पटना : बिहार के पावर कॉरिडोर में हलचल एक बार फिर से तेज हो गई है। इस बात की आशंका फिर से कुलांचे मारने लगी है कि कहीं नीतीश कुमार फिर से पलटी तो नहीं मारने वाले हैं। क्योंकि पिछले दिनों सीमांचल के अररिया में जिस तरह का प्रपंच बीजेपी के दो नेताओं ने रचा उससे नीतीश कुमार खासे नाराज बताए जा रहे हैं।
कहा तो यहां तक जा रहा है कि दोनों बीजेपी नेता नीतीश कुमार के रडार पर आ गए हैं और इसके लिए वह किसी भी हद तक जा सकते हैं। बिहार की सियासी गलियारों में कहा भी जाता है कि नीतीश के रडार में जो भी नेता आ जाता है उसका सियासी खेल खराब तो हो ही जाता है चाहे वह आरजेडी या बीजेपी से ही ताल्लुकात क्यों न रखता हो। तो चलिए जान लेते हैं कि आखिर पूरा माजरा क्या है।
दरअसल, पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री और बेगूसराय से भाजपा सांसद गिरिराज सिंह ने हिंदू स्वाभिमान यात्रा निकाली थी। यात्रा जब अररिया पहुंची तो स्थानीय सांसद प्रदीप सिंह के दिए बयान ने नीतीश कुमार को सियासी धर्मसंकट में डाल दिया। एक तरफ जहां लालू यादव की पार्टी नीतीश पर हमलावर है, वहीं दूसरी तरफ नीतीश को जेडीयू के सियासी प्रदर्शन की भी चिंता सताने लगी है।
कहा जा रहा है कि नीतीश ने दोनों ही नेताओं को अपने सियासी रडार पर ले लिया है। प्रदीप सिंह ने अररिया में कहा था कि यहां रहना है, तो सभी को हिंदू-हिंदू कहना होगा। अररिया में हिंदुओं की आबादी जहां 55 प्रतिशत है वहीं मुस्लिम 45 प्रतिशत हैं।
इसमें कोई दो राय नहीं कि नीतीश कुमार अपनी छवि सेक्युलर नेता की बनाए रखना चाहते हैं। कई मौकों पर उन्होंने इसकी कवायद भी की है। 2020 में जब उनकी पार्टी से एक भी मुस्लिम विधायक नहीं जीता तो बीएसपी के मुस्लिम विधायक को अपने पाले में लाकर मंत्री बनवा दिया।
वक्फ बिल पर भी नीतीश की पार्टी ने मुसलमानों को समर्थन देने की बात कही है। ऐसे में अररिया में गिरिराज और प्रदीप की जोड़ी के विवादित बोल से नीतीश निश्चित तौर पर असहज महसूस कर रहे हैं।
नीतीश कुमार कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के जरिए ही एनडीए को बिहार में बढ़ने की सलाह दे रहे हैं। नीतीश ही एनडीए के बिहार में नेता हैं। ऐसे में दोनों बीजेपी नेताओं ने न तो नीतीश की मंशा का ख्याल किया और न ही कॉमन मिनिमम प्रोग्राम का। बीजेपी ने दोनों नेताओं पर दिखाने के लिए भी कोई कार्रवाई नहीं की। नीतीश नहीं चाह रहे हैं कि मुसलमान एनडीए से इस कदर नाराज हो जाए कि बिना हिस्सेदारी लिए आरजेडी के पक्ष में मोर्चेबंदी कर दे।
सीमांचल में विधानसभा की 5 जिलों में विधानसभा की 30 से ज्यादा सीटें हैं। पिछली बार खराब स्थिति में भी जेडीयू को इन इलाकों में 12 सीटों पर जीत मिली थी। जेडीयू को इस बार भी यहां बढ़िया प्रदर्शन की उम्मीद है। लेकिन अगर हिंदू और मुस्लिम का ध्रुवीकरण होता है तो जेडीयू को बड़ा नुकसान हो सकता है। लिहाजा नीतीश कुमार टेंशन में हैं।
एक बात तो तय है कि नीतीश के सामने कोई चौधरी बनकर उन्हें घेरने की कोशिश करे तो वह टिक नहीं पाता। ज्यादा दिन नहीं हुए हैं, सरकार में रहते हुए खूब मुखर रहने वाले डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के साथ नीतीश कुमार खेल कर चुके हैं। डिप्टी सीएम बनने से पहले सम्राट ने एक पगड़ी बांधी थी और कसम खाया था कि जब तक नीतीश को नहीं हटाएंगे, तब तक पगड़ी नहीं हटाएंगे।
नीतीश ने ऐसा दांव खेला कि सम्राट को अपनी पगड़ी उतारनी पड़ी। इतना ही नहीं, सम्राट अब नीतीश कुमार के पीछे-पीछे चलते नजर आते हैं। अध्यक्ष पद तो गया ही, लोकसभा चुनाव के बाद से ही डिप्टी सीएम की कुर्सी जाने का डर भी सता रहा है। कोई बड़ी बात नहीं कि अब प्रदीप सिंह और गिरिराज सिंह के साथ भी खेला हो जाए।




