चंडीगढ़ : हरियाणा में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान खत्म हो चुका है। मतदान प्रतिशत (शाम 5 बजे तक 61%) का अंतिम आंकड़ा आने में भले ही देर लग रही हो, लेकिन एग्जिट पोल के आंकड़े ने इस बात का ऐलान कर दिया है कि हरियाणा में अबकी बार कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है।
भास्कर रिपोर्टर्स पोल की मानें तो हरियाणा में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनेगी और वह अपने बलबूते सरकार भी बना सकती है। लगातार दो बार से सरकार बना रही बीजेपी दूसरे नंबर की पार्टी जरूर बन जाएगी लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े 46 सीटों से काफी दूर रहेगी। बीजेपी-कांग्रेस के अलावा बाकी पार्टियों में इनेलो-बसपा गठबंधन, जजपा-असपा गठबंधन, आम आदमी पार्टी कोई बड़ा उलटफेर करते नजर नहीं आ रहे हैं।
तमाम एग्जिट पोल को मिलाकर देखा जाए तो यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं कि कांग्रेस को 55 सीटें आसानी से मिल सकती हैं। जाटलैंड और बांगर बेल्ट में कांग्रेस मजबूत दिख रही है। सीटों की संख्या के लिहाज से राज्य के 2 सबसे बड़े इलाकों बांगर बेल्ट और जीटी रोड एरिया में भी पार्टी 2019 के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन कर सकती है।
बीजेपी को अधिकतम 20 सीटें मिल सकती हैं। पार्टी को सबसे ज्यादा सीटें जीटी रोड बेल्ट और साउथ हरियाणा से मिलने की उम्मीद हैं। जाटलैंड वाले बांगर और देसवाल बेल्ट में बीजेपी की स्थिति अच्छी नजर नहीं आ रही है। तीसरे नंबर पर इनेलो-बसपा गठबंधन रह सकता है। इसे 2 से 3 सीटें मिल जाए तो बड़ी उपलब्धि होगी। हां, निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत का आंकड़ा 10 सीटों तक जा सकता है। पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला की पार्टी जजपा और आम आदमी पार्टी मुकाबले में नहीं दिख रही हैं।
गौर से देखें तो हरियाणा का चुनावी माहौल शुरुआती दौर से ही कांग्रेस के पक्ष में रहा है। एंटी इनकम्बेंसी, किसानों, युवाओं की नाराजगी और पहलवानों के आंदोलन की वजह से बीजेपी लगातार पिछड़ती नजर आई। बड़े नेताओं की बड़ी रैलियों के बाद थोड़ा मोमेंटम बना जरूर, लेकिन वक्त होने की वजह से उसका ज्यादा फायदा नहीं मिल पाया।
हालांकि अंतिम तौर पर तो आगामी 8 अक्टूबर को ही पता चलेगा कि बीजेपी यहां जीत की हैट्रिक लगाती है या 10 साल बाद कांग्रेस की सत्ता में वापसी होगी, लेकिन 22 से 25 प्रतिशत जाट और 21 प्रतिशत दलित आबादी लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस के पक्ष में एकजुट होकर मतदान किया होगा और बाकी कम्युनिटी के वोट बैंक में बिखराव हुआ तो कांग्रेस की स्थिति क्लीन स्वीप जैसी होगी। इस सूरत में कांग्रेस की सीटों का आंकड़ा 60 से ऊपर भी पहुंच सकता है।
इससे उलट अगर जाट-दलित वोटों में विभाजन हो गया हो और 7 से 8 प्रतिशत ब्राह्मण, 6 से 7 प्रतिशत वैश्य, 7 से 8 प्रतिशत पंजाबी और 30 से 32 प्रतिशत ओबीसी मतदाताओं को साधने में बीजेपी कामयाब हो जाती है तो उसकी सीटों का आंकड़ा भी 25 तक पहुंच सकता है। हालांकि यह संख्या बहुमत के जादुई आंकड़े 46 सीट से बहुत दूर है।




