नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने देश के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में वरिष्ठ नौकरशाह ज्ञानेश कुमार के नाम पर मुहर लगा दी है। पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल थे। इसी पैनल की सिफारिश पर नए मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति हुई। खबरी लाल के अनुसार, नए मुख्य चुनाव आयुक्त के लिए पांच नामों की सूची दी गई थी। लेकिन राहुल गांधी ने इन नामों पर विचार करने से इनकार कर दिया था। बैठक के बाद राहुल गांधी ने जो डिसेंट नोट जारी किया उसमें उन्होंने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है इसलिए यह बैठक नहीं होनी चाहिए थी।
देश के नए सीईसी ज्ञानेश कुमार के कंधों पर इस साल बिहार का विधानसभा चुनाव और अगले साल पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु का चुनाव संपन्न कराने की जिम्मेदारी होगी। ज्ञानेश नए कानून के तहत नियुक्त होने वाले पहले सीईसी हैं। उनका कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक रहेगा। मौजूदा सीईसी राजीव कुमार के 18 फरवरी को रिटायरमेंट के बाद वह पदभार ग्रहण करेंगे। इसी बैठक में विवेक जोशी को चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया है। वह हरियाणा के मुख्य सचिव और 1989 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू अपने पद पर बने रहेंगे।
कौन हैं नए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार?
1988 बैच के केरल कैडर के आईएएस ज्ञानेश कुमार 27 जनवरी 1964 की पैदाईश हैं। आईआईटी कानपुर से बीटेक की शिक्षा प्राप्त करने वाले ज्ञानेश केरल एससी-एसटी डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मूल निवासी और चिकित्सक परिवार से ताल्लुक रखने वाले ज्ञानेश ने इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट्स ऑफ इंडिया से बिजनेस फाइनेंस की भी पढ़ाई की है। इसके अलावा, उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पर्यावरण अर्थशास्त्र का भी अध्ययन किया है। मूलत: आगरा के रहने वाले कुमार ने 10वीं और 12वीं की परीक्षा यूपी बोर्ड से पास की है। चुनाव आयुक्त बनने से पहले वह गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर थे। यूपीए सरकार में ज्ञानेश कुमार रक्षा मंत्रालय में तैनात थे। 61 वर्षीय ज्ञानेश कुमार अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को खत्म करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने वाले विधेयक का मसौदा तैयार करने में भी शामिल रहे हैं। उस वक्त वह गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव (कश्मीर संभाग) थे। उन्होंने तीन तलाक को खत्म करने से जुड़ी मसौदा समिति में भी अहम भूमिका निभाई है। इसके एक साल बाद गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर रहते हुए कुमार ने अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान संबंधित दस्तावेजों को संभालने की जिम्मेदारी निभाई थी। खबरी लाल के मुताबिक, ज्ञानेश कुमार गृह मंत्री अमित शाह के करीबी माने जाते हैं। वह पिछले साल जनवरी में सहकारिता मंत्रालय के सचिव के रूप में कार्य करते हुए रिटायर हुए थे। इस मंत्रालय को भी अमित शाह ही संभाल रहे हैं। इससे पहले ज्ञानेश कुमार ने संसदीय कार्य मंत्रालय में भी सचिव के रूप में भी काम किया है।
कांग्रेस पार्टी ने नियुक्ति पर जताई आपत्ति
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर मुख्य चुनाव आयोग की नियुक्ति पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सीईसी चयन समिति सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन है। सीईसी के चयन के लिए गठित समिति से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को हटाकर मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि वह चुनाव आयोग की विश्वसनीयता नहीं, बल्कि इस संवैधानिक संस्था पर अपना नियंत्रण चाहती है। सिंघवी ने कहा कि सीईसी और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए बने नए कानून पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका लंबित है। इस मामले में बुधवार 19 फरवरी 2025 को सुनवाई होनी है। यह सिर्फ 48 घंटे का मामला था। होना तो ये चाहिए था कि मोदी सरकार याचिका की शीघ्र सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाती।




