अमेरिकी मंच से राहुल ने मोदी सत्ता के बारे में कह दिया कुछ ऐसा कि मच गया बवाल

नई दिल्ली : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अपनी तीन दिवसीय अमेरिका यात्रा के लिए रविवार को टेक्सास के डलास पहुंचे। यहां उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के छात्र-छात्राओं से भारतीय राजनीति, अर्थव्यवस्था, भारत की शिक्षा नीति, भारत जोड़ो यात्रा आदि को लेकर लंबी-चौड़ी बात की।

कार्यक्रम में इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने बीजेपी और आरएसएस पर पलटवार करते हुए कहा कि राहुल गांधी अब पप्पू नहीं है, वे पढ़े-लिखे हैं और किसी भी मुद्दे पर गहरी सोच रखने वाले रणनीतिकार हैं।

सवाल-जवाब के इस क्रम में राहुल गांधी ने मोदी सत्ता के बारे में कुछ ऐसी बातें कह दी जिससे भारत के राजनीतिक गलियारे में बवाल मच गया। भारत की शिक्षा नीति को लेकर राहुल ने मोदी सत्ता और आरएसएस पर जबरदस्त हमला किया।

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है, ”कल्पना कीजिए कि कोई राहुल गांधी का परिचय इस तरह से करा रहा हो कि वो पप्पू नहीं हैं और सैम पित्रोदा ने यह कर दिखाया है।”

टेक्सास में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “आरएसएस का मानना ​​है कि भारत एक विचार है और हमारा मानना ​​है कि भारत विचारों की बहुलता है। लिहाजा इसमें सभी को शामिल होने की अनुमति दी जानी चाहिए, सपने देखने की गुंजाइश होनी चाहिए और उनकी जाति, भाषा, धर्म, परंपरा या इतिहास की परवाह किए बिना उन्हें जगह दी जानी चाहिए।”

राहुल के इस बयान पर पलटवार करते हुए बीजेपी सांसद गिरिराज सिंह ने कहा, “आरएसएस को जानने के लिए राहुल गांधी को कई जन्म लेने पड़ेंगे। कोई देशद्रोही आरएसएस को नहीं जान सकता। जो विदेशो में जाकर देश की निंदा करे वो आरएसएस को नहीं जान सकता। लगता है राहुल गांधी भारत को बदनाम करने के लिए ही विदेश जानते हैं।”

राहुल गांधी ने कहा कि भारत में रोजगार की बड़ी समस्या है। ऐसा इसलिए क्योंकि हमने उत्पादन पर ध्यान नहीं दिया। इसके उलट हमारा पड़ोसी देश चीन ने उत्पादन पर काफी ध्यान दिया और उसका प्रतिफल इस रूप में निकलकर सामने आया कि भारत में सब कुछ मेड इन चाइना है।

लीडर ऑफ अपोजिशन के तौर पर चुनौतियों के सवाल पर राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष लोगों की आवाज होता है। विपक्ष को लीडर के तौर सोचना होता है कि कहां और कैसे लोगों की आवाज उठाई जा सकती है। संसद में स्थिति एक जंग की तरह होती है। वहां जाकर लड़ना होता है।

रोजगार के सवाल पर राहुल गांधी ने कहा कि रोजगार की दिक्कत पूरी दुनिया में नहीं है। पश्चिमी देशों में रोजगार की दिक्कत है। भारत में भी है, लेकिन चीन में नहीं है। वियतनाम में नहीं है। इसकी वजह है।

राहुल गांधी ने कहा है कि साल 1940, 50 और 60 के दशक में अमेरिका वैश्विक उत्पादन का केंद्र था। अमेरिका में कार, वाशिंग मशीन, टीवी सब कुछ बनाया जाता था, लेकिन धीरे धीरे यह उत्पादन कोरिया, जापान और अब चीन में शिफ्ट हो गया है।

राहुल ने कहा है, “अगर आप आज देखें तो चीन वैश्विक उत्पादन पर हावी है। भारत में आप फोन, फर्नीचर, कपड़े देखें तो उन सभी के पीछे “मेड इन चाइना” लिखा होता है. यह एक तथ्य है। तो क्या हुआ है? पश्चिमी देशों, अमेरिका, यूरोप और भारत ने उत्पादन के विचार को छोड़ दिया और इसे चीन को सौंप दिया है।”

क्या एआई का रोजगार पर फर्क पड़ेगा? के जवाब में राहुल ने कहा कि जब भी कोई नई टेक्नोलॉजी आती है तो ऐसा लगता है कि नौकरियां चले जाएंगी। रेडियो आया तब भी एसी ही चर्चा हुईं। कैलकुलेटर आया तब भी ऐसी चर्चा हुईं। आईटी सेक्टर के समय भी यही कहा गया, लेकिन नई टेक्नोलॉजी से नौकरियां ट्रांसफॉर्म होती हैं। किसी की नौकरी जाती है तो किसी को नौकरी मिलती भी है।

भारत की जनसंख्या को देखते हुए शिक्षा नीति को कैसा बदला जाए के सवाल पर राहुल गांधी ने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि देश में स्किल की समस्या है। मेरे ख्याल से यहां स्किल की नहीं, बल्कि स्किल वालों को जो कम इज्जत मिलती है, वह बड़ी समस्या है।

इसके अलावा हमारे देश में एजुकेशन सिस्टम भी बिजनेस सिस्टम से मेल नहीं खाता। स्किल और एजुकेशन के बीच एक बड़ी खाई है। हमें इसे खत्म करना होगा। आप देख सकते हैं देश में कई यूनिवर्सिटीज में कुलपति आरएसएस की विचारधारा से जुड़े लोग हैं। यह नहीं होना चाहिए।

Previous articleये क्या? इस मुद्दे पर तो राहुल गांधी के साथ खड़ी हो गई आरएसएस
Next articleयूपी में शिक्षकों की भर्ती मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम रोक
सत्ता विमर्श डेस्क
सत्ता विमर्श (Satta Vimarsh) नाम ही हमारी पहचान है। हमारा मानना है कि सब कुछ सत्ता के इर्द-गिर्द तय होता है, सरकार भी और सरोकार भी। लेकिन, इस सत्ता में हमारी-आपकी भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी सत्ता में बैठे लोगों की। इसीलिए सत्ता और सरोकार से जुड़े मुद्दों पर विमर्श जरूरी है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here