राज्यसभा में 19 नए सदस्यों की एंट्री, टीएमसी की मेनका गुरुस्वामी ने रचा इतिहास

नई दिल्ली। संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में आज यानी सोमवार को एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घटनाक्रम देखने को मिला जब कुल 19 नवनिर्वाचित और पुनर्निर्वाचित सदस्यों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस शपथ ग्रहण समारोह में सबसे ज्यादा ध्यान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की ओर से आईं वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मेनका गुरुस्वामी पर रहा जिन्होंने शपथ लेते ही एक ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम करते हुए भारत की पहली LGBTQ सांसद बन गईं।

डॉ. मेनका गुरुस्वामी देश की जानी-मानी वकील हैं और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में धारा 377 को चुनौती देने वाले ऐतिहासिक मामले में अहम भूमिका निभाई थी। उनकी पहचान लंबे समय से LGBTQ+ समुदाय के अधिकारों की मजबूत आवाज के रूप में रही है। ऐसे में उनका संसद पहुंचना न सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह सामाजिक प्रतिनिधित्व के विस्तार का भी संकेत देता है।

राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन की मौजूदगी में शपथ ग्रहण समारोह संपन्न हुआ, जहां सभी 19 सदस्यों ने अलग-अलग भाषाओं में शपथ ली। इस दौरान भारत की भाषाई विविधता भी स्पष्ट रूप से देखने को मिली। तमिल, बंगाली, मराठी, ओडिया, हिंदी और अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में सदस्यों ने शपथ ली, जो देश की सांस्कृतिक बहुलता को दर्शाता है।

इस मौके पर कई प्रमुख नेताओं ने भी शपथ ली, जिनमें रामदास अठावले, शरद पवार, बाबुल सुप्रियो, एम. थंबीदुरई और तिरुचि शिवा जैसे नाम शामिल रहे। अलग-अलग राज्यों से आए इन सदस्यों ने उच्च सदन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और आने वाले समय में संसद की कार्यवाही में भाग लेने का संकल्प लिया।

शपथ लेने वाले प्रमुख सदस्यों में शामिल रहे

महाराष्ट्र से माया चिंतामन इवनाते (बीजेपी), रामराव सखाराम वडकुटे (बीजेपी), शरद पवार (एनसीपी-एसपी), ज्योति नागनाथ वाघमारे (शिवसेना) और रामदास अठावले (आरपीआई-ए)

तमिलनाडु से कॉन्स्टेंटाइन रविंद्रन (डीएमके), तिरुचि शिवा (डीएमके), क्रिस्टोफर मैनिकम (कांग्रेस), एम. थंबीदुरई (एआईएडीएमके), एल.के.सुधीश (डीएमडीके) और अंबुमणि रामदास (पीएमके)

पश्चिम बंगाल से बाबुल सुप्रियो (टीएमसी), रुक्मिणी मलिक (टीएमसी), डॉ. मेनका गुरुस्वामी (टीएमसी), राजीव कुमार (टीएमसी) और बिस्वजीत सिन्हा (बीजेपी)

ओडिशा से संतृप्त मिश्रा (बीजेडी), मनमोहन सामल (बीजेपी) और दिलीप कुमार रे (निर्दलीय)

राजनीतिक दृष्टि से भी यह शपथ ग्रहण समारोह अहम माना जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस द्वारा मेनका गुरुस्वामी जैसे गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि के लेकिन प्रतिष्ठित चेहरे को राज्यसभा भेजना यह दर्शाता है कि पार्टी विविधता और विशेषज्ञता को महत्व दे रही है। वहीं, गुरुस्वामी जैसी संवैधानिक विशेषज्ञ के संसद में आने से यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि उच्च सदन में कानूनी और संवैधानिक मुद्दों पर चर्चा और अधिक गहराई से हो सकेगी।

मालूम हो कि पिछले महीने 16 मार्च को 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हुए थे। 18 सांसदों का शपथ लेना अभी बाकी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के तौर पर शपथ लेंगे।

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सत्ता विमर्श डेस्क
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