डोनाल्ड ट्रम्प की ईरान को चेतावनी; गलती की तो फिर करेंगे हमला

वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने कोई भी “गलती” की तो उस पर दोबारा सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता और प्रस्तावों का आदान-प्रदान जारी है।

फ्लोरिडा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका फिलहाल “मजबूत स्थिति” में है, जबकि तेहरान (Tehran) दबाव में है और समझौते की कोशिश कर रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि वॉशिंगटन किसी भी संभावित खतरे के प्रति सतर्क है और जरूरत पड़ने पर बड़ी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।

इस बीच, ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक पोस्ट में खुलासा किया कि ईरान की ओर से 14 बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव सामने आया है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान (Pakistan) की मध्यस्थता के जरिए मिला है। हालांकि, इस प्रस्ताव का विस्तृत ड्राफ्ट आना अभी बाकी है और अमेरिका इसकी समीक्षा कर रहा है।

ट्रम्प ने प्रस्ताव को लेकर संदेह जताते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह अमेरिकी हितों के अनुरूप होगा। उन्होंने ईरान की पिछले दशकों की नीतियों पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “पिछले 47 वर्षों में ईरान ने जो किया है, उसकी अभी तक पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई गई है।” उनका यह बयान दर्शाता है कि अमेरिका फिलहाल किसी नरम रुख के बजाय दबाव की रणनीति पर कायम है।

दूसरी ओर, ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह 14-पॉइंट का प्रस्ताव अमेरिका के 9-पॉइंट योजना के जवाब में तैयार किया गया है। इस प्रस्ताव में कई महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं, जिनमें 30 दिनों के भीतर सभी विवादित मुद्दों का समाधान, भविष्य में किसी भी सैन्य हमले के खिलाफ सुरक्षा की गारंटी, और क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी प्रमुख हैं।

इसके अलावा ईरान ने अपने फ्रीज किए गए आर्थिक संसाधनों को जारी करने, आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने और कथित युद्ध क्षति के लिए मुआवजे की मांग भी रखी है। प्रस्ताव में क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर देते हुए जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर एक नया मैकेनिज्म विकसित करने की बात कही गई है। साथ ही अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने और क्षेत्रीय संघर्षों को खत्म करने की मांग भी शामिल है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने यह भी सुझाव दिया है कि यदि प्रारंभिक समझौता हो जाता है, तो उसके बाद परमाणु कार्यक्रम पर अलग से बातचीत की जा सकती है। यह संकेत देता है कि तेहरान फिलहाल व्यापक समझौते के बजाय चरणबद्ध समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम एशिया पहले से ही अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव ने कई बार क्षेत्रीय शांति को प्रभावित किया है। ऐसे में किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई या तीखी बयानबाजी स्थिति को और जटिल बना सकती है।

ट्रम्प का सख्त रुख यह भी संकेत देता है कि अमेरिका “मैक्सिमम प्रेशर” की नीति को जारी रखना चाहता है। हालांकि, कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की संभावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। पाकिस्तान की मध्यस्थता इस बात का संकेत है कि दोनों पक्ष अभी भी संवाद के रास्ते खुले रखना चाहते हैं।

फिलहाल, हालात अच्छे नहीं हैं। एक ओर जहां ईरान अपने प्रस्ताव के जरिए तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है, वहीं अमेरिका सख्त चेतावनियों के साथ दबाव बनाए हुए है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या दोनों देश किसी समझौते तक पहुंच पाते हैं या टकराव की स्थिति और गहराती है।

इस बीच ईरानी सेना के सीनियर अधिकारी मोहम्मद जाफर असदी ने कहा है कि अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता और दोनों देशों के बीच फिर से युद्ध हो सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान की सेना पूरी तरह से तैयार है और अगर अमेरिका कोई गलत कदम उठाता है, तो जवाब दिया जाएगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका किसी भी समझौते या वादे का पालन नहीं करता। अमेरिकी अधिकारियों के बयान और कदम ज्यादातर दिखावटी और मीडिया के लिए होते हैं। उनका मकसद पहले तेल की कीमतों को गिरने से रोकना और दूसरा अपनी बनाई हुई मुश्किल स्थिति से बाहर निकलना है।

इससे पहले ईरान ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र में कहा कि अमेरिका परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के नियमों का पालन नहीं कर रहा और उसका व्यवहार दोहरे मापदंड वाला है। ईरान ने बयान में कहा कि पिछले 56 सालों से अमेरिका इस संधि के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं कर रहा है। जबकि उसके पास हजारों परमाणु हथियार हैं।

ईरान ने यह भी कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी में काम किया जाए, तो यूरेनियम संवर्धन पर कोई कानूनी रोक नहीं है, जैसा कि ईरान के मामले में था। अमेरिका के साथ सीजफायर वार्ता को लेकर जारी चर्चा के बीच ईरान होर्मुज स्ट्रेट को लेकर नया कानून लाने की तैयारी भी कर रहा है।

ईरानी संसद के उपाध्यक्ष हमीदरेजा हाजी-बाबाई ने कहा कि इस कानून के तहत इजराइल के जहाजों को इस समुद्री रास्ते से गुजरने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित बिल में यह भी कहा गया है कि दुश्मन देशों के जहाज तभी गुजर पाएंगे, जब वे युद्ध का मुआवजा देंगे।

इसके अलावा, दूसरे देशों के जहाजों को भी ईरान से अनुमति लेनी होगी, तभी वे इस रास्ते का इस्तेमाल कर सकेंगे। हाजी-बाबाई ने कहा कि अब होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पहले जैसी नहीं रहेगी और युद्ध के बाद हालात बदल जाएंगे।

Previous articleभारत में उभर रहा नया सर्वहारा वर्ग!
सत्ता विमर्श डेस्क
सत्ता विमर्श (Satta Vimarsh) नाम ही हमारी पहचान है। हमारा मानना है कि सब कुछ सत्ता के इर्द-गिर्द तय होता है, सरकार भी और सरोकार भी। लेकिन, इस सत्ता में हमारी-आपकी भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी सत्ता में बैठे लोगों की। इसीलिए सत्ता और सरोकार से जुड़े मुद्दों पर विमर्श जरूरी है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here