नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का मंगलवार को लंबी बीमारी के बाद दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में निधन हो गया। 79 साल की उम्र में उन्होंने आज (5 अगस्त 2025) दोपहर 1:12 बजे अंतिम सांस ली। वह लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे।
11 मई 2025 को हालत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वे जम्मू-कश्मीर, बिहार, गोवा और मेघालय के राज्यपाल रहे। 2018 में ओडिशा के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। सबसे खास बात यह है कि 23 अगस्त 2018 से 30 अक्टूबर 2019 तक मलिक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे और इसी दौरान आज ही के दिन 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाया गया था।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और जम्मू कश्मीर के सर्वाधिक चर्चित राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक पिछले कुछ वर्षों से काफी चर्चा और विवादों में रहे। कभी मोदी सरकार के वह इतने भरोसेमंद थे कि उन्हें न सिर्फ बिहार, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, गोवा और मेघालय का राज्यपाल बनाया गया, बल्कि जनसंघ के जमाने से भाजपा का प्रमुख राजनीतिक वैचारिक एजेंडा रहे जम्मू-कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने में मलिक ही वाहक बने थे। यह भी अजीब संयोग ही रहा कि अपने लंबे राजनीतिक जीवन में अनुच्छेद 370 हटाने के धुर विरोधी रहे सत्यपाल मलिक बतौर जम्मू कश्मीर राज्यपाल की सिफारिश से 6 साल पहले आज के ही दिन (5 अगस्त 2019) उसे हटाया गया।
सत्यपाल मलिक समाजवादी लोकदल की वैचारिक पृष्टिभूमि के छात्रों-युवाओं में बेहद लोकप्रिय नेता थे। 1967 में मेरठ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे सत्यपाल मलिक समाजवादी आंदोलन का प्रमुख युवा चेहरा थे। फिर वह चौधरी चरण सिंह के प्रिय शिष्य बने और 1974 में पहली बार बागपत क्षेत्र से उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए। तब वह देश प्रदेश के सबसे युवा विधायक थे।
सत्यपाल मलिक को एक समय चरण सिंह के राजनीतिक वारिस के रूप में देखा जाता था। आपातकाल में जेल में रहने के बावजूद मलिक बाद में कांग्रेस में शामिल हो गये। 1977 में बनी जनता पार्टी के टूटने के बाद इंदिरा गांधी और चरण सिंह की राजनीतिक दोस्ती करवाने वालों में मलिक की भी प्रमुख भूमिका थी।
सत्यपाल मलिक 1990 में वीपी सिंह सरकार में मंत्री बने। कांग्रेस में वह अरुण नेहरू के काफी करीब थे और उनके साथ ही उन्होंने कांग्रेस छोड़ी। वह देवीलाल, मुलायम सिंह यादव, अजित सिंह के साथ भी रहे, लेकिन बाद में भाजपा में चले गए। हालांकि भाजपा में वह हमेशा असहज ही दिखे। भाजपा की किसान राजनीति को लेकर हमेशा उनके मन में टीस रही जिसे वो अक्सर व्यक्त करते रहते थे। बागपत जिले में 24 जुलाई 1946 को गांव हिसवाड़ा से शुरू हुई सत्यपाल मलिक की जीवन यात्रा आज नई दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में खत्म हो गई।
मलिक ने 2021 में किया था भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा
सत्यपाल मलिक ने 17 अक्टूबर 2021 को राजस्थान के झुंझुनूं में एक कार्यक्रम में कहा था कि उन्हें जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल रहते करोड़ों की रिश्वत ऑफर हुई थी। उस दौरान उनके पास दो फाइलें आई थीं। इनमें एक बड़े उद्योगपति और दूसरी महबूबा मुफ्ती और भाजपा की गठबंधन सरकार में मंत्री रहे एक व्यक्ति की थी।
बकौल मलिक, उनके सचिवों ने बताया कि इसमें घोटाला है। इसके बाद उन्होंने दोनों डील रद्द कर दी थीं। उन्हें दोनों फाइलों के लिए 150-150 करोड़ रुपए देने का ऑफर दिया गया था। मलिक ने कहा, ‘मैंने कहा था कि मैं पांच कुर्ता-पायजामे के साथ आया हूं और सिर्फ उसी के साथ यहां से चला जाऊंगा। जब CBI पूछेगी तो मैं ऑफर देने वालों के नाम भी बता दूंगा।’
CBI ने इस मामले में 2 FIR दर्ज की थीं। पहली FIR लगभग 60 करोड़ रुपए के कॉन्ट्रैक्ट को जारी करने में कथित भ्रष्टाचार से संबंधित है। यह रकम 2017-18 में जम्मू-कश्मीर कर्मचारी स्वास्थ्य देखभाल बीमा योजना का ठेका देने के लिए एक इंश्योरेंस कंपनी से रिश्वत के तौर पर ली गई थी। दूसरी FIR 2019 में एक निजी फर्म को कीरू हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट (एचईपी) के सिविल वर्क के लिए 2,200 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट देने में भ्रष्टाचार से जुड़ी है। CBI इन दोनों मामलों की जांच कर रही है।
सत्यपाल मलिक पर भी लगा था भ्रष्टाचार का आरोप
CBI ने 22 मई 2025 को सत्यपाल मलिक समेत 5 लोगों के खिलाफ जम्मू-कश्मीर के किरू हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में चार्जशीट भी दाखिल की थी। इसमें करीब 2,200 करोड़ रुपए के सिविल वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट में गड़बड़ी का आरोप है। CBI ने इसी मामले को लेकर 22 फरवरी 2024 को सत्यपाल मलिक के ठिकाने पर छापा मारा था। साथ ही दिल्ली में 29 अन्य ठिकानों पर भी छापे की कार्रवाई की गई थी। हालांकि सत्यपाल मलिक ने ऐसे किसी भी गलत काम से इनकार किया था और छापेमारी की आलोचना करते हुए कहा था कि यह उन्हें डराने का प्रयास है।
मोदी सत्ता के खिलाफ मलिक के बड़े बयान
2 नवंबर 2021- पुलवामा हमले के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिम कार्बेट नेशनल पार्क में अपनी शूटिंग करवा रहे थे। बाहर आकर पीएम ने एक ढाबे से फोन कर पूछा- क्या हुआ? हमने कहा- ये हमारी गलती से हुआ। तो पीएम मोदी ने हमें चुप रहने की सलाह दी थी।
25 अप्रैल 2023- देश बहुत गलत आदमी के हाथ में है। यदि किसान एक नहीं हुआ और केंद्र में बैठी सरकार दोबारा सत्ता में आई तो किसान बचेंगे नहीं। वे सबसे पहले खेती खत्म कर देंगे ताकि आप मजदूरी करने लगो। उसके बाद फौज को खत्म कर देंगे।
21 मई 2023- अगर अगले चुनाव तक जनता ने इनके खिलाफ मतदान नहीं किया तो ये आपको मतदान करने लायक ही नहीं छोड़ेंगे। ये कह देंगे कि जब हम ही चुनाव जीतते हैं तो चुनाव कराने की जरूरत क्या है। न कोर्ट रहेंगे न फोर्स रहेगी, न फौज रहेगी और न कोई ऐसा सिस्टम रहेगा जिससे इन पर कंट्रोल किया जा सके।
22 मई 2023- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी नाक के नीचे भ्रष्टाचार करवाते हैं। उसमें इनकी हिस्सेदारी होती और पूरी रकम अडाणी को जाती है।
6 मई 2025- पहलगाम की असफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश से माफी मांगनी चाहिए। अभी तक उन्होंने इसकी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है।




