नई दिल्ली/चंडीगढ़ : ‘जाट वर्सेज नॉन जाट’ की राजनीति से गैर जाटों को इकट्ठा कर मोदी-शाह नीत भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा चुनाव में इतिहास रच दिया। हरियाणा के 57 साल के इतिहास में पहली बार कोई पार्टी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है।
हरियाणा चुनाव में बीजेपी को जहां 48 सीटों पर जीत मिली है वहीं कांग्रेस को 37 सीटों पर जीत मिली है। इससे पहले 2019 में 40 सीटें और 2014 में 47 सीटें बीजेपी ने जीती थीं। इस चुनाव में बीजेपी ने 22 नई सीटें जीतीं और 27 मौजूदा सीटें भी बचाने में कामयाब रही। इससे उलट कांग्रेस ने 19 नई सीटें तो जीतीं, लेकिन 50% पुरानी सीटों (15 सीट) को कायम नहीं रख सकी। इससे कांग्रेस को नई सीटें जीतने का कोई फायदा नहीं मिला।

सियासी पंडित हमेशा से राजनीतिक और सांस्कृतिक तौर पर हरियाणा को 7 इलाकों (जीटी रोड, बांगर, देशवाल, बागड़, अहीरवाल, दक्षिणी हरियाणा और मेवात) में बांटकर चुनावी विश्लेषण करते हैं। 2024 के चुनावी आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि इन 7 में से 5 इलाकों में बीजेपी ने 2019 के मुकाबले अपनी सीटों में इजाफा किया है। देशवाल और जीटी रोड इलाके में बीजेपी को सबसे ज्यादा लाभ मिला है। सिर्फ दक्षिणी हरियाणा में एक सीट घटी है, जबकि मेवात इलाके में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
खास बात यह रही कि हरियाणा में बीजेपी ने लगातार तीसरी बार ‘जाट वर्सेज नॉन-जाट’ के फॉर्मूले पर चुनाव लड़ी। साथ ही अपनी बेहतरीन चुनावी प्रबंधन के बूते बीजेपी ने जाटों के गढ़ में भी घुसपैठ कर ली। बीजेपी ने जो 22 नई सीटें जीतीं, इनमें 9 सीटें जाट बहुल बागड़ और देशवाल इलाके में जीती हैं। इसके अलावा पंजाबी और शहरी बहुल जीटी रोड इलाके को बीजेपी की कमजोर कड़ी मानी जा रही थी, लेकिन बीजेपी ने इन इलाकों में भी 7 नई सीटें जीती हैं।




