नई दिल्ली/लखनऊ : उत्तर प्रदेश में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती के मामले में दायर याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के 16 अगस्त 2024 के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें भर्ती की मेरिट लिस्ट को रद्द कर दिया गया था।
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने कहा- हाई कोर्ट का आदेश निलंबित रहेगा। अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी। सीजेआई ने सभी पक्षकारों से कहा कि आप लिखित नोट दाखिल करें। हम इस पर फाइनल सुनवाई करेंगे।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में जून 2020 और जनवरी 2022 की मेरिट लिस्ट को रद्द करते हुए यूपी सरकार को आदेश दिया था कि वह 2019 में हुई सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा के आधार पर 69 हजार शिक्षकों के लिए नई मेरिट लिस्ट तीन महीने में जारी करे।
हाई कोर्ट ने ये भी कहा था कि अगर कोई आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी जनरल कैटेगरी के बराबर मेरिट हासिल कर लेता है तो उसका सिलेक्शन जनरल कैटगरी में ही माना जाना चाहिए। हाई कोर्ट के इस आदेश के चलते यूपी में बड़ी संख्या में नौकरी कर रहे शिक्षकों पर नौकरी खोने का खतरा मंडराने लगा था।
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने पिछले महीने यूपी सरकार को तीन महीने के भीतर भर्ती की नई मेरिट लिस्ट जारी करने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान माना था कि 69000 टीचर भर्ती में अभ्यर्थियों को आरक्षण का पूरा लाभ नहीं दिया गया।
परिषदीय स्कूलों में चार साल से नौकरी कर रहे शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिकाकर्ताओं में शिक्षक राघवेंद्र प्रताप सिंह, रवि प्रकाश पांडेय, शिवम चौबे और रवि सक्सेना सहित अन्य शामिल हैं। इनकी तरफ से एडवोकेट गौरव बनर्जी, एस. मुरलीधर, मुकुल रोहतगी, पीए सुंदरम ने पैरवी की। राज्य सरकार का पक्ष सुप्रीम कोर्ट में यूपी की अपर महाधिवक्ता एश्वर्या भाटी ने रखा।
मालूम हो कि 16 अगस्त 2024 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 69000 शिक्षकों की भर्ती की जून 2020 और जनवरी 2022 की मेरिट लिस्ट रद्द कर दी थी। बेंच ने सरकार को सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा का रिजल्ट नए सिरे से जारी करने का आदेश भी दिया था। बेसिक शिक्षा विभाग को तीन महीने में नई मेरिट लिस्ट जारी करनी थी।
कोर्ट में शिक्षकों की भर्ती में 19 हजार सीटों पर आरक्षण घोटाला सामने आया था। ऐसे में बेंच ने आदेश दिया था कि आरक्षण नियमावली 1981 और आरक्षण नियमावली 1994 का पालन करके नई सूची बनाई जाए। इससे पहले लखनऊ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच भी ये मान चुकी थी कि 69,000 शिक्षकों की भर्ती में 19,000 सीटों पर आरक्षण का घोटाला हुआ था।




