नितिन गडकरी ने राजा के खिलाफ अब ये क्या कह दिया?

पुणे : केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि एक बार फिर अपने विवादित बोल से सत्ता के गलियारों में अंदरखाने खलबली मचा दी है। विवादित बोल इसलिए कि गडकरी का यह बयान सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा हमला है। ये दो ऐसे नेता हैं जिन्हें आलोचना झेलने की आदत नहीं है।

पुणे के एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम में नितिन गडकरी ने कहा कि राजा यानी शासक को ऐसा होना चाहिए कि अगर कोई उसके खिलाफ बात करे, तो उसे बर्दाश्त करे। आलोचनाओं का आत्मचिंतन करे। यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी परीक्षा होती है। गडकरी ने कहा कि साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों और कवियों को अपने विचार खुलकर और दृढ़ता से व्यक्त करने चाहिए। आजकल राजनीति में जो हो रहा है, वह दूसरी जगहों (विदेशों में) पर भी हुआ है। वहां तो पार्टियों का अस्तित्व तक खत्म हो गया।

ये कोई पहली बार नहीं है कि जब नितिन गडकरी के बयानों की चर्चा हो रही है। इससे पहले 14 सितंबर को नितिन गडकरी ने एक विपक्षी नेता का जिक्र करते हुए कहा था- ‘मुझे एक घटना याद आ रही है। मैं किसी का नाम नहीं लूंगा। उस व्यक्ति ने कहा था कि अगर आप प्रधानमंत्री बनते हैं, तो हम समर्थन करेंगे। मैंने उनसे पूछा कि आप मेरा समर्थन क्यों करेंगे और मुझे आपका समर्थन क्यों लेना चाहिए? पीएम बनना मेरे जीवन का लक्ष्य नहीं। मैं अपने संगठन के प्रति वफादार हूं। मैं किसी भी पद के लिए समझौता नहीं करूंगा। मेरा निश्चय मेरे लिए सबसे अहम है।’

जुलाई 2022 में तो उन्होंने ऐसा बयान दे दिया था कि राजनीतिक हलकों में ये अटकलें तेज हो गई थीं कि क्या गडकरी राजनीति छोड़ने की सोच रहे हैं? तब उन्होंने कहा था, “हमें राजनीति का मतलब समझने की जरूरत है। क्या ये समाज की भलाई के लिए है या सरकार में बने रहने के लिए? राजनीति महात्मा गांधी के जमाने से एक सामाजिक आंदोलन का हिस्सा रही है। लेकिन आज जो हम देख रहे हैं, उसमें राजनीति सिर्फ सत्ता के लिए की जा रही है। मैं कभी-कभी सोचता हूं कि मुझे राजनीति छोड़ देनी चाहिए। राजनीति के अलावा जिंदगी में कई चीजें हैं, जो की जानी चाहिए।”

राजनीति के जानकार मानते हैं कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के तमाम बयान को मोदी-शाह की सत्ता से अलग-थलग करके नहीं देखा जा सकता। उनके इन बयानों की ठीक से समीक्षा की जाए तो कहना गलत नहीं होगा कि नितिन गडकरी और बीजेपी आलाकमान केंद्र की सत्ता में शीर्ष पर बैठे लोगों के बीच सब कुछ ठीक नहीं है।

Previous articleसीएम योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस और सपा को क्यों कहा भस्मासुर?
Next articleबुलडोजर एक्शन में उत्तर प्रदेश सबसे आगे, एमपी दूसरे और हरियाणा तीसरे नंबर पर
सत्ता विमर्श डेस्क
सत्ता विमर्श (Satta Vimarsh) नाम ही हमारी पहचान है। हमारा मानना है कि सब कुछ सत्ता के इर्द-गिर्द तय होता है, सरकार भी और सरोकार भी। लेकिन, इस सत्ता में हमारी-आपकी भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी सत्ता में बैठे लोगों की। इसीलिए सत्ता और सरोकार से जुड़े मुद्दों पर विमर्श जरूरी है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here