नई दिल्ली। NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ चल रहा आंदोलन एक बार फिर दिल्ली की सड़कों पर लौटने जा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर 2026 को दिल्ली मार्च का ऐलान किया है। इस मार्च को रोकने की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि फिलहाल ऐसी कोई ठोस वजह सामने नहीं आई है, जिससे यह माना जाए कि प्रदर्शन के दौरान कोई अप्रिय घटना होगी।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने प्रशासन से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपेक्षा जताई। अदालत ने साफ किया कि प्रदर्शन के दौरान सभी पक्षों को जिम्मेदारी और कानून के दायरे में रहकर काम करना होगा। यानी सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने की जिम्मेदारी सीधे प्रशासन पर डाल दी है।
दरअसल, दिल्ली पुलिस के रिटायर्ड अधिकारी राजेंद्र सिंह की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में दिल्ली में होने वाले BRICS समिट का हवाला देते हुए बड़े जुलूस और प्रदर्शन की अनुमति पर सवाल उठाया गया था। दलील थी कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन के दौरान राजधानी में बड़े प्रदर्शन से कानून-व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी चुनौती पैदा हो सकती है।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस आधार पर CJP के मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत का रुख इस बात का संकेत है कि महज संभावित आशंका के आधार पर किसी लोकतांत्रिक प्रदर्शन को प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता। साथ ही प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे और कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।
मांगें अब भी अधूरी, सरकार पर CJP का दबाव
CJP का कहना है कि सरकार के साथ पहले हुए समझौते और आश्वासनों के बावजूद उसकी प्रमुख मांगों पर अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। संगठन के मुताबिक चार मांगों में से तीन अब भी अधूरी हैं। इनमें छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग प्रमुख है। इसके अलावा छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने और उनके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं करने की मांग भी शामिल है। तीसरी मांग RAF और दिल्ली पुलिस की ओर से कथित कार्रवाई को लेकर माफी मांगने की है।
CJP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार को घेरते हुए कहा कि हर बार अधूरे वादों के सहारे आंदोलन को शांत नहीं कराया जा सकता। संगठन का आरोप है कि सरकार ने छात्रों से जुड़े मामलों को खत्म करने का भरोसा दिया था, लेकिन जमीन पर स्थिति अलग दिखाई दे रही है। यही वजह है कि अब 5 सितंबर का मार्च सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि सरकार को उसके पुराने आश्वासनों की याद दिलाने वाला राजनीतिक दबाव भी बनता दिखाई दे रहा है।
20 जून से शुरू हुआ था सीजेपी का आंदोलन
NEET पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर CJP ने 20 जून से जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू किया था। लंबे समय तक चले इस आंदोलन ने सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी थी।
25 जुलाई को सरकार की ओर से आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन समाप्त किया गया था। संगठन ने उस समय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई थी। लेकिन आंदोलन खत्म होने के बावजूद विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। CJP का आरोप है कि सरकार ने जिन मुद्दों पर कार्रवाई का भरोसा दिया था, उनमें से कई पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ऐसे में संगठन ने दोबारा दिल्ली की सड़कों पर उतरने का फैसला किया है।
इंडिया गेट से पुलिस मुख्यालय तक होगा मार्च
CJP के मुताबिक 5 सितंबर 2026 का मार्च इंडिया गेट से शुरू होगा और नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जाएगा। इस मार्च में उन छात्रों के परिजनों के भी शामिल होने की बात कही गई है, जिन्होंने NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या की थी। इस पहल से आंदोलन को भावनात्मक और सामाजिक समर्थन मिलने की संभावना है। छात्रों के परिवारों की भागीदारी सरकार पर नैतिक दबाव बढ़ाने की कोशिश के तौर पर भी देखी जा रही है। 24 अगस्त को CJP की वर्किंग कमेटी की वर्चुअल बैठक में दिल्ली मार्च का फैसला लिया गया था। संगठन ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि उसके धैर्य को कमजोरी न समझा जाए।
SC के फैसले के बाद बढ़ी प्रशासन की जिम्मेदारी
अब सबसे बड़ी चुनौती दिल्ली प्रशासन और पुलिस के सामने है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, लेकिन साथ ही कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी भी प्रशासन पर डाल दी है। ऐसे में 5 सितंबर का मार्च कई स्तरों पर महत्वपूर्ण होगा। एक तरफ CJP अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ाने की कोशिश करेगा, तो दूसरी तरफ प्रशासन के सामने राजधानी की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती होगी।
BRICS समिट जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन के बीच होने वाला यह मार्च इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दिल्ली में किसी बड़े प्रदर्शन का असर सिर्फ स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं रहता। ऐसे माहौल में सरकार की राजनीतिक प्रतिक्रिया, पुलिस की रणनीति और प्रदर्शनकारियों के रवैये तीनों पर नजर रहेगी।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने CJP के लिए 5 सितंबर को दिल्ली मार्च का रास्ता साफ कर दिया है। अब असली सवाल यह है कि सरकार आंदोलनकारियों की अधूरी मांगों पर क्या रुख अपनाती है। अगर सरकार और CJP के बीच फिर बातचीत नहीं होती, तो 5 सितंबर का मार्च NEET विवाद को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ला सकता है।




