सड़क से संसद तक मोदी सरकार की घेराबंदी, छात्र आंदोलन को विपक्ष का खुला समर्थन

NEET पेपर लीक से शुरू हुआ आंदोलन अब जनआंदोलन की शक्ल लेकर मोदी सत्ता के लिए चुनौती बनकर खड़ा हो गया है। संसद ठप है, देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं और विपक्ष धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रधानमंत्री से माफी की मांग कर रही है।

देश की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और युवाओं के भविष्य को लेकर पनपे असंतोष ने अब राष्ट्रीय राजनीतिक आंदोलन का रूप ले लिया है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET के कथित पेपर लीक से शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब सड़कों से लेकर देश की संसद तक मोदी सरकार के लिए सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती बनकर उभर रहा है। बुधवार को संसद के दोनों सदनों में विपक्ष ने छात्रों के समर्थन में जोरदार हंगामा किया, जबकि देश के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन जारी रहे।

लोकसभा और राज्यसभा में विपक्षी सांसदों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सरकार को घेरा। संसद परिसर में काले कपड़े पहनकर पहुंचे विपक्षी सांसदों ने हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया और बाद में सदन के भीतर भी लगातार नारेबाजी की। हंगामे के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्र तीन मांगों पर अडिग हैं—शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा छात्रों से सार्वजनिक माफी। उन्होंने कहा, कांग्रेस और पूरा विपक्ष छात्रों के आंदोलन के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है। इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं होगा।”

NEET से शुरू हुआ आंदोलन बना जनआंदोलन

पिछले महीने मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET के कथित पेपर लीक के बाद शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है। लाखों छात्रों के भविष्य, भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता, शिक्षा के बढ़ते निजीकरण और बेरोजगारी के सवालों ने इसे व्यापक जन असंतोष में बदल दिया है। सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित विशाल संसद मार्च में हजारों छात्र और युवा शामिल हुए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आंसू गैस, पानी की बौछार और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई के बाद आंदोलन और तेज हो गया।

देश के कई शहरों में फैला आंदोलन

दिल्ली के बाद अब यह आंदोलन देश के अनेक शहरों तक फैल चुका है। मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, गोवा, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम, जम्मू और अहमदाबाद सहित कई शहरों में छात्र संगठनों और विभिन्न सामाजिक समूहों ने विरोध प्रदर्शन किए। राजधानी दिल्ली में बुधवार को भी हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर एकत्र हुए। राष्ट्रीय ध्वज और तख्तियां लेकर छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग उठाई। स्थिति को देखते हुए दिल्ली मेट्रो ने मध्य दिल्ली के 16 स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था, जिन्हें बाद में शाम को दोबारा खोल दिया गया।

संसद में विपक्ष का सरकार पर तीखा हमला

संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। कांग्रेस, वाम दलों तथा अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए काले कपड़ों में संसद परिसर में प्रदर्शन किया। सदन के भीतर लगातार नारेबाजी और हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष का आरोप है कि सरकार परीक्षा घोटालों और छात्रों के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर चर्चा से बच रही है।

प्रधानमंत्री आवास तक पहुंचा विरोध

मंगलवार को कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर धरना दिया। इस दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा तथा कई वरिष्ठ विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया, हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। कांग्रेस का कहना है कि यदि संसद में चर्चा की अनुमति दी जाती तो सड़क पर उतरने की आवश्यकता नहीं पड़ती। जहां विपक्ष छात्र आंदोलन के समर्थन में सड़कों पर उतरा, वहीं भारतीय जनता पार्टी ने भी कई शहरों में कांग्रेस के खिलाफ जवाबी प्रदर्शन किए। जयपुर, रायपुर और तिरुवनंतपुरम में पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ताओं को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछार का इस्तेमाल किया। पटना में भाजपा और विरोध प्रदर्शन कर रहे समूहों के बीच पथराव की घटनाएं भी सामने आईं।

धर्मेंद्र प्रधान बोले- सरकार सुधार के लिए प्रतिबद्ध

लगातार इस्तीफे की मांगों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है और परीक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधार करने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि उन्होंने अपने इस्तीफे की मांग पर कोई टिप्पणी नहीं की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा नेतृत्व की चुप्पी इस बात का संकेत है कि धर्मेंद्र प्रधान अभी भी पार्टी नेतृत्व के भरोसेमंद नेताओं में शामिल हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि इस आंदोलन ने पहली बार शिक्षा, रोजगार और परीक्षा प्रणाली के सवालों को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है। युवाओं के बीच बढ़ते असंतोष ने विपक्ष को भी एक साझा मुद्दा उपलब्ध कराया है, जिसके माध्यम से वह मोदी सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाती है तो यह आंदोलन आगामी महीनों में और व्यापक स्वरूप ले सकता है।

सोनम वांगचुक ने रखी नई शर्त

छात्र आंदोलन को नई ऊर्जा देने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अभी भी अनशन पर हैं। पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाए जाने के बाद मंगलवार को अदालत के आदेश पर उन्हें एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। मंगलवार रात मोदी सरकार के दो मंत्रियों ने उनसे मुलाकात कर अनशन समाप्त करने की अपील की। हालांकि वांगचुक ने साफ कर दिया कि वे तभी अनशन समाप्त करेंगे जब सरकार लिखित आश्वासन दे कि आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र या प्रदर्शनकारी के खिलाफ दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

बहरहाल, NEET PAPER LEAK से शुरू हुआ यह आंदोलन अब केवल परीक्षा सुधार का मुद्दा नहीं रह गया है। शिक्षा, रोजगार, युवाओं के भविष्य और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार जैसे प्रश्न इसमें जुड़ चुके हैं। संसद में लगातार गतिरोध, विपक्ष की आक्रामक रणनीति और देशभर में फैलते प्रदर्शन यह संकेत देते हैं कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में केंद्र सरकार के लिए गंभीर राजनीतिक चुनौती बन सकता है। यदि सरकार और विपक्ष के बीच संवाद का रास्ता नहीं निकलता, तो मानसून सत्र का शेष हिस्सा भी इसी टकराव की भेंट चढ़ सकता है।

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प्रवीण कुमार
पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव रखता हूं। राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मीडिया संस्थानों के साथ काम करते हुए सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विषयों पर निरंतर लेखन करता आ रहा हूं। फिलहाल भारत सरकार से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं और डिजिटल मीडिया कंसल्टेंसी से भी जुड़ा हूं। बुद्ध, गांधी, विवेकानंद और भगवत गीता के विचार मेरे लेखन और जीवन-दृष्टि को दिशा देते हैं।

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