दिल्ली में भी अब डबल इंजन की सरकार : पहली बार की MLA रेखा गुप्ता बनीं दिल्ली की नई मुख्यमंत्री

नई दिल्ली। दिल्ली के शालीमार बाग सीट से पहली बार विधायक बनी रेखा गुप्ता ने गुरुवार 20 फरवरी 2025 को दिल्ली के रामलीला मैदान में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही रेखा दिल्ली की 9वीं और महिलाओं की सूची में चौथी सीएम बन गई हैं और दिल्ली में भी डबल इंजन की सरकार। रेखा गुप्ता से पहले सुषमा स्वराज, शीला दीक्षित और आतिशी महिला मुख्यमंत्री रहीं हैं।

शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अलावा बीजेपी शासित 21 राज्यों के सीएम, डिप्टी सीएम भी मौजूद रहे। आप नेता अरविंद केजरीवाल और आतिशी शपथ में नहीं पहुंचे। नई दिल्ली सीट से अरविंद केजरीवाल को हराकर विधायक बने प्रवेश वर्मा समेत 6 मंत्रियों ने भी शपथ ली। इनमें आशीष सूद, मनजिंदर सिंह सिरसा, रविंद्र इंद्राज सिंह, कपिल मिश्रा और पंकज कुमार सिंह शामिल हैं।

सीएम समेत मंत्रियों के विभागों का बंटवारा
शपथ ग्रहण के चार घंटे बाद मंत्रियों के विभागों का बंटवारा भी कर दिया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के पास गृह, वित्त, सर्विसेज, विजिलेंस और प्लानिंग का जिम्मा है। डिप्टी सीएम प्रवेश वर्मा को शिक्षा, परिवहन और पीडब्ल्यूडी की जिम्मेदारी दी गई है। मनजिंदर सिंह सिरसा को हेल्थ, शहरी विकास और उद्योग का जिम्मा सौंपा गया है। रवींद्र कुमार इंद्राज को श्रम, समाज कल्याण और एससी-एसटी विभाग का कार्य सौंपा गया है। कपिल मिश्रा को जल, पर्यटन और संस्कृति, पंकज कुमार को विधि, विधायी कार्य और आवास तथा आशीष सूद को राजस्व, पर्यावरण तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।

शपथ ग्रहण से पहले रेखा गुप्ता ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘यह बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। मुझ पर भरोसा जताने के लिए मैं पीएम मोदी और पार्टी हाईकमान का शुक्रिया अदा करती हूं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं दिल्ली की मुख्यमंत्री बनूंगी। मैं शीशमहल में नहीं रहूंगी।’ मालूम हो कि दिल्ली के मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास को भाजपा ने शीशमहल नाम दिया था। अरविंद केजरीवाल ने इसे बनवाया था। भाजपा का आरोप है कि केजरीवाल ने इसे बनवाने में नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों रुपए खर्च किए थे। भाजपा ने इसे चुनावी मुद्दा भी बनाया था।

कौन हैं दिल्ली की नई मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता?
हरियाणा के जींद के जुलाना हल्का स्थित नंदगढ़ गांव की रहने वाली रेखा गुप्ता के दादा आढ़ती और पिता बैंक मैनेजर रहे हैं। रेखा स्टूडेंट लाइफ से ही पॉलिटिक्स में आ गई थीं। वह कॉलेज के समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़ी हैं। माना जा रहा है कि इसी वजह से आरएसएस ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे भाजपा हाईकमान ने मान लिया। रेखा के दादा मनीराम और परिवार के लोग हरियाणा के जुलाना में रहते थे। 19 जुलाई 1974 को जन्मीं रेखा ने इस गांव में बचपन के 2 साल गुजारे। उनके पिता जयभगवान 1972-73 में बैंक ऑफ इंडिया में मैनेजर बने। उन्हें दिल्ली में ड्यूटी मिली। 1976 में परिवार दिल्ली शिफ्ट हो गया।

रेखा की स्कूली पढ़ाई दिल्ली में ही हुई। उन्होंने दिल्ली के ही दौलत राम कॉलेज से बीकॉम किया। इसके बाद एलएलबी की पढ़ाई भी की। उन्होंने कुछ समय तक वकालत भी की। रेखा स्टूडेंट लाइफ से ही पॉलिटिक्स में आ गई थीं। वह कॉलेज टाइम से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गई थी। इसके बाद वह दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (DUSU) की सचिव रहीं। इसके बाद भाजपा में वह काफी अहम पदों पर रहीं। रेखा ने पहले भी 2 बार विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गई थीं। अब वह पहली बार विधायक बनीं और फिर मुख्यमंत्री बन गईं। रेखा ने 1998 में मनीष गुप्ता के साथ शादी की थी। वे बिजनेसमैन हैं। परिवार में एक बेटा निकुंज और बेटी हर्षिता हैं।

