नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह (IIT Delhi Convocation) को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने स्नातक छात्रों को उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई देते हुए कहा कि IIT की डिग्री केवल शैक्षणिक सफलता या बेहतर नौकरी का प्रमाण नहीं है, बल्कि यह कठिन से कठिन समस्याओं को हल करने की क्षमता का वैश्विक प्रमाण है।
प्रधानमंत्री ने कोविड महामारी के दौरान IIT दिल्ली के दीक्षांत समारोह में अपनी वर्चुअल उपस्थिति को याद किया और कहा कि आज छात्रों के बीच व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना उनके लिए विशेष अनुभव है। उन्होंने कहा कि छात्रों की यह यात्रा ओरिएंटेशन से लेकर दीक्षांत समारोह तक कई सपनों, चुनौतियों और अनुभवों से भरी रही है।
Delighted to join the Convocation Ceremony of IIT Delhi. My best wishes to all the graduating students.@iitdelhi https://t.co/Lhuq4yUzJW
— Narendra Modi (@narendramodi) August 8, 2026
डिग्री के साथ देश के प्रति जिम्मेदारी भी
PM मोदी ने छात्रों और उनके अभिभावकों को बधाई देते हुए कहा कि आज प्राप्त डिग्रियां केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं हैं, बल्कि इनके साथ राष्ट्र के प्रति योगदान की जिम्मेदारी भी जुड़ी है। उन्होंने पदक विजेताओं की विशेष सराहना की और IIT दिल्ली में शुरू की गई नई AI पहलों की भी प्रशंसा की।
प्रधानमंत्री ने छात्रों को अपने संस्थान से जुड़ी यादों को संजोकर रखने की सलाह दी। उन्होंने कैंपस के विभिन्न छात्रावासों के बीच की मित्रतापूर्ण प्रतिद्वंद्विता और जिया सराय के पोहा तथा सतपुरा मेस के पराठों जैसी यादों का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य में बड़ी जिम्मेदारियों के बीच यही यादें उन्हें ऊर्जा देंगी।
उन्होंने छात्रों से अपने सहपाठियों, प्रोफेसरों, मार्गदर्शकों और संस्थान के सहयोगी कर्मचारियों के प्रति कृतज्ञ रहने का भी आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये लोग जीवनभर की संपत्ति हैं और भविष्य की हर सफलता में उनकी भूमिका को याद किया जाएगा।
“जो लगातार सीखता रहेगा, वही विजयी होगा”
बदलते वैश्विक और भू-राजनीतिक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीकी प्रगति दुनिया में हो रहे तेज बदलावों की प्रमुख शक्ति बन गई है। उन्होंने छात्रों से कहा कि यह दौर जहां बड़ी चुनौतियां लेकर आया है, वहीं नए अवसरों की संभावनाएं भी पैदा कर रहा है।
उन्होंने छात्रों को संदेश दिया कि लगातार सीखते रहना भविष्य की सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। प्रधानमंत्री ने कहा, “जो निरंतर सीखता रहता है, वही विजयी होगा।”
Those who learn, win! pic.twitter.com/lWCEzFLeNL
— PMO India (@PMOIndia) August 8, 2026
IIT की डिग्री कठिन समस्याओं को हल करने की क्षमता का प्रमाण
प्रधानमंत्री ने IIT की डिग्री के महत्व को केवल अच्छे CGPA या आकर्षक नौकरी के पैकेज से जोड़कर देखने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि IIT की शिक्षा छात्रों को जटिल समस्याओं को समझने और उनके समाधान खोजने की क्षमता देती है।
उन्होंने कहा कि जीवन की चुनौतियों को भी उसी तरह छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर हल करने की कोशिश करनी चाहिए, जैसे छात्र जटिल प्रयोगशाला सिमुलेशन और शैक्षणिक समस्याओं को हल करते हैं।
PM मोदी ने कहा कि विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में प्रश्न पहले से तय होते हैं, लेकिन वास्तविक जीवन में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न अक्सर पाठ्यक्रम से बाहर होते हैं। सफलता केवल दिए गए प्रश्नों के उत्तर खोजने में नहीं, बल्कि उन समस्याओं को पहचानने में है जिन्हें समाज ने लंबे समय से समस्या मानना ही छोड़ दिया है।
अगले तीन दशकों के विकास से जोड़ें अपने करियर को
प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता आंदोलन की पीढ़ी का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में देश की आजादी एक साझा राष्ट्रीय लक्ष्य था, जिसके लिए लोगों ने असाधारण त्याग और तपस्या की।
उन्होंने वर्तमान पीढ़ी से अगले तीन दशकों में भारत के विकास लक्ष्यों के साथ अपने करियर और व्यक्तिगत आकांक्षाओं को जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं के हर निर्णय में यह विचार होना चाहिए कि उससे देश को क्या लाभ होगा और कौन-सी राष्ट्रीय आवश्यकता पूरी होगी।
युवा शक्ति ही विकसित भारत की आधारशिला
