वर्जीनिया/वाशिंगटन/नई दिल्ली : तीन दिवसीय अमेरिका दौरे पर गए कांग्रेस नेता राहुल गांधी मंगलवार को वर्जीनिया के हर्नडन पहुंचे। इस दौरान भारतीय समुदाय के लोगों से संवाद करते हुए राहुल ने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद बहुत कुछ बदल गया है। अब डर नहीं लगता। डर निकल सा गया है। भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी ने इतना डर फैलाया, छोटे व्यवसायियों पर एजेंसियों पर दबाव बनाया, सब कुछ सेकेंडों में गायब हो गया।
राहुल ने कहा, ‘उन्हें यह डर फैलाने में सालों लग गए और गायब होने को आया तो बस कुछ सेकेंड में गायब हो गया। संसद में, मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सामने देखता हूं। मैं बता सकता हूं मोदी का विचार, 56 इंच का सीना, भगवान से सीधा संबंध, यह सब अब खत्म हो गया है, यह सब अब इतिहास बन गया है।’
भारतीय समुदाय के लोगों से संवाद कार्यक्रम में राहुल ने दो-तीन बड़ी बातें कही। राहुल ने कहा- हमारी पार्टी के फाइनेंस डिपार्टमेंट से एक व्यक्ति आए और वह बताते हैं कि हमारे सभी खाते सील हो कर दिए गए हैं। आप सोचिए कि अगर कोई व्यक्ति कारोबार चला रहा हो और उसके सामने ऐसी स्थिति हो, तब क्या होगा! कांग्रेस के साथ यही हुआ था।
हमारे पास विज्ञापन और कैंपेनिंग तक के पैसे नहीं थे। नेताओं के आने-जाने के लिए भी पैसे कम पड़ रहे थे। मल्लिकार्जुन खडगे, अन्य सीनियर लोग और हमारे ट्रेजरर हम सब साथ थे। उस वक्त ट्रेजरर सोच रहे थे कि वह इस स्थिति में करें तो क्या करें! हम इसी मसले पर तब चर्चा कर रहे थे। मेरे सामने भी इस तरह का पहला अनुभव था। ट्रेजरर ने मुझसे कहा था कि पैसे नहीं हैं। मैंने जवाब दिया कि जो होगा, देखा जाएगा। हमने इसी स्पिरिट के साथ आम चुनाव लड़ा।
यह देश सबका है, बीजेपी इसको मानने को राजी नहीं है। बीजेपी को समझ में नहीं आता कि ये देश सबका है। भारत एक संघ है। संविधान में साफ लिखा है- भारत एक संघ राज्य है, जिसमें विभिन्न इतिहास, परंपराएं, संगीत और नृत्य शामिल हैं। बीजेपी कहती है कि ये संघ नहीं है।
राहुल ने कहा- आरएसएस कहती है कि कुछ राज्य दूसरे राज्यों से कमतर हैं। कुछ भाषाएं दूसरी भाषाओं से, कुछ धर्म दूसरे धर्मों से, कुछ समुदाय दूसरे समुदाय से कमतर हैं। हर राज्य का अपना इतिहास है, परंपरा है। आरएसएस की विचारधारा में तमिल, मराठी, बंगाली, मणिपुरी है, ये कमतर भाषाएं हैं। इसी बात की लड़ाई है। सच कहें तो आरएसएस भारत को नहीं समझती है।
इसके बाद राहुल गांधी वाशिंगटन डीसी की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी पहुंचे जहां उन्होने छात्रों के कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यहां उन्होंने आरक्षण पर बात की, जाति जनगणना, मीडिया की आजादी, जांच एजेंसियों की स्वायत्तता पर बात की।
राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस आरक्षण खत्म करने के बारे में तब सोचेगी, जब सही वक्त होगा, अभी सही वक्त नहीं है। जब आप वित्तीय आंकड़ों को देखते हैं, तो आदिवासियों को 100 रुपए में से 10 पैसे मिलते हैं, दलितों को 100 रुपए में से 5 रुपए मिलते हैं और ओबीसी को भी लगभग इतनी ही रकम मिलती है।
असलियत यह है कि इन्हें भागीदारी नहीं मिल रही है। भारत के हर एक बिजनेस लीडर की सूची देखें। मुझे आदिवासी, दलित का नाम दिखाएं। मुझे ओबीसी का नाम दिखाएं। मुझे लगता है कि टॉप 200 में से एक ओबीसी है, जबकि वे भारत में 50% हैं, लेकिन हम इस बीमारी का इलाज नहीं कर रहे हैं।
राहुल ने कहा कि भारत के दलित, ओबीसी, आदिवासी को उनका हक नहीं मिल रहा है। देश के 90% आबादी वाले ओेबीसी, दलित और आदिवासी इस खेल में ही नहीं हैं। जातिगत जनगणना यह जानने का आसान तरीका है कि निचली जातियां, पिछड़ी जातियां और दलित किस स्थिति में हैं।
टॉप 200 बिजेनस की लिस्ट देखिए। 90% लोगों का कहीं हिस्सा ही नहीं है। देश के सर्वोच्च न्यायालय में देखिए, उनकी कोई भागीदारी नहीं है। मीडिया में देखिए, वहां निचली जातियां, ओबीसी, दलित हैं ही नहीं।
राहुल कहते हैं कि चुनावों से पहले, हम इस बात पर जोर देते रहे कि संस्थाओं पर कब्जा कर लिया गया है। एजुकेशन सिस्टम पर आरएसएस का कब्जा है। मीडिया और जांच एजेंसियों पर उनका कब्जा है।
हम यह कहते रहे, लेकिन लोगों को यह समझ में नहीं आ रहा था। इसके बाद मैंने संविधान को सामने रखना शुरू किया और मैंने जो कुछ भी कहा, वह अचानक से फूट पड़ा। गरीब भारत, पिछड़ा भारत, जिसने यह समझ लिया कि अगर संविधान खत्म हो गया, तो पूरा खेल खत्म हो जाएगा।
देश के लोगों ने समझा कि जो संविधान की रक्षा कर रहे हैं और जो इसे नष्ट करना चाहते हैं, यह उनके बीच की लड़ाई है। जातिगत जनगणना का मुद्दा भी बड़ा हो गया। ये चीजें अचानक एक साथ आने लगीं।
जहां तक समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की बात है तो इसपर हम तभी कुछ कहेंगे जब पता चलेगा कि बीजेपी का प्रस्ताव क्या है। हमने इसे नहीं देखा है। हमें नहीं पता कि वे किस बारे में बात कर रहे हैं। हमारे लिए इस पर टिप्पणी करने का कोई मतलब नहीं है। जब वे इसे लाएंगे, तब हम इसे देखेंगे और इस पर टिप्पणी करेंगे।