रेखा गुप्ता का राजनीतिक करियर
1994-95 : दिल्ली के दौलत राम कॉलेज में स्टूडेंट विंग की सचिव।
1995-96 : दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (DUSU) की सचिव नियुक्त।
1996-97 : दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (DUSU) की अध्यक्ष।
2003-04 : भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा दिल्ली की सचिव।
2004-06 : भाजपा युवा मोर्चा की राष्ट्रीय सचिव।
2007 : दिल्ली के उत्तरी पीतमपुरा से पार्षद, भाजपा महिला मोर्चा की राज्य महासचिव।
2007-09 : महिला कल्याण एवं बाल विकास समिति MCD अध्यक्ष का पद संभाला।
2009 : दिल्ली में राज्य महिला मोर्चा भाजपा की महासचिव।
2010 : भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य।
2012 : उत्तरी पीतमपुरा वार्ड से दूसरी बार पार्षद।
2015 : शालीमार बाग विधानसभा से 11 हजार वोटों से हारीं।
2020 : शालीमार बाग विधानसभा से साढ़े चार हजार वोटों से हारीं।
2022 : शालीमार बाग-बी वार्ड से पार्षद चुनी गईं।
2025 : शालीमार बाग विधानसभा से चुनाव लड़ीं और जीतीं।

रेखा के नाम कुल ₹5.3 करोड़ की संपत्ति
चुनावी हलफनामे के मुताबिक, रेखा गुप्ता की कुल संपत्ति ₹5.3 करोड़ की है। जिसमें देनदारियां ₹1.2 करोड़ और 1 लाख 48 हजार कैश है। बैंक अकाउंट में ₹72.94 लाख डिपॉजिट है। रेखा ने कई कंपनियों के शेयर भी ले रखे हैं, जो ₹9.29 लाख से के हैं। इनके पास LIC में ₹53 लाख का इंवेस्टमेंट हैं। रेखा गुप्‍ता के नाम पर कोई कार नहीं है। उनके पति मनीष गुप्ता के नाम पर मारुति की XL6 कार है। रेखा के पास 225 ग्राम की गोल्ड ज्‍वैलरी है, जिसकी कीमत 18 लाख रुपए है। रेखा के पास कुल 2 करोड़ 72 लाख की चल संपत्ति है। अचल संपत्तियों में रोहिणी और शालीमार इलाके में एक-एक घर है। रोहिणी दिल्‍ली में इनके पति के नाम पर भी एक घर है। इन घरों की कुल कीमत 2 करोड़ 60 लाख रुपए है।

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प्रवीण कुमार
मैं कौन हूं, क्या हूं, क्यों हूं, यह सब खुद मुझे भी नहीं पता क्यों कि खुद के बारे में बताना, जताना या उकेरना सबसे मुश्किल काम होता है। हां! बुद्ध, गांधी, विवेकानंद और गीता के दर्शन से मैंने अपने जीवन को संवारने की कोशिश जरूर की है। बिहार के बेगूसराय जिले का रहने वाला हूं। जाने-अनजाने में पत्रकारिता के आंगन में ढाई दशक से अधिक वक्त से कूद-फांद कर रहा हूं। शुरूआती दौर में जी भरकर देश के तमाम राष्ट्रीय और क्षेत्रीय अखबारों और पत्रिकाओं में वैचारिक लेखन किया। सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विषयों पर लिखने में अपनी रूचि रहती है। फिलहाल भारत सरकार से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर लेखन कर रहा हूं। डिजिटल और सोशल मीडिया कंसल्टेंट के तौर भी हाथ साफ करता रहता हूं। 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान फेक न्यूज़ की बयार को गहराई से जांचा परखा था। उससे पहले नोएडा स्थित ज़ी न्यूज़ में हिन्दी वेबसाइट की शुरूआत कर काफी लंबा वक्त गुजारा। इससे भी पीछे का पूछेंगे तो करीब डेढ़ दशक तक दैनिक हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, अमर उजाला, दैनिक भास्कर समेत कई राष्ट्रीय व क्षेत्रीय अखबारों के संपादकीय विभाग में अलग-अलग भूमिकाओं को निभाते हुए एक पत्रकार के तौर पर अपनी पहचान बनाने की कोशिश की, एक बेहतर इंसान भी बनने की कोशिश की, पर कितना बन पाया ये सब ''ऊपर वाले पर'' छोड़ता हूं...

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