नई दिल्ली। बजट सत्र-2025 के पहले चरण के आखिरी दिन गुरुवार को संसद में वक्फ संशोधित बिल पर जेपीसी रिपोर्ट पेश करने को लेकर खूब हंगामा हुआ। राज्यसभा में जहां बीजेपी सांसद मेधा विश्राम कुलकर्णी ने और लोकसभा में जेपीसी चेयरमैन जगदंबिका पाल ने इस रिपोर्ट को पेश किया।
जेपीसी की इस रिपोर्ट को लेकर दोनों सदनों में विपक्ष ने आपत्ति जताई। विपक्ष का आरोप है कि जेपीसी रिपोर्ट में उनकी असहमतियों को डिलीट कर दिया गया। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, ‘आपने जो सलाह दी, हम उसे मानते हैं। यही तरीका उधर वाले मान लें तो सही है। हमारा एक ही विषय है। जेपीसी की जो रिपोर्ट है उसमें कई सदस्यों ने आपत्ति जताई है। उनके डिसेंट नोट को बाहर निकालना गलत है। संसदीय प्रक्रिया में ऐसा नहीं चलता है। हमारे लिए ये रिपोर्ट फर्जी है। यह असंवैधानिक है। इस रिपोर्ट को फिर से पेश कीजिए।’
आप सांसद संजय सिंह ने कहा, ‘हमने अपना पक्ष रखा। इससे सहमत या असहमत हो सकते हैं, लेकिन कूड़ेदान में कैसे डाल सकते हैं। आज वक्फ की संपत्ति पर कब्जा कर रहे हैं। कल गुरुद्वारे की करेंगे, फिर मंदिर की करेंगे।’ समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा- विपक्षी सदस्यों द्वारा दिए गए असहमति नोट को वक्फ संशोधन विधेयक में शामिल नहीं किया गया है। सरकार मनमाने तरीके से यह बिल ला रही है। वे ध्यान भटकाने के लिए सत्र के आखिरी दिन रिपोर्ट लेकर आए हैं।
इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, ‘विपक्ष के कुछ सदस्यों ने आपत्ति जताई थी कि उनकी राय को इसमें नहीं जोड़ा गया। मैं कहना चाहता हूं कि विपक्ष के सदस्य संसदीय कार्य प्रणाली के तहत जो कुछ भी जोड़ना चाहते हैं, वो जोड़ सकते हैं। उनकी पार्टी को इसमें कोई भी आपत्ति नहीं है।’
हंगामा बढ़ने के बाद वक्फ संशोधन विधेयक पर जेपीसी की रिपोर्ट पर चर्चा के बीच विपक्ष ने राज्यसभा से वॉकआउट किया। इसपर भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद जेपी नड्डा ने कहा कि विपक्ष का मकसद चर्चा करना नहीं, अपने पॉइंट रखना था। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि कुछ भी डिलीट नहीं किया गया। हालांकि जेपीसी अध्यक्ष को डिलीट करने का अधिकार है। ये तुष्टिकरण की राजनीति है। कुछ लोग देश को तोड़ने की साजिश कर रहे हैं। कुछ लोग देश के खिलाफ लड़ रहे हैं। कुछ लोग देश को तोड़ने का काम कर रहे हैं। कांग्रेस और कुछ पार्टियां उनका समर्थन करती हैं।
अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा- जेपीसी रिपोर्ट जब टेबल हुआ, कुछ सदस्यों ने कहा कि इसमें कुछ हिस्सा हटाया गया। मैं बाहर गया और जेपीसी चेयरमैन सर से बात की। उनसे कंफर्म किया, नियम के मुताबिक, जेपीसी रिपोर्ट को बिना कुछ काट-छांट के टेबल किया गया। तो आज ये हंगामा क्यों कर रहे हैं। ये किस आधार पर आरोप लगा रहे हैं।
जेपीसी रिपोर्ट पर कहां से और कैसे उठा सवाल
कर्नाटक से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सैयद नसीर हुसैन ने 2 फरवरी 2025 को सोशल मीडिया X पर अपना असहमति नोट और फाइनल रिपोर्ट के कुछ पेज शेयर किए थे। उन्होंने लिखा- वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर जेपीसी के सदस्य के रूप में मैंने विधेयक का विरोध करते हुए एक असहमति नोट प्रस्तुत किया था। चौंकाने वाली बात यह है कि मेरे असहमति नोट के कुछ हिस्सों को मेरी जानकारी के बिना एडिट किया गया है। जेपीसी पहले ही तमाशा बनकर रह गई थी, लेकिन अब वे और भी नीचे गिर गए हैं।




