ये क्या? इस मुद्दे पर तो राहुल गांधी के साथ खड़ी हो गई आरएसएस

नई दिल्ली/पलक्कड : जातीय जनगणना को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूरे देश में अभियान चला रखा है। राहुल लगातार कहते आ रहे हैं कि कांग्रेस के लिए जातीय जनगणना देश के नीति निर्माण की बुनियाद है। देश और समाज के संपूर्ण विकास के लिए यह बहुत जरूरी है।

केरल के पलक्कड़ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक में भी जाति जनगणना पर बात हुई और मीडिया रिपोर्ट की मानें तो संघ विचारक दिलीप देवधर ने साफतौर पर कहा कि राहुल गांधी जिस जाति जनगणना की बात कर रहे हैं, आरएसएस हमेशा से इसका पक्षधर रहा है। हमारे पास पहले से जातिगत आंकड़े मौजूद हैं। हमें बस सरकार के आधिकारिक आंकड़े का इंतजार है।

देवधर कहते हैं कि जातिगत जनगणना के बाद आरएसएस के लोग हिंदुओं की सभी जातियों तक आसानी से पहुंच सकेंगे। महत्वपूर्ण बात यह भी रही कि पलक्कड की बैठक में सरसंघचालक मोहन भागवत ने भी कहा कि सामाजिक समरसता की जड़ें मजबूत करने के लिए सभी स्वयंसेवकों को निकलना होगा। लोगों तक मैसेज पहुंचाना होगा कि मंदिर, तालाब जैसी जगहों पर सभी जातियों का समान अधिकार है।

कहने का मतलब यह कि जाति जनगणना के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूरी तरह से राहुल गांधी के साथ खड़ी हो गई है। जाति जनगणना पर आरएसएस के इस स्टैंड से मोदी-शाह नीत बीजेपी का धर्मसंकट भी खत्म हो गया है, क्योंकि अभी तक पार्टी इस मुद्दे का न तो खुलकर विरोध कर पा रही थी और न ही समर्थन।

आरएसएस की पलक्कड बैठक में जिन तीन बड़े मुद्दों पर बात हुई उनमें भी जाति जनगणना और महिला आरक्षण पर ज्यादा फोकस रहा। आरएसएस का मानना है कि 2029 तक अगर 33% महिलाएं संसद में आ जाती हैं, तो देश का इतिहास बदल जाएगा।

बैठक में शामिल संघ विचारकों के हवाले से खबरी लाल ने जो जानकारी जुटाई है उसके मुताबिक आरएसएस से जुड़े 32 संगठन लगातार महिलाओं के बीच काम कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव से पहले 5.5 लाख महिलाओं के साथ बैठक की गई थी। इन महिलाओं ने संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करवाने की मांग की थी।

बैठक में शामिल विचारकों और प्रचारकों की मानें तो 1972 में ठाणे में चिंतन बैठक हुई थी। तब संघ प्रमुख माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ने कहा था कि आरएसएस अखिल भारतीय हो चुका है। हमें हिंदू धर्म को मानने वाली सभी जातियों में पैठ बनानी होगी।

गुरु गोलवलकर का मकसद था ऐसे लोगों को आरएसएस की छाया में लाना, जो किसी न किसी तरीके से हिंदू धर्म को मानते हैं। ये कोशिश आज भी अधूरी है। लिहाजा, आरएसएस को सभी जातियों का प्रतिनिधि बनाया जाए। पलक्कड में हुई बैठक में इस बात को लेकर गंभीर चर्चा हुई है। इसके लिए आरएसएस समरसता मंच शुरू करेगा।

बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी कहा कि सामाजिक समरसता की जड़ें मजबूत करने के लिए सभी स्वयंसेवकों को निकलना होगा। लोगों तक संदेश पहुंचाना होगा कि मंदिर, तालाब जैसी जगहों पर सभी जातियों का समान अधिकार है।

संगठन के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बैठक खत्म होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में जातिगत जनगणना का जिक्र किया था। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले ही आंकड़े ले लिए हैं। इनका इस्तेमाल सिर्फ उन समुदायों या जातियों की मुश्किलें दूर करने के लिए किया जाना चाहिए। अगर किसी विशेष समुदाय या जाति को एड्रेस करने के लिए या उस पर खास ध्यान देने की जरूरत है, तो सरकार इस आंकड़े का इस्तेमाल कर सकती है।

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सत्ता विमर्श डेस्क
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