किया। लेकिन उसके बदले चम्पाई दा ने राज्य को मौकापरस्ती के दलदल में झोंकना चाहा।

हेमंत सोरेन जब जेल जाने लगे तो उन्होंने सभी सत्ता पक्ष के विधायकों से चंपाई सोरेन को मुख्यमंत्री बनाने की बात कही तो हम सभी ने हेमंत की बात को माना। जब खुद को मुख्यमंत्री बनने की बात थी तो वो निर्णय चम्पाई दा को बुरा नहीं लगा। प्रोटोकॉल के विरुद्ध नहीं लगा, तानाशाही नहीं लगी?

जब हेमंत जेल से बाहर आ रहे थे तो चम्पाई सोरेन कैबिनेट की बैठक में व्यस्त थे। चम्पाई दा तो अकेले निर्णय लेने में व्यस्त थे। उस समय तो कांग्रेस समेत झामुमो के कैबिनेट के साथियों ने भी बैठक में बात उठाई थी। हर विभाग में उनका हस्तक्षेप था, हर मंत्रालय में वे खुद निर्णय लेने लगे थे। तब उनको नेतृत्व में तानाशाही महसूस नहीं हुआ। बन्ना ने आरोप लगाया कि जब पार्टी और गठबंधन बुरे दौर से गुजर रहे थे, तो वे बीजेपी नेताओं से अपनी सेटिंग बैठा रहे थे। जब हमारे नेता जेल में थे तो केंद्र सरकार की कानून बदलने वाली योजना को हर अखबार के प्रमुख पन्नों में अपनी फोटो के साथ छपवाकर कौन सा गठबंधन धर्म निभा रहे थे? जबकि इंडिया गठबंधन देश में इसका विरोध कर रहा था। लेकिन चंपाई दादा बीजेपी से अपना पीआर बढ़ाने में लगे थे। बीजेपी नेतृत्व को खुश करने में लगे हुए थे।

चम्पाई दादा, 2019 का चुनाव आपके चेहरे पर नहीं बल्कि हेमंत बाबू के चेहरे पर लड़ा गया था और ये जनादेश हेमंत बाबू और गुरुजी को मिला था। लेकिन अनुकम्पा के आधार पर मिली कुर्सी को आप अधिकार समझने लगे। सच तो ये है कि आप सत्ता के लोभी हैं। तभी तो जब-जब झामुमो के नेतृत्व वाली सरकार बनी तो आपने मंत्री का पद मांगा। आपको मिला भी, आपने सांसद का टिकट मांगा। आपको मिला, पार्टी में भी बड़ा सम्मान मिला लेकिन आपको वो सम्मान पचा नहीं।

सच तो ये ही कि जिस दिन हेमंत जेल से बाहर आये थे आपको नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए था। जब हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो मुख्यमंत्री बनने के बाद भी आप मंत्री पद मांगने की जिद करने लगे। जबकि आपको कुर्सी का मोह नहीं होता तो कई सीनियर नेता थे। कोल्हान में रामदास सोरेन थे, दशरथ गगराई थे, कई लोग थे जिसे आप अपना मंत्री का पद दे सकते थे। लेकिन आप तो मंत्री बनने के लिए नाराज तक हो गए थे। यदि किसी ने कुर्बानी दी तो वे थे बसंत सोरेन।

आज जब बीजेपी में आपकी दाल नहीं गली, बाबूलाल मरांडी आपके बीजेपी में शामिल होने का विरोध कर रहें हैं तो आप ऑप्शन चुनने लगे। आपके पास एक ही ऑप्शन था जो आपने गवां दिया। वो था मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को गद्दी सौंपना और झामुमो को मजबूत करना। लेकिन अफ़सोस की आपने रातों-रात अपने घर और गांव से झामुमो का झंडा उतार कर गायब करवा दिया। लोबिन दादा को मनाने के बजाय उकसा कर गलत बयानबाजी करवा दी। मीडिया मैंनेजमेंट के बहाने झामुमो के मजबूत और समर्पित विधायकगणों का नाम उछलवा दिया कि वे सब आपके साथ हैं।

हद तो तब हो गई जब कोलकाता होते हुए दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचकर आप कहने लगे हम जहां हैं वही हैं। मतलब जेएमएम में हैं सरकार के साथ हैं। लेकिन जब बीजेपी नेतृत्व ने आपको ठुकरा दिया तो सोशल मीडिया पर इमोशनल कार्ड वाला बयान दिया।

सच बोलूं तो ये आपका और झामुमो का मामला है। लेकिन ये सरकार का भी मामला है। गठबंधन का मामला भी है। नैतिकता का मामला भी है। झारखंड की जनता से जुड़ा मामला भी है। इसलिए मैं आपको कहना चाहता हूं कि भ्रम में मत रहिये। झारखंड की जनता आपको समझ चुकी है। जान चुकी है। आप संन्यास नहीं लेंगे। क्योंकि आप सत्तालोभी हैं। पार्टी या सरकार के विधायक नहीं तोड़ सकते। क्योंकि सभी मजबूती से गुरुजी और हेमंत बाबू के साथ खडे हैं। तीसरा ऑप्शन है नए साथी की तलाश। तो यदि बीजेपी आपको साथ लेती भी है तो बहुत उदाहरण हैं जिसने पार्टी या सरकार के साथ गद्दारी की उसका क्या हुआ?

जब विधायक दल की बैठक में गठबंधन के विधायकों का समर्थन ब्लैंक लेकर आपका नाम लिख दिया गया तब आपको नहीं लगा था कि ये तानाशाही है। हां, एक बात और हेमंत सोरेन के पास बसंत सोरेन और कल्पना सोरेन का ऑप्शन था। पर आप पर भरोसा जताया था। लेकिन आपने सिर्फ अपने स्वार्थ, सत्ता की भूख और अहंकार के कारण झारखंड का सम्मान बीजेपी के हाथों गिरवी रखने का कार्य किया है।

बन्ना ने कहा, एक बात और है। कोल्हान एवं झारखण्ड की जनता, हर एक विधायक, मंत्री और इंडिया गठबंधन का हर कार्यकर्ता गुरुजी शिबू सोरेन, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे एवं गुलाम अहमद मीर के साथ खड़ा है।

हम लोग झारखण्डी हैं। जब रिश्ता बनाते हैं तो दिल से। स्वार्थ से नहीं। आपने सिर्फ पार्टी को नहीं बल्कि झारखंड की माटी को भी धोखा दिया है। झारखंड के शहीदों का अपमान किया है। झारखंड की माटी को बेचने का कार्य किया है। इसलिए आज आप अकेले हैं। कोई ना कभी आपके साथ था ना कभी रहेगा।”

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सत्ता विमर्श डेस्क
सत्ता विमर्श (Satta Vimarsh) नाम ही हमारी पहचान है। हमारा मानना है कि सब कुछ सत्ता के इर्द-गिर्द तय होता है, सरकार भी और सरोकार भी। लेकिन, इस सत्ता में हमारी-आपकी भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी सत्ता में बैठे लोगों की। इसीलिए सत्ता और सरोकार से जुड़े मुद्दों पर विमर्श जरूरी है।

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