”अपना घर हो, अपना आंगन हो, इस ख्वाब में हर कोई जीता है।
इंसान के दिल की ये चाहत है एक घर का सपना कभी न छूटे।”
नई दिल्ली : महान गीतकार और कवि प्रदीप की उक्त पंक्तियों का उल्लेख करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी बुधवार को बड़े ही सख्त लहजे में कहा कि अफसर जज नहीं बन सकते। वे यह तय न करें कि दोषी कौन है। मौका था बुलडोजर एक्शन पर फैसला सुनाने का।
बुलडोजर की कार्रवाई पर फैसला सुनाते हुए जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि 15 दिन के नोटिस दिए बगैर अगर निर्माण गिराया जाता है तो निर्माण गिराने वाले अफसर के खर्च पर उसे दोबारा बनाना पड़ेगा। बेंच ने कहा- कोई अफसर खुद जज नहीं बन सकते। यह सीमाओं को पार करने जैसा होगा। जो अफसर कानून अपने हाथ में लेता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। गलत नीयत से की गई कार्रवाई पर ऐसे अफसर को बख्शा नहीं जा सकता है। यह भी ध्यान रहे कि जब कोई सिर्फ आरोपी है तो ऐसे में उसकी प्रोपर्टी गिरा देना बिल्कुल असंवैधानिक है। घर वर्षों का संघर्ष होता है। इसे गिराया जाए तो अफसर को साबित करना होगा कि यही आखिरी विकल्प था।
सर्वोच्च अदालत ने इस संबंध में 15 दिशा निर्देश भी जारी किए-
1. अगर बुलडोजर एक्शन का ऑर्डर दिया जाता है तो इसके खिलाफ अपील करने के लिए वक्त दिया जाना चाहिए।
2. रातों-रात घर गिरा दिए जाने पर महिलाएं-बच्चे सड़कों पर आ जाते हैं, ये अच्छा दृश्य नहीं होता। उन्हें अपील का वक्त नहीं मिलता।
3. हमारी गाइडलाइन अवैध अतिक्रमण, जैसे सड़कों या नदी के किनारे पर किए गए अवैध निर्माण के लिए नहीं है।
4. शो कॉज नोटिस के बिना कोई निर्माण नहीं गिराया जाएगा।
5. रजिस्टर्ड पोस्ट के जरिए कंस्ट्रक्शन के मालिक को नोटिस भेजा जाएगा और इसे दीवार पर भी चिपकाया जाए।
6. नोटिस भेजे जाने के बाद 15 दिन का समय दिया जाए।
7. कलेक्टर और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को भी जानकारी दी जाए।
8. डीएम और कलेक्टर ऐसी कार्रवाई पर नजर रखने के लिए नोडल अफसर की नियुक्ति करें।
9. नोटिस में बताया जाए कि निर्माण क्यों गिराया जा रहा है, इसकी सुनवाई कब होगी, किसके सामने होगी। एक डिजिटल पोर्टल हो, जहां नोटिस और ऑर्डर की पूरी जानकारी हो।
10. अधिकारी पर्सनल हियरिंग करें और इसकी रिकॉर्डिंग की जाए। फाइनल ऑर्डर पास किए जाएं और इसमें बताया जाए कि निर्माण गिराने की कार्रवाई जरूरी है या नहीं। साथ ही यह भी कि निर्माण को गिराया जाना ही आखिरी रास्ता है।
11. ऑर्डर को डिजिटल पोर्टल पर दिखाया जाए।
12. अवैध निर्माण गिराने का ऑर्डर दिए जाने के बाद व्यक्ति को 15 दिन का मौका दिया जाए, ताकि वह खुद अवैध निर्माण गिरा सके या हटा सके। अगर इस ऑर्डर पर स्टे नहीं लगाया गया है, तभी बुलडोजर एक्शन लिया जाएगा।
13. निर्माण गिराए जाने की कार्रवाई की वीडियोग्राफी की जाए। इसे सुरक्षित रखा जाए और कार्रवाई की रिपोर्ट म्युनिसिपल कमिश्नर को भेजी जाए।
14. गाइडलाइन का पालन न करना कोर्ट की अवमानना मानी जाएगी। इसका जिम्मेदार अधिकारी को माना जाएगा और उसे गिराए गए निर्माण को दोबारा अपने खर्च पर बनाना होगा और मुआवजा भी देना होगा।
15. हमारे डायरेक्शन सभी मुख्य सचिवों को भेज दिए जाएं।
इससे पहले पिछली तीन सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अलग-अलग तारीखों में अलग-अलग टिप्पणिया की थीं। 17 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 1 अक्टूबर तक बुलडोजर एक्शन नहीं होगा। अगली सुनवाई तक देश में एक भी बुलडोजर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। जब केंद्र ने इस ऑर्डर पर सवाल उठाया कि संवैधानिक संस्थाओं के हाथ इस तरह नहीं बांधे जा सकते हैं। तब जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन ने कहा था कि अगर कार्रवाई दो हफ्ते रोक दी जाएगी तो आसमान नहीं फट पड़ेगा।
12 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि बुलडोजर एक्शन देश के कानूनों पर बुलडोजर चलाने जैसा है। अगर कोई सिर्फ आरोपी है तो प्रॉपर्टी गिराने की कार्रवाई कैसे की जा सकती है? सुप्रीम कोर्ट जमीयत-उलेमा-ए-हिंद की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि बीजेपी शासित राज्यों में मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है और बुलडोजर एक्शन लिया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी का बेटा आरोपी हो सकता है, लेकिन इस आधार पर पिता का घर गिरा देना! यह कार्रवाई का सही तरीका नहीं है।
2 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि भले ही कोई दोषी क्यों न हो, फिर भी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना ऐसा नहीं किया जा सकता। हालांकि बेंच ने यह भी स्पष्ट किया था कि वह सार्वजनिक सड़कों पर किसी भी तरह के अतिक्रमण को संरक्षण नहीं देगा। लेकिन, इस मामले से जुड़ी पार्टियां सुझाव दें। हम पूरे देश के लिए गाइडलाइन जारी कर सकते हैं।
दरअसल, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में सरकार ने कई आरोपियों के घर बुलडोजर से तोड़ दिए थे। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई थीं, जिनमें प्रॉपर्टी तोड़ने को लेकर गाइडलाइंस बनाने की मांग की गई थी।




