अयोध्या/लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) इस समय अयोध्या के राम मंदिर में कथित तौर पर दान राशि में हुई गड़बड़ी और धन के गायब होने के आरोपों की जांच कर रहा है। विवाद ने तूल तब पकड़ा जब इस महीने की शुरुआत में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दावा किया कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए करोड़ों रुपये के चंदे का हिसाब नहीं मिल रहा है। उन्होंने इस मुद्दे को करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा “अत्यंत संवेदनशील” मामला बताते हुए ट्रस्ट और राज्य सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए।
अखिलेश यादव ने कहा कि यदि चंदे में चोरी हुई है तो शिकायतें होना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी पूछा कि दान की गिनती के दौरान की सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही। हालांकि, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि इंटरनल ऑडिट में ऐसी कोई अनियमितता सामने नहीं आई है। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के प्रतिनिधि समय-समय पर ऑडिट करते हैं और अब तक कोई गड़बड़ी नहीं मिली है। मामला तब और गंभीर हो गया जब पुलिस ने मंदिर के दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया और उनमें से एक के घर से 10 लाख रुपये नकद बरामद किए।
अयोध्या के राम मंदिर परिसर पहुंची SIT
सोमवार (15 जून 2026) को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय एसआईटी अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर पहुंची। यह टीम मंदिर में मिलने वाले दान की राशि के संग्रहण और गणना प्रक्रिया की जांच कर रही है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने 13 जून को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी गठित करने का निर्णय लिया था। टीम में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। एसआईटी को सात दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
गिरफ्तारी से मामले में आया नया मोड़
दान राशि को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 13 जून 2026 को एसआईटी के गठन की घोषणा की। जांच के दौरान पुलिस ने अब तक मंदिर के दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अधिकारियों ने मंदिर में दान की गिनती करने वाले कर्मचारी लव कुश मिश्रा के घर से 10 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। हालांकि अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि बरामद धनराशि का राम मंदिर के कथित चंदा घोटाले से कोई संबंध है या नहीं। दूसरी ओर, मिश्रा के पिता ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने कमरे का ताला तोड़कर नकदी बरामद की। उनका कहना है कि उनके बेटे को फंसाने और असली दोषियों को बचाने के लिए यह साजिश की गई है।
सोमवार 15 जून को एसआईटी ने लगभग आठ घंटे तक मंदिर परिसर में जांच की। टीम ने ट्रस्ट से जुड़े लोगों, दान गिनने वाले कर्मचारियों और बैंक में जमा करने से पहले नकदी की गड्डियां तैयार करने वाले स्टाफ से पूछताछ की। जांच के दौरान एसआईटी ने कर्मचारियों की आवाजाही का रिकॉर्ड, सुरक्षा व्यवस्थाएं, पिछले एक वर्ष में नियुक्त और सेवा छोड़ चुके कर्मचारियों का विवरण भी खंगाला है। साथ ही दान संबंधी दस्तावेजों की जांच की गई और सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था का भी निरीक्षण किया गया। मंगलवार को भी एसआईटी ने मंदिर पहुंचकर अपनी जांच जारी रखी।
भाजपा के बड़े-बड़े नेता भी होने लगे हैं मुखर
ट्रस्ट के इनकार के बावजूद विवाद अब थमता नहीं दिख रहा। अखिलेश यादव के आरोपों के बाद अयोध्या के भाजपा नेता रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दो पत्र लिखकर मंदिर को मिले चंदे का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की। 9 जून को लिखे गए अपने पत्र में उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और ऐसे आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अपने दूसरे पत्र में उन्होंने कहा कि भगवान राम के नाम पर संचालित संस्थानों को पारदर्शिता के सर्वोच्च मानकों का पालन करना चाहिए। उन्होंने लिखा कि देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा और जीवन भर की कमाई मंदिर निर्माण के लिए समर्पित की है। इसलिए प्रत्येक श्रद्धालु को यह जानने का नैतिक और लोकतांत्रिक अधिकार है कि दान में मिले धन, आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का उपयोग कैसे किया गया।
विवाद तब और बढ़ गया जब पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने दावा किया कि उन्हें दान राशि के कथित दुरुपयोग की जानकारी है, लेकिन उन्होंने विवरण सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया। इसके अलावा भाजपा के वरिष्ठ नेता विनय कटियार ने भी इस मामले पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के लिए हजारों लोगों ने बलिदान दिया था और कई लोग जेल भी गए थे। ऐसे में यदि कोई चोरी या भ्रष्टाचार में शामिल पाया जाता है तो उसे ट्रस्ट से बाहर किया जाना चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि ट्रस्ट से जुड़े लोग भी कथित अनियमितताओं में शामिल हो सकते हैं और टिप्पणी करते हुए कहा, “सब के सब चोर हैं, जो भी इस समय हैं।”
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा चंदा गबन का मुद्दा
इस बीच इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है, जिसमें मामले की सीबीआई जांच और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा व्यापक ऑडिट की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी एक पत्र भेजा गया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की गई है।
मालूम हो कि जनवरी 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किए जाने के बाद से राम मंदिर को भारी मात्रा में दान प्राप्त हुआ है। सार्वजनिक दर्शन के पहले ही दिन श्रद्धालुओं ने लगभग 3.17 करोड़ रुपये का चढ़ावा चढ़ाया था। ट्रस्ट के अनुसार, मंदिर खुलने के शुरुआती 11 दिनों में लगभग 11 करोड़ रुपये का दान प्राप्त हुआ, यानी प्रतिदिन औसतन करीब 1 करोड़ रुपये। वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कुल आय लगभग 327 करोड़ रुपये रही। इसमें 153 करोड़ रुपये दान से प्राप्त हुए, जबकि 173 करोड़ रुपये ब्याज आय के रूप में आए।
(डिस्क्लेमर : यह पूरी रिपोर्ट आरोपों और चल रही जांच पर आधारित है। अभी तक एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट नहीं आई है और किसी भी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ आरोप न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं।)





Ram naam ki loot hai