भारत ने अपनी सामरिक रक्षा क्षमता को नई मजबूती देते हुए स्वदेशी मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम का सफल परीक्षण किया है। इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) श्रेणी के खतरों से निपटने की क्षमता मौजूद है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 10 और 11 जून को लगातार तीन फ्लाइट टेस्ट किए, जिनमें मल्टी-लेयर्ड BMD सिस्टम की विभिन्न क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया। इन परीक्षणों ने यह साबित किया कि भारत का रक्षा कवच लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले हवा में ही निष्क्रिय करने में सक्षम है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 13 जून को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर परीक्षणों की तस्वीरें साझा करते हुए इसे देश की रक्षा तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। इसी अवधि में नेवल एंटी-शिप मिसाइल (मीडियम रेंज) का भी सफल परीक्षण किया गया, जिससे भारत की समुद्री स्ट्राइक और रक्षा क्षमताओं को और मजबूती मिली है। भारत से पहले केवल अमेरिका, रूस, इजराइल और चीन के पास ही ऑपरेशनल स्तर की बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस क्षमता उपलब्ध थी। अब भारत भी इस विशिष्ट समूह का हिस्सा बन गया है।
क्या है इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल?
इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) ऐसी लंबी दूरी की मिसाइल होती है जो एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक हमला करने में सक्षम होती है। सामान्यतः इसकी मारक क्षमता 5,500 किलोमीटर से अधिक होती है। ये मिसाइलें परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम होती हैं और अत्यधिक ऊंचाई तथा गति के कारण दुनिया के सबसे शक्तिशाली रणनीतिक हथियारों में गिनी जाती हैं।
कैसे काम करता है मल्टी-लेयर्ड BMD सिस्टम?
मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम का उद्देश्य दुश्मन की मिसाइल को उसके लक्ष्य तक पहुंचने से पहले नष्ट करना है। सबसे पहले अत्याधुनिक रडार मिसाइल का पता लगाते हैं, फिर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम खतरे का आंकलन करता है। इसके बाद इंटरसेप्टर मिसाइल लॉन्च की जाती है, जो हवा में ही दुश्मन की मिसाइल को मार गिराती है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है। यदि पहली इंटरसेप्टर मिसाइल लक्ष्य को नष्ट करने में विफल रहती है, तो दूसरी रक्षा परत सक्रिय होकर खतरे को समाप्त करने का प्रयास करती है। यही वजह है कि इसे अत्यधिक विश्वसनीय रक्षा प्रणाली माना जाता है।
पहले भी सफल रहा है BMD फेज-II परीक्षण
इससे पहले भारत बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम के फेज-II का भी सफल परीक्षण कर चुका है। इस परीक्षण में ओडिशा के धामरा स्थित लॉन्च कॉम्प्लेक्स से एक टारगेट मिसाइल दागी गई थी, जिसे दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइल के रूप में डिजाइन किया गया था। जमीन और समुद्र आधारित रडार नेटवर्क ने लक्ष्य को ट्रैक किया और इंटरसेप्टर सिस्टम ने उसे सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया। यह उपलब्धि भारत की बहुस्तरीय मिसाइल रक्षा प्रणाली को परिचालन क्षमता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





कम शब्दों में ही पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए साधुवाद।