सोनिया का मोदी सत्ता पर बड़ा हमला; गाजा पर सरकार की चुप्पी देशहित के खिलाफ

कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष ने कहा- गाजा में मानवीय त्रासदी पर भारत की चुप्पी देश की ऐतिहासिक विदेश नीति और नैतिक मूल्यों के विपरीत है। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी ने भी उनका समर्थन किया।

नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गाजा में जारी युद्ध और मानवीय संकट को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने गाजा में हो रही घटनाओं पर “पत्थर जैसी चुप्पी” साध रखी है, जो न सिर्फ भारत की नैतिक जिम्मेदारी के खिलाफ है बल्कि देश के राष्ट्रीय हितों के भी प्रतिकूल है।

सोनिया गांधी ने एक अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित अपने लेख में कहा कि गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई से हुई तबाही और वहां की मानवीय स्थिति पूरी दुनिया के सामने है। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में बच्चों की मौत और घायल होने की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि बच्चों को निशाना बनाना महज संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों, अस्पतालों और स्वास्थ्य ढांचे के ध्वस्त होने से मानवीय संकट और गंभीर हो गया है।

हालांकि सोनिया गांधी ने 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इजरायल पर किए गए हमले को “जघन्य और पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया, लेकिन इसके बाद इजरायल की सैन्य कार्रवाई को “अत्यधिक क्रूर और अमानवीय” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल के शीर्ष नेताओं के सार्वजनिक बयानों से गाजा के प्रति कठोर सैन्य नीति का संकेत मिलता है।

अमेरिका की भूमिका पर भी उठाए सवाल

सोनिया गांधी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली अमेरिकी सरकार की भी आलोचना की। उनका कहना है कि वाशिंगटन के समर्थन ने इजरायल को अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखने का अवसर दिया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कई देशों ने फिलिस्तीन को मान्यता दी है और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी गाजा में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर रिपोर्टें जारी की हैं।

भारत की विदेश नीति पर साधा निशाना

कांग्रेस नेता ने कहा कि दुनिया के कई देशों में गाजा को लेकर चिंता बढ़ रही है, लेकिन भारत इस मुद्दे पर लगभग मौन बना हुआ है। उनके मुताबिक, आजादी के बाद भारत की विदेश नीति उपनिवेशवाद का विरोध, राष्ट्रीय संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय शांति के सिद्धांतों पर आधारित रही है, लेकिन मौजूदा समय में भारत अपने ऐतिहासिक रुख से दूर दिखाई दे रहा है। सोनिया गांधी ने पूर्व न्यायाधीश एस. मुरलीधर की गाजा संबंधी रिपोर्ट का भी उल्लेख किया। उनका आरोप था कि इस रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस को जन्म दिया, लेकिन केंद्र सरकार ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

राष्ट्रीय हित भी हो रहा प्रभावित

सोनिया गांधी ने कहा कि भारत का मौजूदा रुख केवल नैतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी नुकसानदेह साबित हो सकता है। उनके अनुसार, भारत फिलिस्तीन, ईरान और व्यापक पश्चिम एशिया में अपने पारंपरिक सहयोगियों से दूरी बना रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस खाली पड़े कूटनीतिक क्षेत्र का लाभ पाकिस्तान उठाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने लिखा कि भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और रणनीतिक संतुलन की जगह केवल इजरायल के साथ निकटता को प्राथमिकता दी है, जबकि वैश्विक जनमत तेजी से बदल रहा है।

कांग्रेस नेताओं ने किया समर्थन

सोनिया गांधी के लेख के सामने आने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सोशल मीडिया पर उनका समर्थन किया। राहुल गांधी ने कहा कि भारत को अपनी स्वतंत्र विदेश नीति, मानवीय मूल्यों और नैतिक स्पष्टता के साथ गाजा मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए। वहीं मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि भारत की वर्तमान विदेश नीति ने देश को फिलिस्तीन, ईरान और पश्चिम एशिया के पुराने मित्र देशों से दूर कर दिया है। प्रियंका गांधी ने भी सोनिया गांधी के लेख के प्रमुख अंश साझा करते हुए कहा कि गाजा में हो रही घटनाओं पर भारत की चुप्पी का नैतिक या तार्किक आधार समझ से परे है।

सोनिया गांधी ने अपने लेख के अंत में कहा कि भारतीय राष्ट्र की मूल भावना यही मांग करती है कि भारत फिलिस्तीनी नागरिकों के पक्ष में मानवीय आधार पर अपनी आवाज उठाए। उनके अनुसार, मोदी सरकार की मौजूदा चुप्पी को न नैतिक रूप से उचित ठहराया जा सकता है और न ही राष्ट्रीय हितों के आधार पर।

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सत्ता विमर्श डेस्क
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