PM Modi Europe Visit 2026: फ्रांस, स्लोवाकिया और G-7 के जरिए यूरोप में भारत की नई रणनीतिक दस्तक

PM Modi Europe Visit 2026 covering France, Slovakia and G7 Summit
फ्रांस, स्लोवाकिया और G7 सम्मेलन के जरिए यूरोप में भारत की नई रणनीतिक पहल

नई दिल्ली/नीस: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छह दिवसीय यूरोप यात्रा (PM Modi Europe Visit 2026) केवल एक नियमित राजनयिक दौरा नहीं है, बल्कि बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन के बीच भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने वाला महत्वपूर्ण अभियान है। फ्रांस, स्लोवाकिया और जी-7 शिखर सम्मेलन को केंद्र में रखकर तैयार की गई यह यात्रा रक्षा, प्रौद्योगिकी, निवेश, नवाचार और वैश्विक कूटनीति के कई आयामों को एक साथ जोड़ती है।

13 जून से शुरू हुई इस यात्रा (PM Modi Europe Visit 2026) का पहला चरण फ्रांस के नीस शहर में है, जहां प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता हो रही है। इसके बाद प्रधानमंत्री स्लोवाकिया की ऐतिहासिक यात्रा करेंगे और फिर जी-7 शिखर सम्मेलन तथा यूरोप के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी कार्यक्रम विवाटेक में भाग लेंगे। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार यह दौरा यूरोप के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भारत-फ्रांस संबंध: रक्षा से आगे नवाचार तक

भारत और फ्रांस के संबंध लंबे समय से रक्षा सहयोग पर आधारित रहे हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा, समुद्री सहयोग और रक्षा उत्पादन दोनों देशों की साझेदारी के प्रमुख स्तंभ हैं। लेकिन इस बार यात्रा का केंद्र केवल रक्षा नहीं, बल्कि नवाचार और प्रौद्योगिकी भी है।

नीस में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने संयुक्त रूप से ‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस आयोजन में भारत, फ्रांस और अन्य देशों के स्टार्टअप, वेंचर कैपिटल फंड तथा नवाचार संस्थान शामिल हुए। यह कार्यक्रम भारत-फ्रांस ‘ईयर ऑफ इनोवेशन’ के तहत आयोजित किया जा रहा है और इसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डीप-टेक, डिजिटल प्रौद्योगिकी तथा स्टार्टअप सहयोग को बढ़ावा देना है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर भारत को वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि नवाचार भारत की पहचान और विकास यात्रा का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब भारत दुनिया की सबसे बड़ी स्टार्टअप अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन चुका है।

 


स्लोवाकिया यात्रा: मध्य यूरोप में भारत की नई सक्रियता

यात्रा का दूसरा चरण स्लोवाकिया में है, जो कई दृष्टियों से ऐतिहासिक माना जा रहा है। 1993 में स्लोवाकिया के स्वतंत्र राष्ट्र बनने के बाद यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा है। प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी से होगी।

विश्लेषकों का मानना है कि भारत अब केवल पश्चिमी यूरोप तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि मध्य और पूर्वी यूरोप में भी अपनी आर्थिक एवं रणनीतिक उपस्थिति मजबूत करना चाहता है। ऑटोमोबाइल, रेलवे विनिर्माण, हरित ऊर्जा, निवेश और औद्योगिक सहयोग ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें दोनों देशों के बीच साझेदारी की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

यूरोपीय संघ के भीतर स्लोवाकिया की स्थिति और उसकी औद्योगिक क्षमता भारत के लिए नए निवेश और तकनीकी सहयोग के अवसर खोल सकती है। ऐसे समय में जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं पुनर्गठित हो रही हैं, भारत और स्लोवाकिया के बीच बढ़ता सहयोग दोनों पक्षों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

G-7 शिखर सम्मेलन: वैश्विक दक्षिण की आवाज बनेगा भारत

यात्रा का तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण चरण फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन है। यद्यपि भारत जी-7 का सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उसे लगातार आमंत्रित किया जाता रहा है। यह भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का संकेत माना जाता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने यात्रा (PM Modi Europe Visit 2026) से पहले स्पष्ट किया कि वह जी-7 मंच पर केवल भारत की नहीं, बल्कि ‘ग्लोबल साउथ’ यानी विकासशील देशों की आकांक्षाओं और चिंताओं की भी आवाज उठाएंगे।

जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक स्थिरता जैसे मुद्दे सम्मेलन के प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों की भी संभावना है, जिनमें व्यापार और प्रौद्योगिकी सहयोग महत्वपूर्ण विषय रह सकते हैं।

विवाटेक सम्मेलन और तकनीकी कूटनीति

18 जून को प्रधानमंत्री मोदी पेरिस में विवाटेक (VivaTech) सम्मेलन में भाग लेंगे। यह यूरोप का सबसे बड़ा स्टार्टअप और प्रौद्योगिकी मंच माना जाता है। भारत की उपस्थिति इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली अब तकनीकी कूटनीति को अपनी विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रही है।

विवाटेक में भागीदारी के माध्यम से भारत वैश्विक निवेशकों, तकनीकी कंपनियों और नवाचार संस्थानों के सामने अपनी डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप क्षमता और तकनीकी प्रतिभा को प्रदर्शित करेगा।

क्यों महत्वपूर्ण है यह यात्रा?

प्रधानमंत्री मोदी की यह यूरोप यात्रा (PM Modi Europe Visit 2026) तीन स्पष्ट संदेश देती है। पहला, भारत यूरोप के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को केवल रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं रखना चाहता बल्कि उन्हें नवाचार, तकनीक और निवेश तक विस्तारित करना चाहता है। दूसरा, भारत मध्य यूरोप में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए सक्रिय कूटनीति अपना रहा है। तीसरा, जी-7 जैसे मंचों पर भारत स्वयं को वैश्विक दक्षिण के प्रतिनिधि और वैश्विक समाधान के साझेदार के रूप में स्थापित कर रहा है।

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में, जहां अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा, यूरोपीय सुरक्षा चिंताएं और तकनीकी प्रभुत्व की होड़ तेज हो रही है, प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत की बहुआयामी विदेश नीति का महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभर रही है। आने वाले दिनों में फ्रांस, स्लोवाकिया और जी-7 में होने वाली चर्चाएं यह तय करेंगी कि यूरोप के साथ भारत की साझेदारी अगले दशक में किस दिशा में आगे बढ़ती है।

Previous articleअब आसमान में ही खत्म हो जाएगा भारत पर हमला करने वाले दुश्मन देशों का कुनबा
Next articleशिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ी कॉकरोच जनता पार्टी, देशभर में तेज हुआ विरोध प्रदर्शन
रवि रंजन राजा
अपने बारे में लिखना हमेशा सबसे मुश्किल काम लगता है। खबरों, लोगों और घटनाओं की कहानियां लिखना आसान है, लेकिन खुद को कुछ शब्दों में बयां करना नहीं। फिर भी, अगर परिचय देना हो तो इतना कह सकता हूं कि पिछले सात वर्षों से अधिक समय से पत्रकारिता मेरी पहचान और मेरी सीख, दोनों का हिस्सा रही है। इस सफर में बालाजी न्यूज, लोकस्वर, ईटीवी भारत और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। रिपोर्टिंग की भागदौड़ से लेकर डेस्क की जिम्मेदारियों तक, डिजिटल मीडिया की चुनौतियों से लेकर जनसरोकार से जुड़े विषयों तक - हर पड़ाव ने मुझे कुछ नया सिखाया। पत्रकारिता ने न केवल घटनाओं को देखने का नजरिया दिया, बल्कि उन लोगों और कहानियों को समझने का अवसर भी दिया जो अक्सर सुर्खियों से दूर रह जाते हैं। मुझे उन विषयों पर काम करना पसंद है जिनका सीधा संबंध समाज और आम लोगों के जीवन से हो। मेरा मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और उसके सरोकारों को समझने और समझाने की एक जिम्मेदारी भी है। इतने वर्षों के बाद भी मुझे लगता है कि पत्रकारिता ने जितना सिखाया है, उससे कहीं ज्यादा सीखना अभी बाकी है। सफर अभी जारी है। हर नई खबर के साथ कुछ नया सीखने, समझने और लोगों की अनकही कहानियों को सामने लाने की कोशिश भी जारी है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here