देहरादून/नई दिल्ली। देश के दो सबसे बड़े हिंदू तीर्थस्थलों में चढ़ावे की पारदर्शिता को लेकर उठे सवाल अब राष्ट्रीय बहस का विषय बनते जा रहे हैं। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि के कथित गबन की जांच अभी जारी ही है कि अब बद्रीनाथ धाम में भी चढ़ावे और दान राशि की कथित हेराफेरी के आरोप सामने आए हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल आरोपों के बाद बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच समिति गठित कर दी है। समिति का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
BKTC के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है, इसलिए किसी भी आरोप को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा कि संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है और पूरे मामले की जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है। द्विवेदी के अनुसार, “यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमों के अनुसार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
मालूम हो कि देहरादून की एक संस्था भैरव सेना ने आरोप लगाया है कि बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे की गिनती के दौरान दान राशि में गड़बड़ी की जा रही है। हालांकि मंदिर समिति का कहना है कि आरोप लगाने वालों ने अब तक कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया है। इसके बावजूद मामले की निष्पक्ष जांच कराने का निर्णय लिया गया है ताकि किसी तरह का संदेह न रहे।
BKTC के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रंगड़ ने बताया कि जांच समिति उपलब्ध दस्तावेज, CCTV फुटेज और संबंधित कर्मचारियों के बयान के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच की गई, लेकिन अभी तक कोई निर्णायक प्रमाण सामने नहीं आया है। सूत्रों के मुताबिक जिस कमरे में दान राशि की गिनती होती है, वहां पांच CCTV कैमरे लगे हुए हैं।
सोशल मीडिया पर यह दावा भी किया गया कि आरोपों के घेरे में आया कर्मचारी BKTC अध्यक्ष का निजी सचिव है। हेमंत द्विवेदी ने इस दावे को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि संबंधित व्यक्ति समिति का नियमित सरकारी कर्मचारी है और पूर्व के तीन अध्यक्षों के साथ भी सचिवीय दायित्व निभा चुका है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में उसके खिलाफ कोई तथ्य सामने आते हैं तो उसके विरुद्ध भी कार्रवाई होगी।
BKTC के अनुसार, यदि जांच में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अधिनियम, 1939 तथा सेवा नियमों के तहत विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। समिति ने लोगों से अपील भी की है कि जांच पूरी होने तक अपुष्ट और भ्रामक सूचनाओं को सोशल मीडिया पर साझा करने से बचें।
बद्रीनाथ में चढ़ावा चोरी की यह जांच ऐसे समय शुरू हुई है जब अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच पहले से जारी है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने 25 जून 2026 को दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। मामले में गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है और विशेष जांच दल (SIT) को जांच का दायरा बढ़ाने के लिए अतिरिक्त समय भी दिया गया है। विवाद बढ़ता देख श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।
बहरहाल, देश के बड़े मंदिर केवल धार्मिक आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि करोड़ों रुपये के दान और विशाल सामाजिक विश्वास का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता का आरोप केवल प्रशासनिक मामला नहीं रह जाता, बल्कि यह श्रद्धालुओं के विश्वास और संस्थागत पारदर्शिता की परीक्षा बन जाता है। बद्रीनाथ धाम के मामले में अभी केवल आरोप लगे हैं और जांच जारी है। यदि जांच में आरोप गलत साबित होते हैं तो इससे मंदिर प्रशासन की विश्वसनीयता मजबूत होगी। वहीं यदि अनियमितता सिद्ध होती है तो यह देश के प्रमुख धार्मिक संस्थानों में दान प्रबंधन, ऑडिट प्रणाली, डिजिटल ट्रैकिंग और पारदर्शिता के नए मानकों की आवश्यकता को और रेखांकित करेगा।




