पेपर लीक पर PM मोदी का बड़ा ऐलान- फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाएंगे, कपिल सिब्बल ने किया पलटवार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों में त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान किया। विपक्ष ने सवाल उठाया कि जब छात्र हफ्तों से आंदोलन कर रहे थे, तब सरकार संवाद से दूर क्यों रही। अब इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत हैं।

नई दिल्ली। पेपर लीक पर लंबी चुप्पी को तोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार सीधे हस्तक्षेप करते हुए ऐलान किया है कि पेपर लीक के मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए जाएंगे, ताकि दोषियों को शीघ्र और कठोर सजा मिल सके। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने पीएम मोदी के इस ऐलान पर पटलवार करते हुए कहा है कि सरकार पहले अपनी पार्टी के उन नेताओं के खिलाफ फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए, जिन पर पहले गंभीर आरोप लगाए गए थे और बाद में उन्हें पार्टी में शामिल कर लिया गया।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया साइट X पर लिखा- ”देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने के लिए, केस के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा। इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं कि संबंधित विभाग आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे। विद्यार्थियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णयों की श्रृंखला में ये एक महत्वपूर्ण कदम है। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।”

पीएम मोदी के इस ऐलान पर राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार पहले अपनी पार्टी के उन नेताओं के खिलाफ फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए, जिन पर पहले गंभीर आरोप लगाए गए थे और बाद में उन्हें पार्टी में शामिल कर लिया गया। उन्होंने सवाल किया कि उनके खिलाफ CBI जांच क्यों नहीं हो रही और पहले से चल रही जांच क्यों रोक दी गई। कपिल सिब्बल ने सरकार की समय-सीमा पर भी सवाल खड़े किए। सिब्बल ने कहा कि छात्रों का आंदोलन 28 जून से चल रहा है और 25 दिन बीत चुके हैं। इस दौरान सरकार ने न तो छात्रों से बातचीत की और न ही उनकी चिंताओं पर कोई बयान दिया। जब छात्र भूख हड़ताल पर बैठे थे, तब सरकार चुप रही और अब युवाओं के बढ़ते गुस्से को देखकर सरकार सक्रिय हुई है।

हालांकि यह पहला अवसर नहीं है जब प्रधानमंत्री ने पेपर लीक पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी हो। इससे पहले 21 जुलाई को एनडीए संसदीय दल की बैठक में उन्होंने कहा था कि NEET पेपर लीक की सूचना मिलते ही सरकार ने तत्काल कार्रवाई की थी। उन्होंने दावा किया था कि इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, दोबारा परीक्षा कराई गई और समय पर परिणाम घोषित किए गए। प्रधानमंत्री ने उस बैठक में यह भी कहा था कि पेपर लीक किसी राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य का प्रश्न है। उन्होंने आश्वासन दिया था कि दोषियों को कठोरतम सजा दिलाने के लिए सरकार हरसंभव कानूनी कदम उठाएगी।

पेपर लीक केस के लिए पहली बार फास्ट ट्रैक कोर्ट का ऐलान किया गया है। देश में अब तक पेपर लीक मामलों की सुनवाई सामान्य अदालतों में होती थी, इसलिए फैसला आने में कई साल लग जाते थे। अब प्रधानमंत्री ने इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा की है, ताकि फैसला तेजी से हो सके। भारत में फास्ट ट्रैक कोर्ट की शुरुआत साल 2000 में हुई थी। इनका गठन 11वें वित्त आयोग की सिफारिश पर किया गया था। आयोग ने देशभर में 1734 फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के लिए स्पेशल फंड की अनुशंसा की थी।

केंद्र सरकार के अनुसार, रेप और POCSO मामलों के लिए बनी फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 2019 से 2025 तक 3.06 लाख से ज्यादा मामलों का निपटारा किया है। इन अदालतों में मामलों के निपटारे का रेट 96.28% है, यानी जितने नए मामले आए, लगभग उतने ही मामलों का निपटारा भी हुआ। हालांकि, नए मामले लगातार दर्ज होने के कारण 2025 के अंत तक 2.45 लाख से ज्यादा मामले पेंडिंग थे, जबकि 2024 के अंत में यह संख्या 2.04 लाख थी।

पूरे घटनाक्रम को देखा जाए तो पेपर लीक अब केवल परीक्षा प्रणाली की तकनीकी खामी नहीं रह गया है। यह युवाओं के विश्वास, सरकारी जवाबदेही और राजनीतिक संवेदनशीलता की कसौटी बन चुका है। प्रधानमंत्री की घोषणा निश्चित रूप से एक बड़ा संदेश देती है कि सरकार अब इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहती है। लेकिन उतना ही महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि क्या पीएम मोदी की यह पहल छात्रों के भीतर पैदा हुए अविश्वास को दूर कर पाएगी?

फास्ट ट्रैक कोर्ट दोषियों को जल्दी सजा दिला सकते हैं, लेकिन युवाओं का भरोसा तभी लौटेगा जब परीक्षाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी, भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी और सरकार संकट की घड़ी में केवल फैसले ही नहीं, बल्कि संवाद की राजनीति भी अपनाएगी। फिलहाल इतना तय है कि पेपर लीक का मुद्दा अदालतों से आगे बढ़कर देश की राजनीति के केंद्र में पहुंच चुका है।

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सत्ता विमर्श डेस्क
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