प्रधानमंत्री ने कहा कि आर्थिक, तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता के लिए देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस यात्रा में युवा शक्ति की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने कई ऐसे क्षेत्रों को युवाओं और निजी नवप्रवर्तकों के लिए खोला है, जो पहले सीमित या प्रतिबंधित थे। प्रधानमंत्री ने कहा, “देश के युवा जितने अधिक सशक्त होंगे, पूरा देश उतना ही अधिक सशक्त होगा।”
अंतरिक्ष से सेमीकंडक्टर तक नए अवसर
PM मोदी ने अंतरिक्ष क्षेत्र में हुए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों के बाद आज देश के युवा स्वयं रॉकेट डिजाइन और लॉन्च कर रहे हैं। कभी यह क्षमता दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों तक सीमित थी, लेकिन अब भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र हजारों युवाओं के लिए नए अवसरों का क्षेत्र बन चुका है।
उन्होंने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में शुरुआती सेमीकंडक्टर उत्पादन इकाइयां काम करना शुरू कर चुकी हैं और इससे भारत में आत्मविश्वास बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में देश का कोई युवा गर्व से कह सकेगा कि वह भारत में चिप बनाने वाली अपनी पीढ़ी का पहला व्यक्ति है।
ड्रोन और स्टार्टअप क्रांति से बदल रही अर्थव्यवस्था
प्रधानमंत्री ने ड्रोन क्षेत्र में युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं और रक्षा सहित कई क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक नए बदलाव ला रही है। युवा नवप्रवर्तक इस क्षेत्र में नई संभावनाओं को आकार दे रहे हैं।
उन्होंने भारत की स्टार्टअप क्रांति का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यूनिकॉर्न कंपनियों, डिजिटल भुगतान और फिनटेक के विस्तार ने लाखों युवाओं के लिए उद्यमिता के नए अवसर पैदा किए हैं।
उनके अनुसार, इन तकनीकी और आर्थिक बदलावों ने युवाओं को पहली बार बड़े पैमाने पर कुछ नया करने और अपने विचारों को व्यवसाय में बदलने का अवसर दिया है।
AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और डीप-सी रिसर्च में अवसर
भविष्य के तकनीकी क्षेत्रों की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, महत्वपूर्ण खनिज, गहरे समुद्र की खोज, क्वांटम कंप्यूटिंग और ऊर्जा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि इन उभरते क्षेत्रों में युवाओं की प्रतिभा, नवाचार और नेतृत्व की बड़ी आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने छात्रों से इन क्षेत्रों में नए विचारों और अनुसंधान के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
रिसर्च पर सरकार का बढ़ता फोकस
प्रधानमंत्री ने भारत में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप और राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन जैसी पहलों को रेखांकित किया।
उन्होंने बताया कि अनुसंधान के लिए एक लाख करोड़ रुपये तक के फंडिंग लक्ष्य का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को नए और मौलिक अनुसंधान की आवश्यकता है और सरकार का ध्यान इस दिशा में लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने ‘एक राष्ट्र, एक सदस्यता’ (One Nation One Subscription) पहल का भी उल्लेख किया। इसके माध्यम से देशभर के शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं तक पहुंच उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि शोध के संसाधन बड़े शहरों तक सीमित न रहें।
“जिंदगी कोई लीडरबोर्ड नहीं है”
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया के दौर में युवाओं पर बढ़ते तुलना के दबाव को लेकर भी महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपने वेतन, नौकरी या स्टार्टअप की सफलता की तुलना अपने साथियों से न करें।
उन्होंने युवाओं को मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने तथा लगातार आत्म-सुधार पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। प्रधानमंत्री ने कहा, “याद रखें, जीवन कोई लीडरबोर्ड नहीं है; आपकी असली दौड़ किसी और से नहीं, बल्कि खुद से है।”
छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी स्नातक छात्रों, उनके अभिभावकों, शिक्षकों, प्रोफेसरों, मार्गदर्शकों और संस्थान के सहयोगी कर्मचारियों को बधाई दी।
उन्होंने छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे निरंतर सीखते रहें, साहस के साथ नई चुनौतियों का सामना करें और जीवन में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करें।
प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट था कि IIT दिल्ली से निकलने वाली यह युवा प्रतिभा केवल अपने व्यक्तिगत करियर को आगे बढ़ाने तक सीमित न रहे, बल्कि भारत की विकास यात्रा, आत्मनिर्भरता और विकसित भारत के संकल्प में सक्रिय भागीदार बने।




