बंगाल की सत्ता पर भी भाजपा काबिज, सीएम पद की शपथ लेकर सुवेंदु ने रचा इतिहास

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन ऐतिहासिक मोड़ बनकर दर्ज हो गया। दशकों दशक तक कांग्रेस, वामपंथ और फिर तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक धुरी पर घूमने वाला बंगाल अब भाजपा के नेतृत्व वाले नए राजनीतिक अध्याय में प्रवेश कर चुका है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य में पहली भाजपा सरकार की औपचारिक शुरुआत कर दी।

राजभवन में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में सुवेंदु अधिकारी ने बांग्ला भाषा में ईश्वर के नाम पर पद और गोपनीयता की शपथ ली। शपथ लेने के बाद उन्होंने मंच पर मौजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर झुककर प्रणाम किया। यह दृश्य भाजपा समर्थकों के लिए सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि वैचारिक विजय के प्रतीक के तौर पर देखा गया।

सुवेंदु अधिकारी के साथ भाजपा के पांच अन्य नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली। इनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, क्षुदीराम टूडू और निषिथ प्रमाणिक शामिल रहे। शुरुआती मंत्रिमंडल में संगठन और जनाधार दोनों के संतुलन की स्पष्ट झलक दिखाई दी। भाजपा नेतृत्व ने बंगाल में सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश की है।

शपथ ग्रहण समारोह को भाजपा ने शक्ति प्रदर्शन में बदल दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री कार्यक्रम में मौजूद रहे। इसके अलावा NDA और भाजपा शासित राज्यों के करीब 20 मुख्यमंत्री भी समारोह में शामिल हुए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यक्रम स्थल तक रोड शो करते हुए पहुंचना पूरे आयोजन का सबसे चर्चित क्षण बना। सड़क किनारे बड़ी संख्या में भाजपा समर्थक और आम लोग प्रधानमंत्री की एक झलक पाने के लिए उमड़ पड़े। मंच पर पहुंचकर मोदी ने सबसे पहले गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने भाजपा के 98 वर्षीय वरिष्ठ कार्यकर्ता माखनलाल सरकार को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया और उनके चरण स्पर्श किए। भाजपा इसे अपने “कार्यकर्ता आधारित संगठन” की संस्कृति के तौर पर प्रस्तुत कर रही है।

समारोह का सबसे भावनात्मक और राजनीतिक रूप से प्रतीकात्मक क्षण तब आया जब मुख्यमंत्री और मंत्रियों की शपथ पूरी होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी मंच से घुटनों के बल झुककर बंगाल की जनता को प्रणाम करते नजर आए। भाजपा समर्थकों ने इसे “बंगाल की जनता के जनादेश को नमन” बताया, जबकि राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह संदेश था कि भाजपा अब बंगाल में स्थायी राजनीतिक शक्ति बनने की ओर बढ़ चुकी है।

सुवेंदु अधिकारी का मुख्यमंत्री बनना सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीतिक संस्कृति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। कभी ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में शामिल रहे सुवेंदु अब उसी तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने वाले चेहरे बन गए हैं। नंदीग्राम आंदोलन से लेकर मुख्यमंत्री पद तक का उनका सफर बंगाल की राजनीति के सबसे नाटकीय अध्यायों में गिना जाएगा।

भाजपा के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती बंगाल में अपनी राजनीतिक जीत को प्रशासनिक स्वीकार्यता में बदलने की होगी। राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण, बेरोजगारी, उद्योग, सीमा सुरक्षा और केंद्र-राज्य संबंध जैसे कई मुद्दे नई सरकार की परीक्षा लेने वाले हैं। वहीं तृणमूल कांग्रेस विपक्ष की भूमिका में कितनी आक्रामक रहती है, इस पर भी पूरे देश की नजर बनी रहेगी।

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सत्ता विमर्श डेस्क
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