बिहार में ‘सम्राट युग’ का आगाज! पीएम मोदी की मौजूदगी में 32 नए मंत्रियों की एंट्री

पटना। बिहार की राजनीति में गुरुवार का दिन सत्ता, रणनीति और शक्ति प्रदर्शन के नाम रहा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पद संभालने के 22 दिन बाद आखिरकार उनकी कैबिनेट का बहुप्रतीक्षित विस्तार हो गया। राजधानी पटना में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में कुल 32 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली।

सम्राट कैबिनेट के इस विस्तार का सबसे बड़ा राजनीतिक चेहरा रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार, जिन्होंने पहली बार मंत्री पद की शपथ लेकर सक्रिय राजनीति में औपचारिक एंट्री कर ली। इस मेगा पॉलिटिकल इवेंट ने साफ संकेत दे दिया है कि बिहार में बीजेपी नीत NDA अब नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के साथ अगले चुनावी रण की तैयारी में उतर चुका है।

कैबिनेट विस्तार से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पटना एयरपोर्ट से गांधी मैदान तक भव्य रोड शो हुआ। पूरे रास्ते भाजपा समर्थकों और NDA कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। गांधी मैदान के पास लगे एक बड़े पोस्टर ने सबसे ज्यादा राजनीतिक चर्चा बटोरी, जिस पर लिखा था- ‘भगवामय, अंग, बंग और कलिंग।’

इस नारे को भाजपा के पूर्वी भारत में विस्तार और सांस्कृतिक-राजनीतिक संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है।हालांकि शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत को लेकर विवाद भी शुरू हो गया है। कार्यक्रम में सीधे राष्ट्रगान बजाया गया, जबकि प्रोटोकॉल के अनुसार पहले राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ होना चाहिए था। विपक्षी दलों ने इसको लेकर सवाल भी उठाए हैं।

बिहार सरकार ने हाल ही में इस आशय का एक सर्कुलर भी जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि किसी भी कार्यक्रम में पहले राष्ट्रगीत वंदे मातरम, फिर राष्ट्रगान और आखिर में बिहार गीत बजाया जाएगा। लेकिन आज के कार्यक्रम में सीधे राष्ट्रगान बजा दिया गया।

करीब 25 मिनट तक चले इस हाई-प्रोफाइल समारोह में एक साथ पांच-पांच नेताओं को शपथ दिलाई गई। पहले चरण में निशांत कुमार, श्रवण कुमार, विजय सिन्हा, लेसी सिंह और दिलीप जायसवाल ने मंत्री पद की शपथ ली। निशांत कुमार का मंत्री बनना सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। अब तक सक्रिय राजनीति से दूर निशांत की एंट्री को जेडीयू की भविष्य की राजनीति और नेतृत्व परिवर्तन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

नई कैबिनेट में बीजेपी से 15, जेडीयू से 13, LJP(R)-2, HAM और RLM से एक-एक मंत्री हैं। 25 मिनट तक चले इस कार्यक्रम में एक साथ 5-5 विधायकों ने शपथ दिलाई गई। दो बार बिहार के स्वास्थ्य मंत्री रहे मंगल पांडेय को इस बार कैबिनेट में जगह नहीं मिली है। बताया जा रहा है कि पार्टी में उन्हें बड़ी जगह दी जाएगी।

सम्राट कैबिनेट के आज के विस्तार में 30 MLA-MLC ने शपथ ली। निशांत कुमार और दीपक प्रकाश ने भी शपथ ली है लेकिन दोनों अभी किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। इस तरह सम्राट सरकार में मुख्यमंत्री सहित 35 मंत्री हो गए हैं। इसमें मुख्यमंत्री सहित भाजपा के 16, जेडीयू के 15, चिराग पासवान की पार्टी LJP(R) के 2 और हम तथा RLM के एक-एक सदस्य हैं। जातीय समीकरण की बात करें तो 9 OBC, 9 EBC, 9 जनरल, 7 दलित और एक मुस्लिम मंत्री हैं। सम्राट कैबिनेट में 5 महिला मंत्री भी शामिल किए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा जेडीयू से 3 मंत्री बनाए गए हैं। नए मंत्रियों में 6 के पास PhD की डिग्री है। वहीं, एक जेडीयू के भगवान सिंह कुशवाहा 10वीं पास हैं।

सम्राट चौधरी की नई कैबिनेट केवल मंत्रियों की सूची नहीं, बल्कि बिहार की नई राजनीतिक दिशा का संकेत भी मानी जा रही है। एक ओर भाजपा ने अपने सामाजिक विस्तार का संदेश दिया है तो दूसरी ओर जेडीयू ने निशांत कुमार को आगे कर भविष्य की राजनीति के संकेत स्पष्ट कर दिए हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह नई टीम बिहार की सत्ता और NDA की चुनावी रणनीति को कितना मजबूत कर पाती है।

 

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प्रवीण कुमार
मैं कौन हूं, क्या हूं, क्यों हूं, यह सब खुद मुझे भी नहीं पता क्यों कि खुद के बारे में बताना, जताना या उकेरना सबसे मुश्किल काम होता है। हां! बुद्ध, गांधी, विवेकानंद और गीता के दर्शन से मैंने अपने जीवन को संवारने की कोशिश जरूर की है। बिहार के बेगूसराय जिले का रहने वाला हूं। जाने-अनजाने में पत्रकारिता के आंगन में ढाई दशक से अधिक वक्त से कूद-फांद कर रहा हूं। शुरूआती दौर में जी भरकर देश के तमाम राष्ट्रीय और क्षेत्रीय अखबारों और पत्रिकाओं में वैचारिक लेखन किया। सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विषयों पर लिखने में अपनी रूचि रहती है। फिलहाल भारत सरकार से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर लेखन कर रहा हूं। डिजिटल और सोशल मीडिया कंसल्टेंट के तौर भी हाथ साफ करता रहता हूं। 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान फेक न्यूज़ की बयार को गहराई से जांचा परखा था। उससे पहले नोएडा स्थित ज़ी न्यूज़ में हिन्दी वेबसाइट की शुरूआत कर काफी लंबा वक्त गुजारा। इससे भी पीछे का पूछेंगे तो करीब डेढ़ दशक तक दैनिक हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, अमर उजाला, दैनिक भास्कर समेत कई राष्ट्रीय व क्षेत्रीय अखबारों के संपादकीय विभाग में अलग-अलग भूमिकाओं को निभाते हुए एक पत्रकार के तौर पर अपनी पहचान बनाने की कोशिश की, एक बेहतर इंसान भी बनने की कोशिश की, पर कितना बन पाया ये सब ''ऊपर वाले पर'' छोड़ता हूं...

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